मरीज की हालत बिगड़ने से पहले ही अलर्ट करता है AI वेंटीलेटर, बची कइयों की जान

कानपुर के लाला लाजपत राय अस्पताल में लगाए गए AI वेंटिलेटर मरीज के प्रमुख स्वास्थ्य पैरामीटर्स जैसे ब्लड प्रेशर, हृदय गति, श्वसन दर और ऑक्सीजन सैचुरेशन पर निरंतर निगरानी रखते हैं. किसी भी पैरामीटर में निर्धारित सीमा से थोड़ा सा भी अंतर होने पर सिस्टम तत्काल अलर्ट जारी करता है. इससे डॉक्टर समय रहते मरीज की जान बचाने की प्रकिया शुरू कर पाते हैं.

AI वेंटिलेटर Image Credit:

कानपुर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि जीवन रक्षा का मजबूत माध्यम बन रहा है. गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध लाला लाजपत राय (एलएलआर) अस्पताल के मेडिसिन आईसीयू-एचडीयू वार्ड में 20 अत्याधुनिक एआई-आधारित वेंटिलेटर इंस्टॉल किए गए हैं. ये AI वेंटिलेटर गंभीर मरीजों के लिए नई उम्मीद जगा रहे हैं.

ये AI-युक्त वेंटिलेटर मरीज के प्रमुख स्वास्थ्य पैरामीटर्स जैसे ब्लड प्रेशर, हृदय गति, श्वसन दर और ऑक्सीजन सैचुरेशन पर निगरानी रखते हैं. किसी भी पैरामीटर में निर्धारित सीमा से थोड़ा सा भी अंतर होने पर सिस्टम तत्काल अलर्ट जारी करता है. इससे समय रहते मरीज की जान बचाने की संभावनाएं बढ़ जाती है.

AI-युक्त वेंटिलेटर से मरीज का इलाज और हुआ सटीक

इन एआई-युक्त वेंटिलेटर से मरीज की इलाज प्रक्रिया अधिक सटीक, त्वरित और प्रभावी हो गई है. गंभीर सांस संबंधी परेशानी, निमोनिया, सेप्सिस, आघात तथा न्यूरोमस्कुलर रोगों से पीड़ित मरीजों को इसका सीधे तौर पर लाभ मिल रहा है. इन वेंटिलेटर्स की कुल लागत करीब 3.95 करोड़ रुपये रही है.

स्टॉफ की कमी का प्रभाव कम हो जाएगा

बता दें कि ये वेंटिलेटर श्वसन क्रिया को मरीज की आवश्यकता के मुताबिक चलाते हैं. इससे इलाज के परिणाम में सुधार आया है. AI की इस व्यवस्था से डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कमी का प्रभाव काफी हद तक कम हो गया है. मरीज के देखभाल के लिए अलग से स्टॉफ की जरूरत भी नहीं पड़ रही है.

मरीज तक पहुंच जाएगी डॉक्टर की रिपोर्ट

दरअसल, वेंटिलेटर वाले मरीजों की निरंतर निगरानी के लिए अलग से स्टाफ की आवश्यकता पड़ती है, लेकिन अब एआई सिस्टम 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित कर रहा है. कक्ष में केवल तकनीकी सहायक की उपस्थिति होना जरूरी है. मरीज की पूरी रिपोर्ट इसके जरिए डॉक्टर्स तक पहुंच रही है.

एआई वार्ड को टेलीमेडिसिन से भी जोड़ा गया

एआई वार्ड को टेलीमेडिसिन से जोड़ा गया है. इससे दिल्ली सहित देश के प्रमुख उच्च चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ जांच रिपोर्ट्स के आधार पर तत्काल परामर्श दे रहे हैं. जटिल सर्जरी या गंभीर स्थितियों में राष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञ राय उपलब्ध होने से उपचार की गुणवत्ता में सुधार हुआ है तथा मरीजों और उनके परिजनों का विश्वास बढ़ा है.

इमरजेंसी में भर्ती होने वाले गंभीर मरीजों को मिल रहा लाभ

इमरजेंसी में भर्ती होने वाले गंभीर मरीजों को इसका विशेष लाभ मिल रहा है. एआई वेंटिलेटर्स के शामिल होने से आईसीयू बेडों की संख्या 58 तक पहुंच गई है. अस्पताल में रोजाना औसतन 3,500 ओपीडी मरीज और 100 से अधिक भर्ती मरीजों का उपचार होता है. एआई ने उपचार प्रक्रिया को सरल, व्यवस्थित और समय के अनुकुल बना दिया है. बड़े सड़क हादसों से लेकर गंभीर बीमारियों तक, यह तकनीक जीवन रक्षा में अहम योगदान दे रही है.

आयुष्मान वार्ड में भी इन वेंटिलेटर्स को किया जाएगा इंस्टॉल

प्राचार्य प्रोफेसर संजय काला ने बताया कि अब आयुष्मान वार्ड में भी 30 बेडों पर सेंसर-युक्त एआई चिप लगाने की तैयारी अंतिम स्टेज में है. यह व्यवस्था मार्च के पहले हफ्ते से शुरू हो सकती है, जो पल्स रेट, ब्लड प्रेशर आदि पर लगातार नजर रखकर असामान्यता पर तुरंत अलर्ट जारी करेगी. इससे आकस्मिक जटिलताओं की संभावना काफी कम हो जाएगी.