बिकरू कांड में कोर्ट का बड़ा फैसला, विकास दुबे गैंग के 4 गुर्गों को आर्म्स एक्ट में सजा
'बिकरू कांड' से जुड़े एक अहम मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला आया है. आर्म्स एक्ट के तहत विकास दुबे के 4 गुर्गों को सजा सुनाई गई है. दो गुर्गे को 7 साल की और दो अन्य गैंग मेंबर को ढाई साल की सजा दी गई है.
कानपुर में साढ़े पांच साल पहले उत्तर प्रदेश को दहला देने वाले चर्चित ‘बिकरू कांड’ से जुड़े एक अहम मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला आया है. अपर जिला जज कोर्ट ने घटना के बाद फरार हुए विकास दुबे गैंग के चार सदस्यों को आयुध अधिनियम (Arms Act) के तहत दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है.
यह था मामला
2 जुलाई 2020 की रात चौबेपुर के बिकरू गांव में विकास दुबे और उसके गुर्गों ने बिल्हौर के तत्कालीन क्षेत्राधिकारी (CO) देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मियों की जघन्य हत्या कर दी थी. इस मुठभेड़ में सात अन्य पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल भी हुए थे. घटना के मुख्य आरोपी विकास दुबे की बाद में पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी, जबकि उसके साथी गिरफ्तारी से बचने के लिए इधर-उधर छिपे हुए थे.
भौती अंडरपास से हुई थी गिरफ्तारी
पुलिस की सघन छापेमारी के दौरान 1 मार्च 2021 को पनकी पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की थी. पुलिस ने भौती अंडरपास के पास से विकास दुबे के चार सहयोगियों संजय सिंह परिहार उर्फ टिंकू, अभिनव तिवारी उर्फ चिंकू, रामजी उर्फ राधे कश्यप और शुभम पाल को दबोचा था. तलाशी के दौरान इनके पास से हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद हुआ था, जिसमें प्रतिबंधित ऑटोमैटिक मशीन गन (कारबाइन) और विदेशी राइफलें शामिल थीं.
बरामद हथियारों का विवरण
कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट के अनुसार, अभियुक्तों के पास से निम्नलिखित अवैध असलहे बरामद हुए थे. संजय सिंह परिहार से एक कारबाइन ऑटोमैटिक मशीन गन. अभिनव तिवारी के पास यूएसए निर्मित स्प्रिंग फील्ड सेमी-ऑटोमैटिक इंग्लिश राइफल और 10 जिंदा कारतूस. रामजी उर्फ राधे से 12 बोर की देसी बंदूक, 25 जिंदा कारतूस, एके-47 के 2 कारतूस और 7.62 एमएम के 20 कारतूस. शुभम पाल से एक रिवाल्वर, 40 जिंदा कारतूस, 32 बोर पिस्टल के 4 कारतूस, एक अद्धी तमंचा और 38 बोर की एक अन्य रिवाल्वर मिला था.
कोर्ट का फैसला और सजा
डीजीसी (जिला शासकीय अधिवक्ता) दिलीप अवस्थी ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पुख्ता सबूत और गवाह पेश किए. अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद चारों आरोपियों को दोषी माना. रामजी उर्फ राधे को 7 वर्ष का सश्रम कारावास और 15,000 रुपये जुर्माना. संजय सिंह परिहार: 7 वर्ष का सश्रम कारावास को 10,000 रुपये जुर्माना. अभिनव तिवारी को 2.5 वर्ष की कैद और 5,000 रुपये जुर्माना. शुभम पाल: 2.5 वर्ष की कैद और 5,000 रुपये जुर्माना की सजा दी गई.
जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषियों को अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी.