दलित बाहुल्य सीटों पर सपा की नजर, आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर अखिलेश ने बनाई रणनीति
समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों के लिए दलित बहुल आरक्षित सीटों पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है. अखिलेश यादव के नेतृत्व में पीडीए फॉर्मूले के तहत जमीनी रिपोर्टों का विश्लेषण किया जा रहा है. लक्ष्य उन सीटों पर भाजपा के दबदबे को तोड़ना और 2022 की 20 सीटों की तुलना में कम से कम 50 आरक्षित सीटें जीतना है, जो 2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों से प्रेरित है.
आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी समाजवादी पार्टी इस बार मुख्य फोकस आरक्षित श्रेणी वाली सीटों पर कर रही है. खासतौर पर उन सीटों पर सपा ज्यादा फोकस करेगी, जहां जीत और हार का अंतर कम था. इसके लिए सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के नेतृत्व में मंथन शुरू हो गया है. माना जा रहा है कि पार्टी ने सुरक्षित सीटों के जरिए सत्ता का रास्ता तलाश रही है.
पीडीए फॉर्मूले की सफलता के बाद अखिलेश यादव ने दलित बहुल सीटों पर फोकस किया है. इसके लिए उन्होंने छात्र सभा, युवजन सभा और यूथ ब्रिगेड को काम पर लगा दिया है. इन संगठनों से अलग-अलग फील्ड रिपोर्ट मंगाई गई है. इसके अलावा आरक्षित सीटों की जमीनी हकीकत का भी त्रिस्तरीय आंकलन कराया गया है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव ने मुख्य फोकस उन सीटों पर रखने का निर्देश दिया है, जहां 2022 में जीत और हार का अंतर कम रहा था.
84 SC और 2 ST सीटें हैं UP में
पार्टी सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 84 सीटें SC की और 2 सीटें ST के लिए आरक्षित हैं. पार्टी ने इन सभी सीटों पर संपर्क तेज कर दिया है. इन सभी सीटों पर हरेक वोटर तक पहुंच बनाने की रणनीति बनाई गई है. इन सभी सीटों पर पिछले दो विधानसभा चुनावों में भाजपा का दबदबा रहा है. ऐसे में सपा ने रणनीति बनाई है कि आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी का पूरा वोट सपा को शिफ्ट हो जाए.
20 सीटों पर मिली थी जीत
2022 के विधानसभा चुनावों में सपा को सिर्फ 20 आरक्षित सीटों पर जीत मिली थी. ऐसे में पार्टी ने इस बार जीत का नंबर बढ़ाकर इस बार कम से कम 50 तक ले जाने का प्लान बनाया है. इसके लिए लोकसभा चुनाव 2024 में बदले राजनीतिक समीकरणों को पार्टी ने अपना आधार बनाया है. इस चुनाव में 17 आरक्षित लोकसभा सीटों पर बीजेपी को नुकसान हुआ था. वहीं सपा को लाभ मिला था.
