बस्ती में दो मासूम लड़कियां बनी मां, एक का पड़ोसी ने तो दूसरे का भाई ने किया था रेप

बस्ती में एक मासूम बच्ची का उसके पड़ोसी ने तो दूसरी लड़की का भाई ने रेप किया था. अब दोनों बच्चियों ने सिर्फ 13 और 14 साल की उम्र में मां बन गई हैं. सहेलियों के साथ खेलने की उम्र में उनकी गोद में एक नवजात है.

बस्ती में दो मासूम लड़कियों पर जुल्म Image Credit:

बस्ती में दो ऐसी बच्चियां मां बनी हैं, जिनकी अभी ‘मां’ शब्द का अर्थ और जिम्मेदारी समझने की उम्र ही नहीं है. एक की उम्र 13 साल और दूसरी की 14 साल है. कैली अस्पताल के गलियारों में जब इन मासूमों की डिलीवरी हुई, तो वहां मौजूद हर शख्स की रूह कांप गई. यह सिर्फ दो बच्चों का जन्म नहीं है, बल्कि दो बचपनों की सामूहिक हत्या की दर्दनाक कहानी है.

परिजनों को 6 महीने बाद हुई बच्ची के रेप की जानकारी

पहली रेप पीड़िता बेटी नगर थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली है. उसके साथ गांव के ही एक संजय नाम के युवक ने जबरन खेत में ले जाकर रेप किया. जब पीड़िता को 6 महीने का गर्भ ठहर गया तब जाकर उसके परिजनों को इसकी जानकारी हुई. फिर परिजनों ने आरोपी युवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज जिया है. अब इस बहादुर बेटी ने समाज से मिलने वाले ताने को दरकिनार करते हुए और भविष्य की चिंता किए बिना बच्चे को जन्म दिया.

अपने घर के अंदर ही नहीं सुरक्षित बेटी

वहीं, दूसरी बेटी मुस्लिम समुदाय से आती है. रिश्ते में भाई लगने वाले एक युवक ने उसके साथ गलत हरकतें की. आरोपी युवक पीड़िता एक ही घर में रहते हैं. इसी बात का फायदा उठाकर आरोपी ने रेप जैसे जघन्य वारदात को अंजाम दिया. आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे जेल भेजा जा चुका है. बता दें कि यह मामला गोंडा जनपद के खोड़ारे थाने संबंधित है. लेकिन पीड़िता की डिलीवरी बस्ती के कैली अस्पताल में हुई.

समाज अक्सर ‘लोकलाज’ के पर्दे के पीछे कड़वे सच को छिपाने की कोशिश करता है, लेकिन इन दो बेटियों के मामले में सन्नाटा चीख-चीख कर सवाल पूछ रहा है. दरिंदगी की शिकार होने के बाद जब इन बच्चियों को गर्भ ठहरा, तो शुरुआती महीनों में उन्हें यह तक समझ नहीं आया होगा कि उनके शरीर के भीतर क्या बदलाव हो रहे हैं. जब तक बात समझ आती, तब तक कानून और प्रकृति के चक्र ने उन्हें एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया, जहां से पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं था.

खेलने-कूदने की उम्र में गोद में नवजात

13 साल की वो बच्चियां, जो कल तक अपनी सहेलियों के साथ लुका-छिपी खेलती थी, आज उनकी गोद में एक नवजात है. उसकी आंखों में वात्सल्य कम और एक अनजाना डर ज्यादा दिखाई देता है. पुलिस रिकॉर्ड कहते हैं कि अपराधी जेल की हवा खा रहे हैं. उन पर पॉक्सो एक्ट और रेप की धाराएं लगी हैं. कानून अपनी जगह काम कर रहा है, अब सवाल है कि क्या जेल की सजा उन जख्मों को भर पाएगी जो इन बच्चियों के कोमल मन पर लगे हैं?