कानपुर किडनी कांड: भगोड़े डॉक्टर का वीडियो वायरल, नोटों के बिस्तर पर ऐश करते दिखा
कानपुर किडनी कांड के फरार आरोपी डॉक्टर अफजाल का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह नोटों के बिस्तर पर ऐश करता दिख रहा है. आहूजा अस्पताल में हुए इस बड़े घोटाले के बाद से डॉक्टर अफजाल फरार था. वायरल वीडियो में उसके साथ ड्राइवर परवेज सैफी भी दिख रहा है.
वैसे तो डॉक्टर को धरती का भगवान कहा जाता है लेकिन कुछ डॉक्टर ऐसे भी होते है जो पैसे के लिए मरीजों की जान भी दांव पर लगा देते है. ऐसे ही कुछ डॉक्टर्स का भंडाफोड़ हुआ कानपुर के किडनी कांड में. अब इस कांड से जुड़े रोज नए मामले सामने आते जा रहे है. वहीं, अब इस किडनी कांड में फरार आरोपी डॉक्टर का एक वीडियो सामने आया है.
इस वीडियो में फरार चल रहे डॉक्टर अफजाल नोटों के बेड पर ऐश करता नजर आ रहा है. वायरल वीडियो में उसके साथ ड्राइवर परवेज सैफी भी दिख रहा है. अब पुलिस इस वीडियो की भी जांच में जुट गई है. आहूजा अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट का अवैध खेल चल रहा था, इसका भंडाफोड़ तब हुआ जब डोनर ने कम पैसे मिलने पर पुलिस को सूचना दी थी.
मामले में डॉक्टर्स समेत 9 लोग अब तक गिरफ्तार
बिहार के समस्तीपुर के रहने वाला MBA छात्रा ने अवैध कारोबार का खुलासा किया था. उसने परिवार की आर्थिक तंगी में एक किडनी 10 लाख रुपये में बेचने का सौदा किया था. लेकिन उसे तय रकम से 50,000 रुपये कम मिलने पर इसका भंडाफोड़ कर दिया. इसके बाद कई डॉक्टर्स समेत 9 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया और तीन अस्पताल सील कर दिए.
इस मामले में कई डॉक्टर अब भी पुलिस की गिरफ्तद से फरार हैं, इस बीच अब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें किडनी ट्रांसप्लांट में फरार चल रहे डॉक्टर अफजाल दिख रहा है. वीडियो में वो नोटों के बेड पर ऐश करता नजर आ रहा है. उसके साथ में एक आदमी और दिखाई पड़ रहा है जो उसका ड्राइवर परवेज सैफी बताया जा रहा है.
पंजाब के शख्स ने भी गिरोह को दिए थे 43 लाख रुपये
अब पुलिस भी इस वीडियो की जांच कर रही है. यह वीडियो कहां का है, किसने बनाया, इतने पैसे किसे द्वारा दिए गए थे और सबसे बड़ी बात की इस समय दोनों कहा है? पुलिस इस बात की जांच में जुटी हुई है. इस कांड के तार अब पंजाब और मोहाली तक भी जुड़ गए है. ताजा खुलासे में अमृतसर के एक पीड़ित द्वारा बनाया गया ‘सुसाइड नोट वीडियो’ सामने आया है.
अमृतसर के रहने वाले मनजिंदर सिंह ने किडनी ट्रांसप्लांट के लिए इस गिरोह को 43 लाख रुपये दिए थे. मनजिंदर ने अपनी जान बचाने की उम्मीद में भारी कर्ज लेकर यह रकम जुटाई थी और इसे ‘अहूजा हॉस्पिटल’ से जुड़े बिचौलियों के पास जमा किया था. पैसे लेने के बावजूद जब किडनी नहीं मिली और पीड़ित ने पैसे वापस मांगे, तो उसे प्रताड़ित किया जाने लगा.