नेताओं से टकराव और जनता से संवाद, कौन हैं IAS दिव्या मित्तल? मिर्जापुर से देवरिया तक सुर्खियों में रही तैनाती

आईएएस दिव्या मित्तल यूपी की एक तेजतर्रार अधिकारी हैं, जिनकी पहचान जनता से सीधे संवाद और बेबाक कार्यशैली से बनती है. मिर्जापुर में उनकी जनचौपालों ने उन्हें लोकप्रिय बनाया, वहीं नेताओं से टकराव के कारण उनके तबादले भी सुर्खियों में रहे. देवरिया में भी उनकी नेताओं से टकराव सुर्खियां बनी थीं. आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु से शिक्षित, दिव्या मित्तल का कार्यकाल हमेशा 'अफसर बनाम सियासत' की बहस के केंद्र में रहा है.

आईएएस दिव्या मित्तल, इमेज सोर्स: AI Image Credit:

उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में कुछ अफसर ऐसे हैं, जिनकी पहचान सिर्फ उनकी पोस्टिंग से नहीं, बल्कि काम करने के अंदाज से बनती है. 2013 बैच की IAS अधिकारी दिव्या मित्तल भी इसी सूची में हैं. गांवों में सीधे पहुंचकर जनचौपाल लगाने से लेकर दुर्गम इलाके में पानी पहुंचाने और जनप्रतिनिधियों के सामने प्रशासनिक मर्यादा की बात कहने का दम रखने वाली दिव्या मित्तल का करीब एक दशक से ज्यादा का कार्यकाल हमेशा सुर्खियों में रहा है.

मिर्जापुर में नेताओं से बाद के बाद उनका तबादला हो या देवरिया में जनप्रतिनिधियों के साथ ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर हुआ विवाद, दिव्या मित्तल का नाम बार-बार ‘अफसर बनाम सियासत’ की बहस के केंद्र में आया. खास बात यह कि जहां राजनीतिक हलकों में उनके काम करने के तरीके को लेकर सवाल उठे, वहीं कई जगह आम लोगों ने उनके तबादले का खुलकर विरोध किया.

मिर्जापुर में सुर्खियों में आईं

सितंबर 2022 में दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर के जिलाधिकारी का पद संभाला. इससे पहले वह संत कबीरनगर की डीएम थीं. मिर्जापुर में करीब एक साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने गांवों में जनचौपाल और सीधे जनता से संवाद को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाया. उनका सबसे चर्चित काम हलिया क्षेत्र के लहुरियादह गांव में पाइप से पानी पहुंचाना रहा. रिपोर्टों के मुताबिक आजादी के दशकों बाद गांव में पेयजल पहुंचने की इस पहल ने उन्हें ग्रामीणों के बीच लोकप्रिय बना दिया.

लोकप्रियता की वजह सीधा संवाद

दिव्या मित्तल की कार्यशैली का एक और पहलू था.वह सरकारी कार्यक्रमों को सिर्फ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक सीमित रखने के बजाय गांवों में खुद पहुंचती थीं. ‘मेरा गांव मेरा गौरव’ और ग्राम चौपाल जैसे अभियानों के जरिए उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं मौके पर सुनने और अधिकारियों को वहीं समाधान के निर्देश देने पर जोर दिया. यहीं से उनकी राजनीतिक हलकों के बीच तनाव की चर्चाएं भी सामने आने लगीं.

अनुप्रिया पटेल से हुई अनबन

मिर्जापुर में दिव्या मित्तल के कार्यकाल के आखिरी दौर में केंद्रीय मंत्री और तत्कालीन मिर्जापुर सांसद अनुप्रिया पटेल के साथ कथित मतभेदों की खबरें सामने आईं. लहुरियादह में पानी पहुंचने के कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित नहीं किए जाने को लेकर नाराजगी थी. वहीं अनुप्रिया पटेल के तत्कालीन निजी सचिव की ओर से विकास कार्यों से संबंधित पत्र भी सामने आया था. इसके बाद सितंबर 2023 में दिव्या मित्तल का मिर्जापुर से बस्ती डीएम के रूप में तबादला हुआ. लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकी.

