NGO हॉस्टल में पंखे से लटकी मिली छात्रा, शव छुपाकर अंतिम संस्कार करने की कोशिश, पुलिस ने रोका
लखनऊ के एक एनजीओ हॉस्टल में छात्रा का शव पंखे से लटका मिला. एनजीओ प्रबंधन ने बिना पुलिस को जानकारी दिए पहले तो छात्रा के शव को पंखे से उतारा. फिर अंतिम संस्कार के लिए हरिद्वार ले जाने लगे. लेकिन पुलिस को समय रहते जानकारी मिल गई. फिलहाल, पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है.
लखनऊ के गोमती नगर थाना क्षेत्र के एनजीओ नयन संस्थान में एक छात्रा की संदिग्ध मौत हो गई. इस दौरान एनजीओ वाले बिना जानकारी दिए छात्रा के शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने लगे. लेकिन उससे पहले पुलिस को जानकारी मिल गई. पुलिस ने छात्रा के शव को कब्जे में ले लिया. छात्रा इसी एनजीओ के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करती थी. फिलहाल, छात्रा के शव को पोस्टमार्टम के लिए गोमती नगर थाना क्षेत्र भेज दिया गया है.
कुशीनगर की रहने वाली है छात्रा
छात्रा की मां की मौत कोरोना कॉल में हुई थी. इसके बाद से ही छात्रा एनजीओ के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करती थी. उसके पिता अभिषेक सक्सेना ऋषिकेश में ड्राइवर का काम करते छात्रा मूल रूप से कुशीनगर की रहने वाली थी. अब छात्रा की संदिग्ध मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर क्यों एनजीओ गुपचुप तरीके से छात्रा का शव ले जा रहा था.
एनजीओ वाले हरिद्वार लेकर जा रहे थे शव
छात्रा की संदिग्ध मौत के बाद हॉस्टल के लोग शव को अंतिम संस्कार के लिए हरिद्वार ले जा रहे थे. लेकिन पिता ने पुलिस को इसकी सूचना दे दी. पुलिस द्वारा शव को वापस लाया गया. थाना गोमती नगर पुलिस द्वारा बताया गया दिनांक 2829 की रात लगभग 12:30 बजे रितेश रंजन चौबे द्वारा थाने पर आकर यह जानकारी दी गई कि उनके ड्राइवर अभिषेक सक्सेना की पुत्री पारुल जो सृजन विहार कॉलोनी गोमती नगर में डॉक्टर सुशील त्रिवेदी के घर रहती थी आत्महत्या कर ली है.
पुलिस ने आगे बताया कि सूचना सृजन विहार कॉलोनी जाने पर डॉक्टर सुशील त्रिवेदी के मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया तो वह थोड़ी देर में वहां आ गए और बताया कि मृतका के पिता से बात करने के बाद वह शव को लेकर हरिद्वार जा रहे थे. डॉक्टर सुशील त्रिवेदी द्वारा जानकारी दी गई कि मृतका उनके ही संस्था में रहकर पढ़ाई करती थी. आज लगभग शाम 7:30 बजे पंखे से लटककर सुसाइड कर ली. सुशील त्रिवेदी ने बताया कि घर में मौजूद लोगों की मदद से मृतका के शव को फंदे से उतारा गया. फिर पिता से बात कर मह शव को हरिद्वार ले जा रहे थे.
