जौहर यूनिवर्सिटी के ध्वस्तीकरण पर स्टे बरकरार, कमिश्नर कोर्ट में बहस के बाद मिली अगली तारीख
आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर मुरादाबाद मंडलायुक्त कोर्ट ने रोक बरकरार रखी है. रामपुर विकास प्राधिकरण के आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी की अपील पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. यूनिवर्सिटी ने तर्क दिया कि सितंबर 2024 से पहले क्षेत्र RDA के दायरे में नहीं था, जिससे यूनिवर्सिटी का भविष्य अधर में है.
सपा के राष्ट्रीय महासचिव आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी के भविष्य को लेकर आज भी कोई फैसला नहीं हो सका है. यह मामला मुरादाबाद मंडलायुक्त की कोर्ट में लंबित है. जहां मंडलायुक्त ने आज की सुनवाई में यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों के गिराने के फैसले पर रोक बरकरार रखते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है. रामपुर विकास प्राधिकरण ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को अवैध घोषित करते हुए इनके डिमोलिशन (ध्वस्तीकरण) के आदेश दिए थे.
इस आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने मंडलायुक्त कोर्ट में अपील दाखिल की है. इस अपील पर सोमवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई. इसमें जौहर यूनिवर्सिटी प्रबंधन और रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के वकीलों ने अपने अपने पक्ष रखे. तमाम दलीलें दी और साक्ष्य अदालत में पेश किए. यूनिवर्सिटी पक्ष के अधिवक्ताओं ने आरडीए द्वारा जारी शो-कॉज नोटिस और ध्वस्तीकरण के आदेश को पूरी तरह अवैध करार दिया. उनका तर्क था कि जिस क्षेत्र में यूनिवर्सिटी स्थित है, वह सितंबर 2024 से पहले आरडीए के अधिकार क्षेत्र में ही नहीं था.
यूनिवर्सिटी ने दिया ये तर्क
कहा कि प्राधिकरण ने अब तक इस क्षेत्र का न तो मास्टर प्लान तैयार किया है और न ही जोनल डेवलपमेंट प्लान है. ऐसे में बिना किसी विकास योजना के कोई भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई वैधानिक नहीं है. लंबी बहस के बाद मंडलायुक्त कोर्ट ने फिलहाल यूनिवर्सिटी के भवनों पर किसी भी प्रकार के डिमोलिशन पर रोक (स्टे) बरकरार रखी है. दूसरी ओर, राज्य सरकार व आरडीए का पक्ष रखते हुए डीजीसी दिनेश चौहान ने कोर्ट में प्राधिकरण की कार्रवाई को नियमानुसार सही ठहराया.
कोर्ट ने सुरक्षित किया फैसला
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. अब न्यायालय तय करेगा कि मामले में अंतिम निर्णय सुनाया जाए या फिर किसी तकनीकी बिंदु पर स्पष्टीकरण के लिए अगली तारीख दी जाए. यूनिवर्सिटी के वकील जुनेद एज़ाज़ ने कहा कि जब तक मास्टर प्लान लागू नहीं होता, कोई कार्रवाई संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि उनकी दलील के बाद कमिश्नर ने स्टे बरकरार रखा है.