MLA-MP हैं बेटे, भतीजा ब्लॉक प्रमुख… राजनीति में ऐसा है बृजभूषण परिवार का ‘दबदबा’

महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में अदालत से राहत मिलने के बाद पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह की राजनीतिक वापसी की चर्चाएं तेज हो गई हैं. छह बार लोकसभा सांसद रहे बृजभूषण का गोंडा, कैसरगंज, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, अयोध्या और बस्ती समेत पूर्वांचल-अवध क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक प्रभाव माना जाता है. उनके परिवार के कई सदस्य भी सक्रिय राजनीति में हैं.

पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और उनके बेटे व सांसद करण भूषण

महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के मामले में पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को अदालत से राहत मिल गई है. छह बार लोकसभा सांसद रहे बृजभूषण शरण सिंह का प्रभाव लंबे समय से पूर्वांचल और अवध क्षेत्र की राजनीति में माना जाता है. खासकर गोंडा, कैसरगंज, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, अयोध्या और बस्ती के राजनीतिक समीकरणों में उनकी भूमिका अहम मानी जाती रही है.

बृजभूषण शरण सिंह का चुनावी रिकॉर्ड काफी मजबूत माना जाता है. उन्होंने जिस लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, वहां जीत हासिल की. 1991 और 1999 में गोंडा लोकसभा सीट से सांसद बने. 2004 में बलरामपुर लोकसभा सीट से जीत दर्ज की. परिसीमन के बाद बनी कैसरगंज लोकसभा सीट से 2009, 2014 और 2019 में लगातार तीन बार सांसद चुने गए. लगातार छह बार लोकसभा पहुंचने का रिकॉर्ड उन्हें उत्तर प्रदेश के प्रभावशाली नेताओं की सूची में अलग पहचान देता है.

परिवार की राजनीति में मजबूत पकड़

बृजभूषण शरण सिंह का राजनीतिक प्रभाव केवल उनके व्यक्तिगत सफर तक सीमित नहीं है. उनका परिवार भी सक्रिय राजनीति में मजबूत मौजूदगी रखता है. बड़े बेटे प्रतीक भूषण सिंह गोंडा सदर विधानसभा सीट से लगातार दूसरी विधायक हैं. छोटे बेटे करण भूषण सिंह कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं. पत्नी केतकी सिंह, कैसरगंज से सांसद रह चुकी हैं और जिला पंचायत अध्यक्ष का दायित्व भी संभाल चुकी हैं. भतीजे सुमित भूषण सिंह नवाबगंज ब्लॉक के ब्लॉक प्रमुख हैं.

करीबियों का भी राजनीति दबदबा

उनके करीबी सहयोगी घनश्याम मिश्रा जिला पंचायत अध्यक्ष हैं. स्थानीय निकायों से लेकर विधानसभा और लोकसभा तक उनके समर्थकों का प्रभाव लंबे समय से देखा जाता रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गोंडा और आसपास के जिलों में बृजभूषण शरण सिंह ने वर्षों में एक मजबूत संगठनात्मक नेटवर्क तैयार किया है. पंचायत चुनाव, जिला पंचायत, विधानसभा और लोकसभा चुनावों में उनके समर्थकों की सक्रिय भूमिका रही है.

विश्लेषकों के अनुसार, गोंडा, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, अयोध्या और बस्ती की राजनीति में आज भी उनकी राय और रणनीति को महत्व दिया जाता है. अब महिला पहलवानों से जुड़े मामले में अदालत से राहत मिलने के बाद बृजभूषण शरण सिंह की सक्रिय राजनीति में संभावित वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में उनकी भूमिका फिर बढ़ सकती है.

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