यहां होली के दूसरे दिन घरों के अंदर कैद रहते हैं पुरुष, बाहर निकलने पर जबर्दस्त पिटाई करती हैं महिलाएं

हमीरपुर के कुंडौरा गांव में महिलाओं की होली का इतिहास 5 सौ साल से पुराना है. गांव की बहुएं और बेटियां भी फाग निकलने के दौरान नृत्य करती हैं. इसे गांव का पुरुष देख नहीं सकता है. यदि किसी ने देखने की हिम्मत भी की तो उन्हें लट्ठ लेकर गांव से ही खदेड़ दिया जाता है. पिटाई भी की जाती है.

हमीरपुर की अनोखी होली Image Credit:

हमीरपुर के कुंडौरा गांव में होली की अनोखी परंपरा है. यहां होली के दूसरे दिन पुरुषों को घर के अंदर रहना पड़ता है. उनका बाहर निकलना प्रतिबंधित हैं. कोई पुरुष बाहर ना निकल आए, इसलिए कई महिलाएं गांव के रास्तों पर पहरा देती नजर आती हैं. बची महिलाओं की टोली खूब रंग खेलती हैं. इस दौरान अगर कोई पुरुष धोखे से भी महिलाओं के बीच पहुंच जाए तो उन्हें पकड़ लिया जाता है. महिलाओं के कपड़े पहना कर नचवाया जाता है. विरोध करने पर पिटाई भी की जाती है. साल भर घुंघट में कैदर रहने वाली इन महिलाओं की होली के दिन हुकूमत चलती है.

500 साल पुराना है इस होली का इतिहास

कुंडौरा गांव में महिलाओं की होली का इतिहास 5 सौ साल से पुराना है. गांव की बहुएं और बेटियां भी फाग निकलने के दौरान नृत्य करती हैं. इसे गांव का पुरुष देख नहीं सकता है. यदि किसी ने देखने की हिम्मत भी की तो उन्हें लट्ठ लेकर गांव से ही खदेड़ दिया जाता है. यहां महिलाओं की फाग निकालने की कोई फोटो या वीडियो नही बना सकता है, यदि कोई इस अनूठी परम्परा का चोरी छिपे फोटो लेते पकड़ा गया तो उस पर तगड़ा जुर्माना लगाया जाता है. सारी महिलाएं ऐसा करने वालों की कोड़ों से पिटाई करती हैं.

कई पुरुष हो चुके हैं महिलाओं के दंड का शिकार

गांव की बुजुर्ग महिला सीतादेवी की माने तो कई पीढ़ियों से यह परंपरा चली आ रही है. साल में एक बार होली के दिन ही यहां महिलाओं को घर और घूंघट से बाहर निकलने का मौका मिलता है. वहीं, गांव के पूर्व ग्राम प्रधान अवधेश की मानें तो वो अपनी इस प्राचीन परंपरा से खास उत्साहित रहते हैं. कई बार महिलाओं के दंड का शिकार भी हो चुके हैं. यहां की होली की शोरहत बहुत दूर दूर तक फैली है. इस परम्परा में शामिल होने को गांव की बेटियां भी अपने मायके आ जाती हैं.