‘खलिहर बताना पत्रकारों और मेहनतकशों का अपमान’, अखिलेश के तंज पर ब्रजेश पाठक का पलटवार

अखिलेश यादव ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक पर तंज अपने X अकाउंट पर लिखा था कि जो स्वास्थ्य मंत्री के रूप में साबित हो गये बेकार, अब वो बन गये पत्रकार. इसपर ब्रजेश पाठक ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि पत्रकार होना गर्व की बात है .उन्हें खलिहर बताना सभी पत्रकारों और मेहनतकशों का अपमान है.

अखिलेश यादव और ब्रजेश पाठक Image Credit:

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के बीच सोशल मीडिया पर एक बार फिर तीखी और सियासी जंग देखने को मिली. दरअसल, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अपने सोशल मीडिया पर योगी सरकार में मंत्री नरेंद्र कश्यप के साथ एक वीडियो डाला था. इस वीडियो में वह पत्रकार की भूमिका में नज़र आ रहे थे. इस दौरान उन्होंने नरेंद्र कश्यप के यूपी को लेकर कुछ सवाल भी किए. इसी वीडियो को लेकर अखिलेश यादव ने ब्रजेश पाठक पर तंज कसा था. अब ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए पलटवार किया है.

अखिलेश ने कहा था- स्वास्थ्य मंत्री के रूप में साबित हो गये बेकार

अखिलेश यादव ने अपने X अकाउंट पर लिखा था कि ‘जो स्वास्थ्य मंत्री के रूप में साबित हो गये बेकार, अब वो बन गये पत्रकार क्योंकि समय बिताने के लिए करना है कुछ काम. सरकार, संगठन, दल में तो पहले ही हुए नाकाम.प्रदेश की जनता बिन-बिजली गर्मी-बीमारी में तड़प रही है और भाजपाई मंत्री ‘इंटरव्यू-इंटरव्यू’ खेलकर गर्मी की छुट्टियां मना रहे हैं. फिर डपट पड़ेगी डिप्टी को! बेहद बचकाना!’

ब्रजेश पाठक बोले- पत्रकार होना गर्व की बात

अखिलेश के इस तंज पर पलटवार करते हुए ब्रजेश पाठक ने कहा कि ‘पत्रकार होना गर्व की बात है. मैं तो लघु व्यक्ति और साधारण सामाजिक – राजनीतिक कार्यकर्ता हूं लेकिन हमारा गौरवशाली इतिहास साक्षी है कि जितने महान जननेता हुए हैं, लगभग सभी पत्रकार रहे हैं . पंडित दीनदयाल जी मासिक पत्रिका राष्ट्रधर्म निकालते थे. लोहियाजी हिंदी मासिक पत्रिका जन और अंग्रेजी मासिक पत्रिका मैनकाइंड के संपादक थे. संवाद और साक्षात्कार करना हमारी सनातन परंपरा है, वादे वादे जायते तत्वबोध. लोकनायक जयप्रकाश जी ने कहा था कि तानाशाह ही संवाद के विरोधी होते हैं.’

खलिहर बताना सभी पत्रकारों का अपमान- ब्रजेश पाठक

ब्रजेश पाठक ने आगे कहा कि ‘हमारे पत्रकार भाई और बहन हमारे समाज के कर्मयोगी हैं. उन्हें खलिहर बताना सभी पत्रकारों और मेहनतकशों का अपमान है. एक सार्थक साक्षात्कार में कितनी मेधा और मेहनत लगती है, ये हमारे पत्रकार साथियों से पूछिए. जो युवराज होंगे, उन्हें मेहनतकश बुरे लगेंगे. जो झूठ के सौदागर होंगे, उन्हें संवाद बुरा लगेगा. समझ से परे है कि कुछ लोग संवाद और सच्चाई से इतना डरते क्यों हैं ?एक स्वास्थ्य मंत्री के रूप में यथासंभव लोकस्वास्थ्य को बेहतर कर रहा हूं और एक राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में संवाद चलाकर अपने लोककर्त्तव्य को निभा रहा हूं.उन्हें मिर्ची लगे तो मैं क्या करूं.’

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