कानपुर में गंगा किनारे मिली थी मरी डॉल्फिन, अब जो पता चला वह इंसानों के लिए भी खतरनाक

कानपुर के जाजमऊ इलाके में गंगा नदी के किनारे एक मृत डॉल्फिन का शव मिला था. डॉल्फिन का जब पोस्टमार्टम किया गया तो चौंकाने वाले खुलासे हुए. इस दौरान डॉल्फिन का लिवर पूरी तरह काला और क्षतिग्रस्त पाया गया. यह गंगा नदी में में भारी धातुओं और रासायनिक प्रदूषण होने का इशारा कर रहा है.

गंगा नदी किनारे मिली थी मृत डॉलफिन

इंदौर में प्रदूषित पानी से होने वाली मौतों का मातम अभी पूरा ही नहीं हो पाया कि कानपुर के पास गंगा में प्रदूषित पानी की गूंज सुनाई पड़ रही है. 4दिन पहले कानपुर के पास गंगा में डॉल्फिन का शव मिला. पोस्टमार्टम में उसका लिवर डैमेज निकला. साथ ही नगर निगम की जांच में भी कई नाले गंगा में गिरते हुए भी मिले हैं.

कानपुर के जाजमऊ इलाके में गंगा नदी के किनारे शुक्रवार यानी 03 जनवरी यानी शुक्रवार को एक मृत डॉल्फिन मिलने से पर्यावरण प्रेमियों और वन विभाग में हड़कंप मच गया. डॉल्फिन का जब पोस्टमार्टम किया गया तो चौंकाने वाले खुलासे हुए. डॉल्फिन का लिवर पूरी तरह काला और क्षतिग्रस्त पाया गया. गंगा में भारी धातुओं और रासायनिक प्रदूषण होने का इशारा कर रहा है.

समय से पहले ही डॉल्फिन की हो गई मौत

जानकारी के मुताबिक यह डॉल्फिन मादा थी और गैंगेटिक डॉल्फिन प्रजाति की थी. इसकी सामान्य आयु 30 वर्ष होती है. मृत डॉल्फिन की अनुमानित उम्र 18 वर्ष बताई जा रही है. यानी कि युवावस्था में ही उसकी मौत हो गई. इसकी लंबाई नौ फीट से अधिक थी और वजन करीब 182 किलोग्राम पाया गया.

डॉल्फिन के लिवर का हो चुका था बुरा हाल

पोस्टमार्टम की प्रक्रिया डेढ़ घंटे से अधिक समय तक चली. डॉक्टरों ने जब डॉल्फिन के पेट में चीरा लगाया तो लिवर की स्थिति देखकर वे भी स्तब्ध रह गए. लिवर का काला पड़ना भारी धातुओं जैसे क्रोमियम, मर्करी और अन्य रासायनिक प्रदूषकों के प्रभाव का संकेत होता है. यह स्थिति गंगा के पानी में लगातार बढ़ते प्रदूषण को उजागर कर रहा है.

आईवीआरआई, बरेली भेजा गया डॉल्फिन का विसरा

पोस्टमार्टम के दौरान डॉल्फिन के लिवर, तिल्ली, किडनी और हार्ट से विसरा निकाला गया. इसे सुरक्षित रखा गया है. इसे आईवीआरआई, बरेली भेज दिया गया. वहां माइक्रोबायोलॉजिकल, हिस्टोपैथोलॉजिकल और टॉक्सिकोलॉजिकल जांच की जाएगी. जांच रिपोर्ट से डॉल्फिन की मौत का सटीक कारण स्पष्ट होगा, लेकिन प्रारंभिक संकेत प्रदूषण की ओर ही इशारा कर रहे हैं.

गंगा नदी से वन विभाग की टीम ने सैंपल लिया

वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि गंगा में औद्योगिक कचरा और रासायनिक अपशिष्टों का लगातार डंपिंग इस तरह की घटनाओं की वजह है. वन विभाग की टीम ने गंगा नदी से पानी का सैंपल भी लिया. जाजमऊ के दोनों पुलों के नीचे जहां डॉल्फिन मृत पाई गई, वहां से एकत्रित इस सैंपल को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च (आईआईटीआर), लखनऊ भेजा जाएगा. सैंपल में क्रोमियम, मर्करी जैसी भारी धातुओं की मौजूदगी की जांच की जाएगी.

फॉरेस्ट रेंजर राकेश पांडेय ने बताया कि डॉल्फिन की मौत का सही कारण जानने के लिए विसरा आईवीआरआई भेजा गया है. रिपोर्ट आने के बाद ही सबकुछ साफ होगा, लेकिन पोस्टमार्टम में लिवर पूरी तरह काला और डैमेज पाया गया है. यह गंगा के प्रदूषण स्तर की तरफ इशारा कर रहा है.

नगर आयुक्त ने किया निरीक्षण

नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने भी घटनास्थल और उसके आसपास के क्षेत्रों का दौरा किया. इस दौरान रानीघाट में बायोरेमेडिएशन का कार्य क्रियाशील पाया गया. निरीक्षण के दौरान पाया गया कि गंगा नदी में 07 नाले रानीघाट, गोला घाट, रामेश्वर घाट, सत्तीचैरा घाट, डबका नाला, गुफ्तारघाट, परमिया नाला बायोरेमेडिएशन के माध्यम से गंगा नदी में प्रवाह किए जा रहे है और 06 नाले गन्दा नाला, हलवाखाडा नाला, पनकी थर्मल नाला, अर्रा बिनगवाॅ नाला, सागर पुरी नाला, पिपौरी नाला बायोरेमेडिएशन के माध्यम से पाण्डू नदी में प्रवाह किये जा रहे हैं.