अकबर के दरबार में ही नहीं, कानपुर में भी थे ‘नवरत्न’, जिन्होंने अपने खून से लिखी शौर्यगाथा

कानपुर में भी 'नवरत्न' वीर सैनिक हैं, जिनके परिवारों को उत्तर प्रदेश सरकार वार्षिक वित्तीय सहायता देती है. यह सहायता कानपुर को सैन्य सम्मान में एक विशिष्ट स्थान दिलाती है, जो देश के लिए बलिदान देने वाले परिवारों के प्रति राज्य की स्थायी जिम्मेदारी को दर्शाती है.

कानपुर के नवरत्न Image Credit:

आपने पढ़ा होगा कि अकबर के दरबार में नौ नवरत्न हुआ करते थे जो शासन चलाने में मदद करते थे. नवरत्नों के बिना अकबर भी अपना शासन नहीं चला पाता था. ऐसे ही नौ नवरत्न कानपुर में भी है जिनको आज भी याद किया जाता है और उनके परिजनों को पुरस्कार राशि भी प्रदान की जाती है. देश की रक्षा करने वाले वीर सैनिकों को यह पुरस्कार राशि दी जाती है.

उत्तर प्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी शासनादेश के तहत कानपुर के नवरत्न के आश्रितों को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कुल 7.15 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं. ये सभी कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र विजेता थे. शासनादेश के अनुसार, कीर्ति चक्र एवं शौर्य चक्र से अलंकृत व्यक्तियों को राज्य सरकार द्वारा अनुमन्य धनराशि प्रदान की जाती है.

एक कीर्ति चक्र और 9 शौर्य चक्र विजेताओं को सम्मान

इस सूची में सर्वोच्च वीरता पुरस्कार कीर्ति चक्र प्राप्त शहीद मेजर अविनाश सिंह भदौरिया शामिल हैं, जिनकी पत्नी शालिनी भदौरिया को 1 लाख 30 हजार रुपये की वार्षिकी स्वीकृत की गई है. शेष आठ शौर्य चक्र विजेताओं को प्रति व्यक्ति 65 हजार रुपये की वार्षिकी प्रदान की जा रही है, जिन्होंने अपने खुन से शौर्यगाता लिखी है.

शौर्य चक्र प्राप्तकर्ताओं में मेजर सुनील यादव 2007, शहीद मेजर सलमान अहमद खान 2006, (आश्रित पिता मुख्तार अहमद खान), कर्नल बाबूराम कुशवाहा 1996, कार्पोरल अमर कुमार बाजपेयी 2001, लेफ्टिनेंट अभिनव त्रिपाठी 2011, कैप्टन आदित्य प्रकाश सिंह 2016, जय प्रकाश शर्मा 1989, आसीत कुशवाहा शाहीन 983 तथा मास्टर वारंट ऑफिसर (स्वर्गीय) केशव नाथ उपाध्याय 1979, आश्रित पत्नी श्रीमती कलावती देवी उपाध्याय शामिल हैं.

सैन्य सम्मान के मामले में कानपुर का विशिष्ट स्थान- DM

इस प्रकरण की खास बात यह है कि सूची में थलसेना और वायुसेना के अधिकारी एवं जवान शामिल हैं. एक ही जिले से तीनों सैन्य धाराओं का प्रतिनिधित्व करते हुए दस अलंकरण प्राप्त वीरों का होना कानपुर नगर को देश के चुनिंदा जिलों की श्रेणी में लाकर खड़ा करता है. प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार ऐसी स्थिति बहुत कम जिलों में देखने को मिलती है.

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि यह वार्षिकी केवल आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि उन सैनिकों और शहीदों के परिजनों के प्रति राज्य सरकार की स्थायी जिम्मेदारी का निर्वहन है, जिन्होंने देश की रक्षा में अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया. एक कीर्ति चक्र और नौ शौर्य चक्र विजेताओं के साथ कानपुर सैन्य सम्मान के मामले में विशिष्ट स्थान रखता है.