कानपुर किडनी कांड में एक्शन, दोनों अस्पताल सील; डोनर-रिसीवर लखनऊ रेफर
कानपुर किडनी कांड में एक्शन जारी है. डोनर और रिसीवर को बेहतर इलाज के लिए लखनऊ रेफर किया गया है. इस मामले में तीन अस्पतालों पर कार्रवाई की गई है, जो इस घोटाले में संलिप्त थे. यह गिरोह टेलीग्राम के जरिए डोनर्स और मरीजों को फंसाता था. जांच में 60 से ज्यादा अवैध ऑपरेशन की बात सामने आई है.
कानपुर के हैलट हॉस्पिटल में भर्ती किडनी प्रत्यारोपण के रिसीवर पारुल तोमर और डोनर आयुष चौधरी को गुरुवार, लखनऊ रेफर कर दिया गया. दो डॉक्टरों की टीम के साथ दोनों मरीजों को एम्बुलेंस से राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल (RMLH) के लिए रवाना किया गया. अब इन दोनों का इलाज लखनऊ के RMLH के नेफ्रोलॉजी विभाग में किया जाएगा.
इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने भी सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. गुरुवार को अहूजा हॉस्पिटल और प्रिया हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द कर दिया गया. दोनों अस्पतालों को तीन दिन के अंदर अपना पूरा सामान हटाने का आदेश दिया गया है. इससे एक दिन पहले ही मेड लाइफ हॉस्पिटल को सील कर दिया गया था. जांच में 60 से ज्यादा अवैध ऑपरेशन की बात आई है.
50 हजार रुपये के विवाद में रैकेट का भंडाफोड़
अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा गिरोह और डोनर के बीच 50 हजार रुपये के विवाद के बाद हुआ. बिहार के समस्तीपुर के रहने वाला MBA छात्रा आयुष चौधरी ने परिवार की आर्थिक तंगी में एक किडनी 10 लाख रुपये में बेचने का सौदा किया था. लेकिन उसे तय रकम से 50,000 रुपये कम ही मिले, जिसके बाद उसने पुलिस को इसकी सूचना दी.
क्राइम ब्रांच और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 31 मार्च को अहूजा हॉस्पिटल समेत तीन पर छापोमारी की. जहां किडनी ट्रांसप्लांट और इलाज की सुविधा मौजूद नहीं थी सबकुछ अवैध चल रहा था. जांच में पता चला है कि गिरोह अब तक 60 से ज्यादा अवैध ऑपरेशन कर चुका है. एक किडनी को 60 लाख रुपये में बेचा जाता था, और डोनर को 10 लाख मिलते थे.
डोनर-रिसीवर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती
छापेमारी के दौरान, अस्पताल परिसर में डोनर औऱ रिसीवर भी भर्ती थे. पहले दोनों को कानपुर के हैलेट अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां डॉक्टर्स की टीम ने जी जान से दोनों का इलाज किया. लेकिन वहां किडनी ट्रांसप्लांट से संबंधित इलाज की सुविधा ना होने के चलते डोनर आयुष और रिसीवर पायल को लखनऊ के राम मनोहर लोहिया अस्पताल भेजा गया है.
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. संजय काला ने बताया कि दोनों मरीजों को बेहतर इलाज के मद्देनजर किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (KGMC), संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट (SGPGI) और RMLH से भर्ती की अनुमति मांगी थी. बुधवार देर रात RMLH के डायरेक्टर ने मरीजों को एडमिट करने की मंजूरी दे दी. इसके बाद तुरंत रेफरल की प्रक्रिया शुरू कर दी गई.
आहूजा अस्पताल का मालिक गिरफ्तार, चार अन्य फरार
डॉ. काला ने स्पष्ट किया कि उन्हें इलाज के लिए लखनऊ भेजने का फैसला लिया गया. ऐसे मरीजों के लिए किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट होती है, आईसीयू होता है और विशेषज्ञ स्टाफ भी होता है जो सुविधा फिलहाल यहां नहीं है. इसके बावजूद डॉक्टर्स की टीम ने दिन रात एक करके पायल का क्रिएटनीन 3.9 से 1.8 पर ले आए. मरीजों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया.
वहीं, किडनी कांड में अबतक आहूजा अस्पताल के मालिक डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, उनकी पत्नी डॉ. प्रीति आहूजा समेत पाच आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. लेकिन गिरोह का मास्टरमाइंड चार अन्य डॉक्टर बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश जारी है. पुलिस का मानाना है कि यह गिरोह केव कानपुर तक ही सीमित नहीं है, इसके तार अन्य राज्यों में भी हो सकता है.