बागपत के खूनी बदले की कहानी… 27 साल में कुल 11 लाशें, पुरानी अदावत के चलते हुआ हिस्ट्रीशीटर विवेक मलिक का मर्डर

बागपत में हिस्ट्रीशीटर विवेक मलिक उर्फ विक्की की गोली मारकर हत्या कर दी गई है. इस मर्डर की जड़ें 27 साल पहले शुरू हुई एक अदावत से जुड़ी हुई है. इस अदावत में कुल मिलाकर अब तक 11 लोगों की जान जा चुकी है.

बागपत हिस्ट्रीशीटर मर्डर केस

बागपत में मंगलवार यानी 10 मार्च को दोघट कस्बे में एक शादी समारोह के दौरान हिस्ट्रीशीटर विवेक मलिक उर्फ विक्की (42) की गोलियों से भून कर हत्या कर दी गई. विवेक उर्फ विक्की को कुल चार गोलियां मारी गई. जिले के बहावड़ी गांव में 27 साल से चली आ रही खूनी रंजिश में एक और जान ले ली गई. इस रंजिश में अब तक कुल 11 लोगों की जान जा चुकी है. आलम यह है, जिस पक्ष को मौका मिलता है, वह दूसरे पक्ष के लोगों के साथ ऐसा ही सलूक करता है.

हमलावरों ने इस घटना को दोघट के धूम सिंह फार्म हाउस में अंजाम दिया. यहां बहावड़ी गांव की पूर्व प्रधान बबली देवी के पति विक्की अपने साथियों के साथ बारात में आए थे. रात 1 बजे के करीब बारात चढ़ रही थी. उसी वक्त हमलावरों ने विक्की को घेर लिया. उसपर 15-20 राउंड फायरिंग की. 4 गोलियां लगने के बाद विक्की की मौके पर ही मौत हो गई. उधर भीड़ ने मुख्य आरोपी यशवीर उर्फ रजत को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया.

27 साल पहले शुरू हुई थी वर्चस्व और रंजिश की लड़ाई

हिस्ट्रीशीटर विवेक मलिक उर्फ विक्की की हत्या का स्क्रीनप्ले 27 साल पहले 1999 में लिखा जा चुका था, जब जितेंद्र नाम के एक शख्स की हत्या में उसका नाम सामने आया था. दरअसल, बहावड़ी गांव के एक ही कुटुंब के वेदू और दरियाव सिंह के परिवार के बीच वर्चस्व को लेकर विवाद शुरू हुआ. धीरे-धीरे वर्चस्व की लड़ाई प्रधान पद की चुनावी रंजिश तब्दील हो गया. जितेंद्र दरियाव परिवार से था, तो मृतक विवेक वेदू परिवार से.

वर्चस्व और रंजिश की लड़ाई में साल 1999 में पहली हत्या हुई. दरियाव के बेटे जितेंद्र को गोली हत्या कर दी गई. आरोप लगा विवेक पर. अगले साल 2000 में वेदू के बेटे सुरेश मलिक और परिवार के अन्य सदस्य यशपाल की हत्या कर दी गई. इस हत्या का आरोप लगा दरियाव पक्ष पर. साल 2011 में दरियाव परिवार के बेटे प्रधान बिजेंद्र का गला रेतकर मर्डर हुआ. 2014 और 2016 में बिजेंद्र के भाई देवेंद्र और धर्मेंद्र की हत्याएं हुईं. इन सभी हत्याओं का आरोप हिस्ट्रीशीटर विवेक मलिक उर्फ विक्की और उसके परिवार पर लगाया गया.

बीच में 10 साल तक शांत रही थी अदावत

यहां तक कुख्यात बदमाश विक्की त्यागी की हत्या मुजफ्फरनगर कचहरी में विवेक के बेटे सागर ने कर दी थी. दरअसल, सागर को विक्की त्यागी का दरियाव परिवार का मदद करना नागवार गुजरा. हालांकि बीच में साल 2001 से लेकर 2011 के बीच ग्रामीणों की समझाइश के बाद दोनों के बीच की अदावत शांत रही थी. लेकिन 2011 में दरियाव पक्ष के बिजेंद्र की हत्या के साथ यह रंजिश फिर सामने आ गई.

साल 2024 में जेल से बाहर आया था विवेक

विक्की साल हत्या के आरोप में 2011 में जेल गया था और 2024 में ही बाहर आया था. बाहर आने के बाद वह फिर से अपनी पत्नी को चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहा था. उधर दरियाव पक्ष का यशवीर उर्फ रजत अपने पिता और ताऊ के साथ परिवार के अन्य सदस्यों की हत्या का बदला लेने का मौका ढूंढ रहा था. यह मौका उसे दोघट कस्बे के एक शादी समारोह में मिल गया है.

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