घाट, उद्योग और बॉयोडायवर्सिटी पार्क… गंगा एक्सप्रेसवे से बदल जाएगी ‘मिनी हरिद्वार’ की सूरत

गंगा एक्सप्रेसवे की वजह से उत्तर प्रदेश के गढ़मुक्तेश्वर (मिनी हरिद्वार) की दशा और दिशा ही बदल जाने वाली है. इस शहर को आस्था, उद्योग और पर्यटन का केंद्र बनाने की तैयारी है. यह शहर पहले सिर्फ मोक्षधाम के रूप में जाना जाता था, अब औद्योगिक गलियारे और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से इसकी सूरत बदल जाएगी. नई औद्योगिक इकाइयां रोजगार सृजित करेंगी, वहीं बायोडायवर्सिटी पार्क पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन को बढ़ावा देगा.

गढ़ क्षेत्र में विकास के खुलेंगे दरवाजे

मेरठ से प्रयागराज के बीच बन रहे 594 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे कई शहरों में विकास की नई इबारत लिखने वाला है. खासतौर पर मिनी हरिद्वार के नाम से जाने और पहचाने जाने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गढ़ की तो दशा और दिशा ही बदल जाएगी. पहले तो हापुड़ जिले का यह शहर आस्था और मोक्ष धाम के रूप में ही जाना जाता था, लेकिन जल्द ही यहां पर उद्योग और पर्यटन का का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है. इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार और हापुड़ जिला प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है.

बता दें कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हापुड़ का गढ़ मुक्तेश्वर हजारों साल से आस्था का केंद्र रहा है. दिल्ली एनसीआर से लेकर मेरठ-मुरादाबाद एवं आसपास के दर्जनों जिलों से रोजाना यहां हजारों की तादात में लोग आते हैं और गंगा स्नान के बाद दान पुण्य करते हैं. खासतौर पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर यहां बड़ा मेला लगता है. इसके अलावा यहां आधा उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान से काफी संख्या में लोग अपने पूर्वजों की अस्थियां प्रवाहित करने भी आते हैं.

ऐसे बदल रही शहर की सूरत

लोगों की आस्था को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पहले से ही गढ़ मुक्तेश्वर यानी गढ़ यानी ब्रजघाट के कायाकल्प में जुटी है. इसी क्रम में गंगा किनारे पक्के घाट, आरती स्थल और मोक्ष स्थली के सौंदर्यीकरण के काम कराए गए हैं. वहीं अब वन विभाग द्वारा बायोडायवर्सिटी पार्क का निर्माण कराया जा रहा है. इस पार्क के बनने से यहां पर पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन की संभावनाएं बढ़ेगी. वहीं दूसरी ओर, एक मल्टीलेबल पार्किंग और पर्यटन सुविधा केंद्र भी बनाया जा रहा है.

गंगा एक्सप्रेसवे से बदलेगी सूरत

सरकार की योजना के मुताबिक हापुड़ के गढ़ तहसील क्षेत्र से होकर गुजर रहा गंगा एक्सप्रेसवे आस्था के इस केंद्र को विकास की दौड़ में शामिल करने वाला है. दरअसल सरकार ने इस एक्सप्रेसवे से लगते बहादुरगढ़ क्षेत्र के ठेरा, चुचावली, सदरपुर और भैना आदि गांवों में औद्योगिक गलियारा बनाने का फैसला किया है. लगभग 130 हेक्टेयर क्षेत्र में बनने वाले इस औद्योगिक गलियारे में सैकड़ों की तादात में औद्योगिक यूनिटों की स्थापना होगी. इससे यहां रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. इसके लिए अब तक 38 एकड़ जमीन खरीदी जा चुकी है.

क्या है गढ़ का इतिहास?

गढ़मुक्तेश्वर एक पौराणिक तीर्थ स्थल है. मान्यता है कि भगवान श्रीराम के पूर्वज महाराज शिवि ने इसी गढ़मुक्तेश्वर में अपने सन्यास की अवधि काटी थी. उन्होंने ही परशुराम के द्वारा शिव मंदिर की स्थापना कराई. उस समय इस स्थान को खाण्डवी वन क्षेत्र कहा जाता था. शिव मंदिर की स्थापना और वल्लभ सम्प्रदाय का प्रमुख केंद्र होने की वजह से कालांतर में इस स्थान का नाम शिववल्लभपुर पड़ा. शिवपुराण में कथा आती है कि भगवान विष्णु के गण जय और विजय को नारद के श्राप की वजह इस स्थान पर आना पड़ा था और उन्हें यहीं से मोक्ष की प्राप्ति हुई थी. तब से इस स्थान को गढ़मुक्तेश्वर कहा जाने लगा. महाभारत के दौर में हस्तिनापुर राज्य की राजधानी का एक हिस्सा था.