नोएडा पुलिस कमिश्नर को 24 साल बाद इंसाफ, पिता की हत्या करने वाले शूटर समेत 3 को उम्रकैद
लखनऊ के पूर्व बार एसोसिएशन अध्यक्ष और वर्तमान नोएडा पुलिस कमिश्नर के इंद्रदेव सिंह हत्याकांड में CBI विशेष कोर्ट ने 22 साल बाद अहम फैसला सुनाया है. मुख्य शूटर समेत तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली है. 8 अगस्त 2002 को डीएम ऑफिस के पीछे इंद्रदेव सिंह की हत्या हुई थी.
लखनऊ के करीब 24 साल पुराने बहुचर्चित इंद्रदेव सिंह हत्याकांड में सजा का ऐलान हो गया है. सीबीआई की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. दोषियों में शूटर विक्रम यादव उर्फ कालिया, उसके साथी पन्ना सिंह और बृजेश यादव उर्फ मुन्ना शामिल हैं. अदालत ने 30 जून को तीनों को दोषी करार दिया था.
इंद्रदेव सिंह बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के पिता थे. उनकी 8 अगस्त 2002 को लखनऊ में डीएम कार्यालय के पीछे स्थित गली में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उस समय वह स्कूटर से जा रहे थे, तभी स्कूटर सवार हमलावरों ने उन पर फायरिंग कर दी. गर्दन में गोली लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी.
बृजेश स्कूटर चला रहा था, कालिया ने चलाई थीं गोलियां
शुरुआत में इस मामले की जांच स्थानीय पुलिस ने की थी, लेकिन बाद में इसे सीबीआई को सौंप दिया गया. जांच के दौरान सामने आया कि वारदात के समय बृजेश यादव स्कूटर चला रहा था, जबकि पीछे बैठे विक्रम यादव उर्फ कालिया ने इंद्रदेव सिंह पर गोलियां चलाई थीं. जांच में पन्ना सिंह की भूमिका भी सामने आने पर उसे भी आरोपी बनाया गया.
मामले की सुनवाई के दौरान हत्या की साजिश रचने के आरोपी मन्नालाल गुप्ता, वेद प्रकाश उर्फ नेता और छोटेलाल उर्फ छोटू की मृत्यु हो चुकी, जिसके चलते उनके खिलाफ कार्रवाई समाप्त हो गई. इससे पहले 30 जून को अदालत ने बचे तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया था, जबकि अब उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है.
24 साल बाद नोएडा पुलिस कमिश्नर को मिला इंसाफ
करीब ढाई दशक बाद आए अदालत ने इस हत्याकांड में शामिल शूटर समेत 3 को उम्रकैद के साथ जुर्माने की सजा सुनाई है. सीबीआई की लंबी जांच और अदालत में चली सुनवाई के बाद दोषियों को सजा मिलने से इस मामले का एक अहम अध्याय समाप्त हो गया. पिता के कातिल को सजा मिलने से नोएडा पुलिस कमिश्नर को 24 साल बाद इंसाफ मिला है.