बुढ़ापे का प्यार, 60 की उम्र में शादी; फिर 4 साल में ही क्यों होने लगा तलाक?

कानपुर में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है. यहां 60 वर्षीय सेवानिवृत्त अधिकारी ने 45 वर्षीय पीएचडी स्कॉलर से बुढ़ापे में शादी की. मात्र चार साल बाद ही पति ने तलाक का मुकदमा दायर कर दिया, जिसके जवाब में पत्नी ने घरेलू हिंसा और गुजारा भत्ता का मामला दर्ज कराया है. कभी समाज के लिए मिसाल बनी यह अनोखी शादी अब अदालत की लड़ाई में उलझ गई है.

कानपुर कोर्ट Image Credit:

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक हैरान करने वाली घटना हुई है. यहां टीपी नगर में रहने वाले एक 60 वर्षीय सेवानिवृत्त अफसर को बुढ़ापे में 45 वर्ष की पीएचडी स्कॉलर महिला से प्यार हुआ. शादी रचाई, लेकिन महज चार साल में ही दोनों में तलाक की नौबत आ गई है. कभी समाज के लिए मिसाल बनी यह शादी अब कोर्ट-कचहरी के चक्करों में उलझ कर रह गई है. इस शादी से पहले दोनों ने ही जीवन का एक लंबा समय बिना शादी के गुजारा था. अचानक साल 2022 में दोनों मिले तो प्यार हो गया.

फिर ढलती उम्र में दोनों को लगा कि एक-दूसरे का सहारा बनना चाहिए. फिर क्या था, 18 अप्रैल 2022 को लखनऊ के मीरा बाई मार्ग स्थित आर्य समाज मंदिर में दोनों ने सात फेरे ले लिए. 31 जुलाई 2022 को पति सेवा निवृत हुए तो 14 अगस्त 2022 को किदवई नगर के एक गेस्ट हाउस में ‘सेवानिवृत्ति पार्टी’ और ‘विवाह आशीर्वाद समारोह’ एक साथ आयोजित किया गया. नाते-रिश्तेदारों और मित्रों के बीच यह अनोखी शादी खूब चर्चा में रही.

फिर क्यों हो रहा तलाक?

​शुरुआत में सब कुछ ठीक रहा, लेकिन धीरे-धीरे छोटी-मोटी नोकझोंक ने गंभीर विवाद का रूप ले लिया. स्थिति तब बिगड़ी जब पति ने पिछले साल नवंबर में कोर्ट में तलाक का मुकदमा दाखिल कर दिया. जब पत्नी के पास कोर्ट का समन पहुंचा, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. महिला के अनुसार, बुढ़ापे में सहारे के लिए जो कदम उठाया था, उसने अवसाद (डिप्रेशन) की स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है. ​समन मिलने के बाद सदमे में आई महिला 23 मई को रावतपुर स्थित ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ पहुंची.

काउंसलिंग में भी नहीं बनी बात

काउंसलर्स ने महिला को ढांढस बंधाया और पति को बुलाकर समझौते का प्रयास किया, लेकिन पति किसी भी कीमत पर साथ रहने को राजी नहीं हुए. काउंसलिंग फेल होने के बाद, अब पीड़ित पत्नी ने भी कानूनी रास्ता अख्तियार कर लिया है. महिला ने शुक्रवार को पति के खिलाफ कोर्ट में घरेलू हिंसा और गुजारा भत्ता (भरण-पोषण) का मुकदमा दायर कर दिया है. जो रिश्ता कभी समाज के लिए एक सुखद मिसाल बना था, वह अब अदालती जंग में तब्दील हो चुका है.

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