ऑनलाइन सिस्टम से होगा जमीन का बंटवारा, खुल गया ऑनलाइन पोर्टल; ऐसे करेगा काम

उत्तर प्रदेश में जमीन बंटवारे के लंबित मामलों के समाधान के लिए राजस्व विभाग ने ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है. इससे अब सह-खातेदार घर बैठे बंटवारे की शिकायतें दर्ज करा सकेंगे. GIS तकनीक, EWS प्रमाण पत्र और सरलीकृत खतौनी भी ऑनलाइन उपलब्ध होगी, जिससे प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त बनेगी. यह व्यवस्था लोगों को दफ्तरों के चक्कर लगाने से मुक्ति दिलाएगी.

सांकेतिक तस्वीर Image Credit: freepik

उत्तर प्रदेश की तहसीलों में जमीन के बंटवारे के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. इन मुकदमों के निस्तारण में हो रही देरी की वजह से लगभग सभी राजस्व अदालतें ओवरलोडेड हो चुकी हैं. इस समस्या के समाधान के लिए राजस्व विभाग ने प्रक्रिया में बड़ा बदलावा किया है. उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने इस तरह के मामलों के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है. इस पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायतें दर्ज कराई जा सकेंगी. इन शिकायतों के निस्तारण के लिए तहसीलदार और लेखपाल ऑनलाइन ही रिपोर्ट लगाएंगे.

इस व्यवस्था से सह खातेदारों को जमीन के बंटवारे के लिए बार-बार एसडीएम या तहसीलदार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने होंगे. चूंकि इस पूरे सिस्टम की मॉनिटरिंग भी होगी, इसलिए समयवद्ध तरीके से इन मामलों का निस्तारण भी हो सकेगा. शुक्रवार को उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद की चेयरमैन अर्चना अग्रवाल ने तीन नए पोर्टल लॉन्च किए. इसमें से एक पोर्ट राजस्व अधिनियम की धारा 116 के लिए है. इसमें जमीन के बंटवारे की शिकायत की जा सकेगी.

जीआईएस तकनीक भी होगी

पोर्टल लॉन्च करते हुए चेयरमैन ने बताया कि इसमें जीआईएस टेक्नोलॉजी की सुविधा जोड़ी गई है. इससे भूमि की वास्तविक भौगोलिक स्थिति देखी जा सकेगी. इस सिस्टम से खतौनी, संबंधित अभिलेख और भूमि के नक्शे की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. इस सिस्टम में इन सभी प्रक्रियाओं को तकनीक के माध्यम से सरल और पारदर्शी बनाने की कोशिश की गई है. इससे बंटवारे के विवादों को निस्तारण में तेजी आएगी.

ऑनलाइन मिलेगा EWS सर्टिफिकेट

उन्होंने बताया कि प्रदेश में कमजोर आय वर्ग का प्रमाण पत्र जारी करने के लिए ईडब्ल्यूएस पोर्टल भी शुरू किया गया है. इस पोर्टल पर भी आवेदन ऑनलाइन होगा और लेखपाल-तहसीलदार अपनी रिपोर्ट ऑनलाइन भेजेंगे. इसके बाद जरूरी औपचारिकताओं के बाद सर्टिफिकेट भी ऑनलाइन जारी हो सकेगा. यही नहीं, यदि आवेदन पेंडिंग है तो देखा जा सकेगा कि यह पेंडेंसी किस स्तर पर है.

खतौनी में दिखेगा सटीक रकबा

राजस्व परिषद के अधिकारियों के मुताबिक इसी क्रम में सरलीकृत खतौनी की व्यवस्था की गई है. इसमें भूमि का क्षेत्रफल छह दशमलव स्थानों तक दिखेगा. इससे जमीन के क्षेत्रफल की सटीक जानकारी मिल सकेगी. खासतौर पर छोटे भूखंडों और से जुड़े मामलों में लोगों को सटीक रकबा पता चल सकेगा. राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल के मुताबिक इस सिस्टम से लोगों को अपना कामकाज छोड़कर भागदौड़ करने की जरूरत नहीं रहेगी.

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