कौन हैं आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ? जिन्हें मायावती ने राजनीतिक संन्यास लेने की सलाह दी

डॉक्टर से शुरू हुआ अशोक सिद्धार्थ का सफर विधान परिषद और राज्यसभा तक पहुंचा. कभी मायावती के बेहद करीबी नेताओं में गिने गए. फिर आकाश आनंद के ससुर बने और बीएसपी की अंदरूनी राजनीति में उनका नाम और ज्यादा चर्चा में आया. पार्टी से निकाले गए, फिर माफी और वापसी भी हुई, लेकिन अब मायावती ने साफ संकेत दे दिया है कि अगर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से पूरी तरह अलग होते हैं, तभी आकाश आनंद को दोबारा बड़ी जिम्मेदारी देने पर विचार हो सकता है.

मायावती के साथ अशोक सिद्धार्थ Image Credit: फाइल फोटो

बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) में आकाश आनंद की वापसी का रास्ता एक बार फिर अशोक सिद्धार्थ से होकर गुजरता दिख रहा है. मायावती ने अपने ताजा बयान में साफ कहा है कि अगर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लेते हैं, तो आकाश आनंद के लिए पार्टी में स्वतंत्र होकर काम करने का रास्ता खुल सकता है और उनकी पुरानी जिम्मेदारियां वापस देने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता है.

ऐसे में सवाल उठता है कि अशोक सिद्धार्थ आखिर कौन हैं … जिनका राजनीतिक सफर मायावती के बेहद करीब से शुरू हुआ और अब उनके ही बयान में आकाश आनंद के भविष्य से जुड़ गया है? दरअसल, अशोक सिद्धार्थ का जन्म 5 फरवरी 1965 को फर्रुखाबाद के कायमगंज में हुआ. पेशे से डॉक्टर रहे अशोक सिद्धार्थ सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हुए. वे वामसेफ से भी जुड़े रहे. बीएसपी संगठन में उनकी शुरुआत जमीनी स्तर से हुई.

संगठन से संसद तक

जिलाध्यक्ष से लेकर मंडल अध्यक्ष तक की जिम्मेदारियां संभालीं, लेकिन उनके राजनीतिक सफर में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब मायावती के कहने पर उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर बीएसपी ज्वाइन की. बीएसपी में उनका कद लगातार बढ़ता गया. साल 2009 में पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद भेजा. इसके बाद 2016 में अशोक सिद्धार्थ राज्यसभा पहुंचे और 2022 तक उच्च सदन के सदस्य रहे. इस दौरान वह बीएसपी के राष्ट्रीय सचिव भी रहे.

मायावती परिवार से रिश्ता

अशोक सिद्धार्थ कानपुर-आगरा जोन के कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी संभाली और पांच राज्यों के प्रभारी भी रहे. यानी एक समय अशोक सिद्धार्थ बीएसपी के उन नेताओं में शामिल थे, जिन पर मायावती का खास भरोसा माना जाता था. अशोक सिद्धार्थ का राजनीतिक कनेक्शन मायावती के परिवार से भी जुड़ गया. मार्च 2023 में उनकी बेटी प्रज्ञा सिद्धार्थ की शादी मायावती के भतीजे आकाश आनंद से हुई यानी अशोक सिद्धार्थ, आकाश आनंद के ससुर हैं.

निष्कासन और फिर वापसी

इसके बाद अशोक सिद्धार्थ की राजनीतिक भूमिका और आकाश आनंद के बढ़ते कद को एक साथ जोड़कर भी देखा जाने लगा. हालांकि मायावती की राजनीति में परिवार और संगठन के बीच संतुलन हमेशा संवेदनशील मुद्दा रहा है, लेकिन 2025 में कहानी बदल गई. 12 फरवरी 2025 को मायावती ने पार्टी विरोधी गतिविधियों का हवाला देते हुए अशोक सिद्धार्थ को बीएसपी से बाहर कर दिया. उसी दौर में आकाश आनंद पर भी कार्रवाई हुई और उनकी पार्टी में भूमिका खत्म कर दी गई, लेकिन कुछ महीनों बाद दोनों की बीएसपी में वापसी हुई.

अब फिर मायावती के निशाने पर

अशोक सिद्धार्थ ने सार्वजनिक तौर पर अपनी गलती स्वीकार की और मायावती के प्रति सम्मान जताते हुए पार्टी अनुशासन में रहने का भरोसा दिया. उन्होंने कहा था कि जाने-अनजाने और गलत लोगों के बहकावे में आकर उनसे गलतियां हुईं और आगे ऐसी गलती नहीं होगी, लेकिन अब एक बार फिर अशोक सिद्धार्थ का नाम बीएसपी की अंदरूनी राजनीति के केंद्र में है. मायावती का आरोप है कि अशोक सिद्धार्थ ने पार्टी के मिशन से ज्यादा निजी और पारिवारिक स्वार्थ तथा राजनीतिक महत्वाकांक्षा को महत्व दिया.

आकाश की वापसी का रास्ता

मायावती ने कहा कि इसका नुकसान अशोक सिद्धार्थ के साथ-साथ उनके दामाद आकाश आनंद को भी उठाना पड़ा और अब मायावती ने उनके सामने राजनीति से पूरी तरह संन्यास लेने का विकल्प रखा है. मायावती के बयान का सबसे बड़ा हिस्सा आकाश आनंद को लेकर है. उनका कहना है कि अगर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से संन्यास ले लेते हैं, तो आकाश आनंद के लिए पार्टी में स्वतंत्र होकर काम करना संभव होगा और उसके बाद आकाश आनंद को उनकी जिम्मेदारियां वापस देने पर पार्टी सहानुभूतिपूर्वक विचार कर सकती है.

2027 से पहले बड़ा दांव

उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव करीब है. बीएसपी के लिए ये चुनाव बेहद अहम हैं. मायावती एक तरफ संगठन को फिर से सक्रिय करने और बहुजन वोट बैंक को मजबूत करने में जुटी हैं. तो दूसरी तरफ पार्टी के भीतर नेतृत्व और अनुशासन को लेकर भी सख्त संदेश दे रही हैं. ऐसे में अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास की सलाह और आकाश आनंद की संभावित वापसी का कनेक्शन बीएसपी की आगे की रणनीति के लिहाज से बेहद अहम हो जाता है.

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