घटिया निर्माण या बारिश का असर? लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर अब एक्सपेंशन ज्वाइंट में दरार

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे उद्घाटन के एक माह में ही बदहाली का शिकार हो गया है. बीते दिन एक्सपेंशन जॉइंट्स में खतरनाक दरारें देखी गईं. NHAI ने PNC इंफ्राटेक पर सवाल उठाए हैं, जबकि कंपनी बारिश को दोषी बता रही है. यह एक्सप्रेस-वे अब यात्रियों के लिए जोखिम भरा बन गया है.

लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे Image Credit:

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के करीब एक महीने के भीतर ही इसकी बदहाली का मामला तीसरी बार सामने आया है. अब करीब 30 किलोमीटर के आसपास एक्सपेंशन ज्वाइंट में दरार दिखाई देने से एक्सप्रेसवे पर सफर की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के बाद से ही इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं. इससे पहले भी अलग-अलग हिस्सों में सड़क की परत उखड़ने और सड़क खराब होने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं. अब एक्सपेंशन ज्वाइंट में दरार मिलने से विवाद और बढ़ गया है. दूसरी ओर वाहनों का एक्सप्रेसवे पर आवाजाही भी कम हो गई है.

एक्सपेंशन ज्वाइंट में दरार से बढ़ी चिंता

रविवार को हुई बारिश के बाद सोमवार को कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन पर किमी 30 के आसपास एक्सपेंशन ज्वाइंट में दरार दिखाई दी. सड़क निर्माण विशेषज्ञों के मुताबिक एक्सपेंशन ज्वाइंट किसी भी सड़क और पुल की संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. इसमें किसी तरह की दरार सामने आने पर इसकी तकनीकी जांच जरूरी हो जाती है.

इसी स्थान के आसपास डिवाइडर में भी दरार दिखाई दी है. ऐसे में अतिरिक्त दबाव या किसी वाहन की टक्कर की स्थिति में क्रैश बैरियर को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है. साथ ही बारिश के बाद एक्सप्रेसवे पर पानी की निकासी की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई. यहां तक कि टोल बंद होने के बाद भी एक्सप्रेस-वे पर आवाजाही थम गई है.

NHAI और निर्माण कंपनी के दावों में अंतर

एक्सप्रेसवे की स्थिति को लेकर निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक पर सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं. NHAI की तकनीकी जांच में सड़क की गुणवत्ता और डामर की लेयर से जुड़ी खामियों की बात सामने आने का दावा किया गया है. कंपनी को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने की कार्रवाई शुरू होने की भी जानकारी सामने आई थी.

वहीं, PNC इंफ्राटेक ने BSE और NSE को पत्र भेजकर इन दावों का खंडन किया है. कंपनी का कहना है कि उसे न तो ब्लैकलिस्ट किया गया है और न ही नॉन-परफॉर्मर घोषित किया गया है. कंपनी के मुताबिक उसे केवल कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. कंपनी ने कुछ हिस्सों में नुकसान के पीछे लगातार हुई बारिश को भी एक वजह बताया है.

एक्सप्रेस-वे की बदहाली के लिए जिम्मेदार कौन?

रिपोर्ट के मुताबिक 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे में करीब 600 से 700 मीटर हिस्से में सड़क धंसने या उखड़ने की समस्या सामने आई है. इसके अलावा करीब 84 स्थानों पर गड़बड़ी की बात कही गई है. वहीं, विवाद के बीच PNC इंफ्राटेक के शेयर में भी गिरावट देखने को मिली है. अब एक्सपेंशन ज्वाइंट में आई नई दरार ने फिर गुणवत्ता पर बहस छेड़ दी है.

अब सवाल सड़क निर्माण की गुणवत्ता, NHAI की कार्रवाई और कंपनी की सफाई को लेकर उठ रहे हैं. आखिर एक्सप्रेस-वे की बदहाली के लिए जिम्मेदार कौन है? घटिया निर्माण, लगातार बारिश या फिर निगरानी में कहां चूक हुई? फिलहाल पूरे मामले में तकनीकी जांच और संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है.

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