कानपुर: मोहर्रम जुलूस में लगाए थे भड़काऊ नारे, अब यूपी सरकार ने मुकदमे की दी मंजूरी; क्या है मामला?

कानपुर में साल 2024 में मुहर्रम जुलूस के दौरान धार्मिक नारेबाजी की गई थी. आपत्तिजनक नारों से धार्मिक भावनाएं आहत हुई थी और शहर में तनाव फैला था. अब यूपी सरकार ने इस मामले में आरोपियों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है. यह फैसला BNSS 2023 के तहत लिया गया है.

UP सरकार ने आरोपियों पर मुकदमे की दी मंजूरी (फाइल फोटो) Image Credit:

उत्तर प्रदेश सरकार ने कानपुर में साल 2024 के मोहर्रम जुलूस के दौरान लगाए गए आपत्तिजनक नारे पर सख्त रूख अपनाया है. धार्मिक नारेबाजी और भावनाओं को आहत करने के मामले में चार आरोपियों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी दी है. यह फैसला BNS की धारा 217 के तहत लिया गया है, जिसमें BNS और IT एक्ट के तहत अपराध दर्ज हैं.

घटना की जड़ें 14 जुलाई 2024 को सातवीं मोहर्रम के जुलूस में हैं. इस दौरान जुलूस के दुर्गा मंदिर के सामने पहुंचने पर विवादास्पद नारेबाजी की गई थी. मामले में दो बाल अपचारियों का भी नाम शामिल है, जिनके खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ेगी. इस घटना ने स्थानीय स्तर पर दो समुदायो के बीच धार्मिक तनाव को बढ़ावा दिया था.

सर तन से जुदा, भारत में रहना है तो… जैसे नारे

मोहर्रम का जुलूस, मदरसा गरीब नवाज से शुरू होकर पूर्व निर्धारित मार्ग से गुजरते हुए मिलिट्री कैम्प पुलिस चौकी के पीछे मस्जिद पर समाप्त हुआ था. जुलूस का नेतृत्व अनीस मंसूरी उर्फ अन्नू, पुत्र मोहम्मद शमी, निवासी जालपा नगर, परमपुरवा कर रहे थे. वहीं, जुलूस के दुर्गा मंदिर के सामने पहुंचने पर विवादास्पद नारेबाजी शुरू हो गई.

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, जुलूस में शामिल कुछ अराजक तत्वों ने ‘यदि भारत में रहना है, अल्लाह हू अकबर कहना है’, सर तन से जुदा… जैसे आपत्तिजनक नारे लगाए, जो दूसरे समुदाय की धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाले थे. इन नारों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे शहर में तनाव फैल गया और दोनों समुदायों के बीच कटुता बढ़ी.

दुर्गा मंदिर के सामने जानबूझकर नारेबाजी की

पुलिस निरीक्षक चंद्रभानु चौकी इंचार्ज, थाना जूही ने इस संबंध में तहरीर दी, जिसके आधार पर 17 जुलाई 2024 को थाना जूही में मुकदमा संख्या 0147/2024 दर्ज किया गया. शुरुआत में अनीस अंसारी उर्फ अन्नू और 40-50 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ धारा 196/299 बीएनएसएस और 66डी आईटी एक्ट के तहत मामला पंजीकृत हुआ.

जांच की जिम्मेदारी अतिरिक्त निरीक्षक, थाना जूही को सौंपी गई. इस दौरान पाया गया कि जुलूस आयोजक अनीस अंसारी ने युवाओं और लड़कों को नारे लगाने के लिए उकसाया था. इसी उकसावे के चलते दुर्गा मंदिर के सामने से गुजरते समय लगभग 40-50 लोगों ने जानबूझकर नारेबाजी की, जिसका उद्देश्य दूसरे वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाना था.

इन 4 आरोपियों पर चलेगा मुकदमा, दो नाबालिग

वीडियो के वायरल होने से शहर में रोष व्याप्त हो गया, और सामाजिक सद्भाव प्रभावित हुआ. जांच में साक्ष्यों के आधार पर चार आरोपियों की पहचान की गई. इनमें अनीस अंसारी, मुन्ना, समीर और मारूफ शामिल था. इसके अलावा दो बाल अपचारी भी शामिल पाए गए. अब यूपी सरकार ने मामले का परीक्षण करने के बाद अभियोजन की मंजूरी दी है.

राज्यपाल के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इन अभियुक्तों को सक्षम कोर्ट में अभियोजित किया. कानपुर के डीजीसी दिलीप अवस्थी ने बताया कि दंगे के संबंध में जो शासनादेश और कानून में प्रावधान है उनके अनुसार मुकदमा चलाया जाएगा. एक कमेटी बनाया जायेगा जो मुकदमे की मॉनिटरिंग करेगी और इसको मिशन कनविक्शन में शामिल करेगी.