‘वो सुसाइड तो नहीं कर सकते…’ IPS अनुराग धनखड़ के निधन से हैरान है परिवार, भाई ने कह दी बड़ी बात
त्रिपुरा के डीजीपी IPS अनुराग धनखड़ की संदिग्ध मौत से परिवार और गांव के लोग सदमे में हैं. परिजन सुसाइड की खबरों को नकारते हुए कहते हैं कि इतनी बेदाग छवि और अनुशासित अधिकारी ऐसा कदम नहीं उठा सकते. नीरव मोदी केस की जांच करने वाले धनखड़ को सभी धैर्यवान और सरल स्वभाव का बताते हैं. उनके निधन से गहरा रहस्य बना हुआ है, और लोग सच्चाई जानने का इंतजार कर रहे हैं.
त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग धनकड़ की संदिग्ध मौत पर उनके पैत्रिक गांव उत्तर प्रदेश में बागपत के बिहारीपुर में रहने वाले लोग हैरान हैं. यह हर किसी का यही कहना है कि अनुराग तो ऐसा नहीं कर सकते. इस घटना से उनके परिवार के लोग गहरे सदमे में हैं. परिजनों का कहना है कि वर्षों तक ईमानदारी, अनुशासित और बेदाग छवि के साथ पुलिस अधिकारी की जिम्मेदारी निभाने वाले अनुराग धनखड़ इतने तो कमजोर नहीं थे, कि वह सुसाइड कर लें.
उनके निधन आधिकारिक रूप से पहुंच गई है, बावजूद इसके चाहें परिजन हों या गांव के लोग, अब भी इस खबर पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं. गांव में रहने वाले उनके ममेरे भाई अमित कुमार के मुताबिक वह बेहद मिलनसार, सरल स्वभाव और सुलझे हुए व्यक्तित्व के इंसान थे. अब मीडिया में उनके आत्महत्या की जो बातें सामने आ रही हैं, इस पर उन्हें भरोसा नहीं होता. वह ऐसे व्यक्ति नहीं थे जो इस तरह का कदम उठाएं.
बड़े धैर्य से काम लेते थे अनुराग
अमित के मुताबिक अनुराग हर परिस्थिति का धैर्य और समझदारी से काम लेते थे. उन्होंने अपने पूरे सेवा काल में ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा को सर्वोपरि रखा. परिवार से गहरा जुड़ाव रखते थे और जब भी बागपत आते थे, सभी से आत्मीयता के साथ मिलते थे. इतने बड़े से बड़े अधिकारी होने के बावजूद उन्होंने कभी पद का अहंकार नहीं दिखाया. उनके निधन से परिवार ही नहीं, बल्कि इस गांव ने अपना गौरव खो दिया है.
प्रशासनिक अफसरों का है परिवार
अनुराग धनखड़ एक ऐसे परिवार से आते थे, जिसकी कई पीढ़ियों ने प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई. बागपत के बिहारीपुर गांव का यह परिवार लंबे समय से सेवा, अनुशासन और नेतृत्व की परंपरा के लिए जाना जाता है. अनुराग धनकड़ के दादा हीरा सिंह धनखड़ मेरठ जेल में सुपरिटेंडेंट जेलर रहे. परिवार के ही वरिष्ठ सदस्य जय सिंह धनखड़ भी जेलर रहे. प्रशासनिक सेवा से जुड़े इन दोनों अधिकारियों ने परिवार में अनुशासन और सार्वजनिक सेवा की मजबूत नींव रखी. उनके पिता स्वर्गीय सतपाल सिंह धनकड़ बिहारीपुर गांव के लगातार दो बार ग्राम प्रधान बने.
धनखड़ ने की थी नीरव मोदी केस की जांच
सीबीआई में एसपी, डीआईजी, ज्वाइंट डायरेक्टर और एडिशनल डायरेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दे चुके अनुराग धनखड़ ने पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के आरोपी नीरव मोदी से जुड़े मामले की जांच की थी. इसके अलावा उन्होंने सीआईएसएफ में आईजी (पर्सनल), बीएसएफ, संयुक्त राष्ट्र के कोसोवो मिशन (यूएन मिशन) तथा गृह मंत्रालय के अधीन 1984 के सिख विरोधी दंगों की विशेष जांच टीम (एसआईटी) के अध्यक्ष के रूप में भी अहम जिम्मेदारियां निभाईं.
एयरफोर्स से रिटायर हैं बड़े भाई
अनुराग के बड़े भाई विवेक धनखड़ भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हैं. वह वर्तमान में दिल्ली में रहते हैं. जबकि छोटे भाई रविराज धनखड़ बड़ौत में व्यवसाय करते हैं. उनके चचेरे भाई लोकेंद्र धनखड़ बागपत में अधिवक्ता हैं. बिहारीपुर गांव की पुरानी हवेली से निकलकर देश की सर्वोच्च पुलिस सेवा तक पहुंचने वाले अनुराग धनखड़ का जीवन इस बात का उदाहरण है कि मजबूत पारिवारिक संस्कार, शिक्षा और मेहनत किसी भी व्यक्ति को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिला सकते हैं.