बस्ती जॉनिंग से पहले ही वेटिंग

दिव्या मित्तल के बस्ती तबादले की खबर सामने आई तो मिर्जापुर में उनकी विदाई असाधारण तरीके से हुई. सामाजिक संगठनों, व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने उन्हें फूलों की बारिश के साथ विदाई दी. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ. लेकिन इसके बाद अचानक शासन ने उनका बस्ती का तबादला बदल दिया और उन्हें ‘वेटिंग फॉर पोस्टिंग’ में डाल दिया. बस्ती में उनके कार्यभार संभालने से पहले ही नई तैनाती कर दी गई. यह घटनाक्रम उनकी प्रोफाइल का सबसे चर्चित अध्याय बना. तबादले को मिर्जापुर में उनकी बढ़ती लोकप्रियता और जनप्रतिनिधियों से कथित मतभेद से जोड़कर देखा गया.

10 महीने बाद मिली बड़ी जिम्मेदारी

मिर्जापुर से हटाए जाने के बाद दिव्या मित्तल करीब दस महीने तक प्रतीक्षारत रहीं. सरकारी पोस्टिंग रिकॉर्ड के मुताबिक सितंबर 2023 से जुलाई 2024 तक वह वेटिंग में रहीं. जुलाई 2024 में शासन ने उन्हें देवरिया का जिलाधिकारी बनाया. इससे एक बार फिर उन्हें महत्वपूर्ण फील्ड पोस्टिंग मिली. इससे पहले वह उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी की CEO की जिम्मेदारी संभाल रही थीं.

देवरिया में भी दिव्या मित्तल की कार्यशैली ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया. जुलाई 2025 में दिशा की बैठक के दौरान उन्होंने जनप्रतिनिधियों से कहा कि अधिकारियों पर ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए. इस बैठक में भाजपा सांसद शशांक मणि त्रिपाठी, विधायक शलभ मणि त्रिपाठी समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद थे. इसका वीडियो वायरल हुआ था.

राजनीतिक विवाद में बदल गया मामला

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने दिव्या मित्तल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतंत्र में प्रशासन का काम जनता और जनप्रतिनिधियों की बात सुनना है. ऐसा कोई सरकारी आदेश नहीं है कि जनप्रतिनिधि अपनी बात नहीं रख सकते. इसके बाद भाजपा विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने भी दिव्या मित्तल के बयान पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि जनप्रतिनिधियों को अधिकारियों से नियम-कायदे समझने की जरूरत नहीं है. आखिर में उन्हें देवरिया से भी हटाया गया और मई 2026 में राजस्व विभाग में विशेष सचिव बनाया गया.

दिव्या मित्तल का प्रशासनिक सफर

सिलेक्शन के बाद उनकी शुरुआत में मेरठ क्षेत्र में SDM/ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के रूप में हुई. इसके बाद नीति आयोग में असिस्टेंट सेक्रेटरी रहीं. फिर गोंडा की CDO, UPSIDC/UPSIDA में ज्वाइंट एमडी और बरेली विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष जैसी जिम्मेदारियां संभालीं. इसके बाद उनका फील्ड प्रशासन में बड़ा रोल आया और पहली बार वह संतकबीर नगर में डीएम बनी. इसके बाद मिर्जापुर, और देवरिया में डीएम रहीं. मिर्जापुर जिला प्रशासन की आधिकारिक प्रोफाइल में उनके पहले के कार्यकालों में सिधौली (सीतापुर), मेरठ और मवाना (मेरठ), CDO गोंडा, संयुक्त प्रबंध निदेशक UPSIDA और बरेली विकास प्राधिकरण की VC की जिम्मेदारियों का उल्लेख मिलता है.

लंदन से लौटकर बनी IAS

दिव्या मित्तल की व्यक्तिगत शैक्षणिक और पेशेवर पृष्ठभूमि भी उनकी प्रोफाइल को अलग बनाती है. उन्होंने IIT दिल्ली से B.Tech और IIM बेंगलुरु से MBA किया. इसके बाद लंदन में वित्तीय क्षेत्र में मोटे पैकेज पर नौकरी की. फिर भारत लौटकर सिविल सेवा की तैयारी की. 2012 में उनका चयन IPS के लिए हुआ और 2013 में वह IAS बनीं. मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में प्रशिक्षण के दौरान उन्हें उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अशोक बंबावाले पुरस्कार भी मिला. नीति आयोग में असिस्टेंट सेक्रेटरी रहते हुए उनके एक प्रेजेंटेशन का चयन प्रधानमंत्री के सामने प्रस्तुत किए जाने वाले पांच प्रेजेंटेशन में हुआ था.

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