मोबाइल से फोटो खींचकर चालान करना कानूनी या गैरकानूनी? RTO के खिलाफ कोर्ट पहुंचा मामला
चालान के नाम पर RTO वाहन ट्रांसफर क्यों नहीं कर सकता, अब यह मामला कोर्ट पहुंच गया है. एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने कानपुर RTO के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है. इसमें मोबाइल से फोटो खींचकर चालान करने की कानूनी वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं. कोर्ट ने पुलिस और RTO से जवाब मांगा है.
लखनऊ: क्या ट्रैफिक चालान के नाम पर आरटीओ विभाग वाहन का ट्रांसफर रोक सकता है? क्या सिर्फ मोबाइल से फोटो खींचकर किया गया चालान कानूनी रूप से पर्याप्त है? इन सवालों को लेकर कानपुर की अदालत में एक मामला पहुंचा है. कानपुर RTO के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया है. कोर्ट ने मामले में अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है.
कानपुर के श्याम नगर निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता विजय बख्शी ने मुकदमा दर्ज कराया है. दरअसल, उन्होंने अपनी एक कार प्रवीन साहनी को बेची थी. कार के खरीददार जब आरटीओ विभाग गए तो उनको बताया गया कि इस कार पर पंजाब में चालान लंबित है. RTO ने कहा कि जब तक चालान का भुगतान नहीं होगा, तब तक वाहन ट्रांसफर नहीं किया जाएगा.
जब चालान की वसूली कोर्ट करता है, तो…
जानकारी के मुताबिक, जब यह बात विजय बख्शी को पता चली तो उन्होंने आरटीओ विभाग में प्रार्थनापत्र देकर पूछा कि किस कानून के तहत चालान का भुगतान किए बिना वाहन ट्रांसफर नहीं किया जा सकता? क्या कानून में इसका अलग से कोई प्रावधान है? लेकिन वरिष्ठ अधिवक्ता को उनके प्रार्थनापत्र पर विभाग की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया.
इसके बाद विजय बख्शी ने BNS की धारा 173(4) के तहत कानपुर RTO राकेद्र कुमार सिंह के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CMM) की अदालत में परिवाद दायर किया. याचिका में कहा गया है कि ट्रैफिक चालान की वसूली का अधिकार अदालत के पास होता है. ऐसे में RTO चालान लंबित होने का हवाला देकर वाहन का ट्रांसफर रोक नहीं सकता.
मोबाइल से फोटो खींचकर चालान गैरकानूनी?
याचिका में एक और अहम मुद्दा उठाया गया है. इसमें कहा गया है कि कई मामलों में पुलिसकर्मी मोबाइल से फोटो खींचकर चालान जारी कर देते हैं. याचिकाकर्ता का तर्क है कि डिजिटल साक्ष्य को कानूनी रूप से स्वीकार करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया का पालन होना चाहिए. हालांकि, यह अदालत के समक्ष रखा गया याचिकाकर्ता का पक्ष है.
इस पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रदीप कुमार शुक्ला की अदालत ने मामले को दर्ज करते हुए आरटीओ अधिकारी से वरिष्ठ स्तर के पुलिस अधिकारी द्वारा जांच कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही संबंधित पक्षों से भी जवाब मांगा गया है. अदालत में इस मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त 2026 को होगी.