IAS रिंकू राही ने नहीं दिया इस्तीफा, TV9 से बोले- मैंने राष्ट्रपति से अपनी पीड़ा बताई है
मंगलवार यानी 31 मार्च को आईएस रिंकू सिंह राही के इस्तीफे की खबर आई थी. लेकिन आज टीवी9 डिजिटल से बात करते हुए रिंकू सिंह राही ने इससे इनकार किया है. रिंकू राही ने कहा कि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है, बल्कि अपनी पीड़ा से राष्ट्रपति को अवगत कराया है… वह साइड लाइन पोस्टिंग से परेशान हैं.
2023 बैच के IAS अफसर रिंकू सिंह राही ने कल यानी 31 मार्च को इस्तीफा दे दिया. लेकिन आज रिंकू राही ने अपने इस्तीफे की बात से इनकार किया है. IAS रिंकू ने योगी सरकार पर साइडलाइन किए जाने का आरोप लगाते हुए अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेजा था. इस इस्तीफे की खबर आने के तुरंत बाद IAS रिंकू के पिता ने कहा था कि उनके बेटे ने इस्तीफा नहीं दिया है, बल्कि राष्ट्रपति को पत्र लिखा है. आज टीवी9 डिजिटल से बात करते हुए रिंकू ने कहा कि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि अपनी पीड़ा से राष्ट्रपति को अवगत कराया है… वह साइड लाइन पोस्टिंग से परेशान हैं.
रिंकू के इस्तीफे में है कई पेंच
वैसे IAS रिंकू सिंह राही के इस्तीफे में कई पेंच थे. उन्होंने अपना कथित इस्तीफे वाला लेटर राष्ट्रपति को भेजा था, जबकि अगर किसी IAS अफसर को अपने पद से इस्तीफा या VRS के लिए अप्लाई करना होता है. उसे प्रमुख सचिव (नियुक्ति) और UPSC को अपना इस्तीफा भेजना होता है. कल जैसे ही IAS रिंकू सिंह राही के इस्तीफे की खबर आई तो शासन के सूत्रों का कहना था कि IAS रिंकू सिंह ने पब्लिसिटी के लिए यह लेटर जारी किया है.. अगर सच में इस्तीफा देना होता तो वह प्रॉपर चैनल के जरिए अपना इस्तीफा सरकार को भेजते. 24 घंटे में रिंकू ने साफ कर दिया कि उन्होंने कोई इस्तीफा नहीं दिया.
राष्ट्रपति के भेजे लेटर में रिंकू सिंह राही ने क्या लिखा था?
राष्ट्रपति को भेजे लेटर में उन्होंने लिखा था कि SDM रहते हुए उनके ऊपर पहले कार्रवाई हुई और बाद में उन्हें साइडलाइन कर दिया गया. अब उन्हें न पोस्टिंग दी गई और न ही कोई गरिमापूर्ण कार्य आवंटित किया जा रहा है. कहा कि उन्हें काम करने का मौका ही नहीं दिया जा रहा. इस समय संवैधानिक व्यवस्था के समानांतर एक अलग तरह का सिस्टम चल रहा है. राष्ट्रपति को भेजे अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि उन्हें वेतन तो मिल रहा है, लेकिन जनसेवा का मौका नहीं. न कोई पोस्टिंग और न भी कोई कार्य आवंटन किया गया. ऐसे में वह कब तक इंतजार करें.
2004 में पीसीएस परीक्षा की थी पास
2004 में पीसीएस परीक्षा पास करने वाले रिंकू 2009 में मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी के रूप में तैनात थे. इसी दौरान रिंकू ने 100 करोड़ रुपये के गबन का खुलासा किया था. इस खुलासे के बाद रिंकू को सात गोलियां मारी गई थी. इलाज के बाद रिंकू ने घोटाले के खुलासे के लिए RTI के तहत विभाग से कुछ सूचनाएं मांगी थीं… लेकिन, एक साल बाद भी उन्हें सूचनाएं नहीं दी गईं. इसके बाद 26 मार्च, 2012 को रिंकू राही ने लखनऊ निदेशालय के बाहर अनशन शुरू कर दिया था. पुलिस ने रिंकू राही को वहां से उठाकर मेंटल हॉस्पिटल लखनऊ भेज दिया था.
2023 में रिंकू का सलेक्शन UPSC में हुआ
2023 में रिंकू का सलेक्शन UPSC में हुआ था और उन्हें 683वीं रैंक मिली थी. IAS बनने के बाद उन्हें 5 अप्रैल 2024 को मथुरा का असिस्टेंट मजिस्ट्रेट बनाया गया था. तीन महीने बाद बाद ही रिंकू को शाहजहांपुर का ज्वॉइंट मजिस्ट्रेट बना दिया गया था. यहां पर वकीलों के सामने उठक-बैठक का एक वीडियो वायल हुआ था. तैनाती के महज 7 दिन में ही रिंकू को रेवन्यू बोर्ड से अटैच कर दिया गया था. करीब 9 महीने से यहीं पर तैनात हैं. रिंकू सिंह का कहना है कि उन्हें सैलरी मिल रही है, लेकिन काम नहीं मिल रहा है… जबकि उन्होंने 100 करोड़ रुपये के घोटाला किया था.
शाहजहांपुर में वकील को करा दिया था उठक-बैठक
शाहजहांपुर के पुवायां तहसील में SDM की तैनाती के दौरान तहसील परिसर का निरीक्षण करने दौरान रिंकू सिंह राही ने चार लोगों को खुले में पेशाब करते देखा. उन्होंने मौके पर ही चारों को उठक-बैठक लगाने का निर्देश दे दिया. उन चारों में से एक के अधिवक्ता के मुंशी होने के नाते वकील आंदोलित हो गए. इसकी जानकारी IAS रिंकू सिंह राही को हुई तो वह खुद वकीलों के बीच पहुंचे. उन्होंने सभी से मामला शांत करने की अपील की.
फिर खुद वकीलों के सामने की थी उठक बैठक
जब वकीलों का गुस्सा नहीं थमा तो वह मंच पर खड़े हुए और कहा कि, “इस तहसील का मैं सबसे बड़ा अधिकारी हूं. अगर मेरी बातों से किसी को ठेस पहुंची हो तो मैं आप सभी से माफी मांगता हूं.” इसके बाद रिंकू सिंह राही ने खुद के कान पकड़े और पांच बार उठक-बैठक लगाईं.IAS रिंकू सिंह राही की विनम्र अपील के बाद वकीलों का गुस्सा शांत हुआ, लेकिन उनके उठक-बैठक लगाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. इसके बाद उन्हें पुवांया तहसील के SDM पद से हटाकर राजस्व परिषद, लखनऊ अटैच कर दिया गया.
