अपने गांव का पहला इंजीनियर बनेगा शुभम, पढ़ाई के पिता ने बेच दी थी पुश्तैनी जमीन
कानपुर के शुभम ने JEE एडवांस में 736वीं रैंक हासिल कर अपने गांव का पहला इंजीनियर बनने का गौरव प्राप्त किया है. पिता अभिषेक अग्रवाल ने उसकी पढ़ाई और कोचिंग के लिए पुश्तैनी जमीन तक बेच दी थी. शुभम की कड़ी मेहनत और परिवार के त्याग ने रंग लाया है, अब वह IIT में दाखिला लेकर अपने और परिवार के संघर्ष की कहानी को सफलता की ऊंचाइयों तक ले जाएगा.
जेईई एडवांस में ऑल इंडिया 736वीं रैंक हासिल कर कानपुर के शुभम ने ना केवल अपने गांव और शहर का नाम रोशन किया है, बल्कि अपने पिता को भी गर्व से भर दिया है. इस परीक्षा में शुभम कानपुर शहर का टापर है, यह कहते हुए उसके पिता अभिषेक अग्रवाल की आंखें भर आती है. वह कहते हैं कि बेटे की पढ़ाई के लिए उन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीन बेच दी थी. आज उन्हें खुशी है कि बेटे ने उसका मान रख लिया है.
उन्होंने बताया कि उनके गांव में पहली बार यदि कोई इंजीनियर बनेगा तो वो उनका बेटा है. अभिषेक अग्रवाल के मुताबिक शुभम बचपन से ही पढ़ाई में होशियार था. उन्होंने भी उसकी पढ़ाई के संसाधन जुटाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. यहां तक कि उसे कोचिंग में दाखिला दिलाने के लिए पैसे नहीं थे तो उन्होंने अपना पुश्तैनी खेत बेच दिया था. अभिषेक अग्रवाल के मुताबिक वह मूलरूप से फर्रुखाबाद में जगतपुर गांव के रहने वाले हैं.
दूसरे प्रयास में क्रैक किया एग्जाम
अभिषेक अग्रवाल के मुताबिक उनके बेटे ने दूसरे प्रयास में यह एग्जाम क्रैक किया है. साल 2025 में शुभम ने यूपी बोर्ड से 12वीं पास किया और पहली बार उसी साल जेईई का पेपर दिया था. चूंकि उस समय रैंक अच्छा नहीं था, इसलिए एक साल तैयारी की और दोबारा एग्जाम में बैठा. खुद बीएससी तक पढ़ाई कर चुके शुभम के पिता ने बताया कि पहले एग्जाम का रिजल्ट आने के बाद उन्होंने अच्छी तैयारी के लिए कोचिंग में एडमिशन कराया. इसके लिए उन्हें अपना खेत तक बेचना पड़ा था.
कर ली है फीस की व्यवस्था
अभिषेक अग्रवाल के मुताबिक बेटे का आईआईटी में दाखिला होना है. इसके लिए उन्होंने फीस आदि की व्यवस्था कर ली है. कहा कि रिजल्ट तो आज आया है, उन्हें तो एग्जाम खत्म होते ही पता चल गया था. इसलिए उसी समय वह फीस की व्यवस्था में जुट गए थे. उन्होंने बताया कि उनके बेटे के पास मोबाइल फोन तो नहीं है लेकिन वह पढ़ाई के लिए लैपटॉप इस्तेमाल करता है.