लखनऊ के कितने घरों का पास है नक्शा? LDA उपाध्यक्ष ने बताई सच्चाई
लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि राजधानी के करीब 94 प्रतिशत मकानों का नक्शा स्वीकृत नहीं है. अलीगंज अग्निकांड के बाद अवैध निर्माणों पर कार्रवाई तेज हो गई है और लापरवाही के आरोप में 18 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है. LDA अब आवासीय भवनों के साथ होटल, बैंक्वेट हॉल, अस्पताल, कोचिंग सेंटर और अन्य व्यावसायिक परिसरों की भी जांच कर रहा है.
राजधानी लखनऊ में हाल के भीषण अग्निकांड के बाद अवैध निर्माणों पर कार्रवाई तेज हो गई है. इसी बीच लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार का एक बयान पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया है. उन्होंने स्वीकार किया कि राजधानी में बने अधिकांश मकानों का नक्शा स्वीकृत नहीं है. यानी शहर का बड़ा हिस्सा ऐसे भवनों से भरा है, जो या तो बिना नक्शा पास कराए बने हैं या फिर स्वीकृत मानकों से अलग निर्माण किया गया है.
हाल ही में लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड के बाद LDA ने अवैध निर्माण रोकने में लापरवाही बरतने के आरोप में 18 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है. LDA उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने कहा कि राजधानी में 94 फीसदीऐसे मकान हैं, जिनका नक्शा कभी स्वीकृत ही नहीं कराया गया. उन्होंने माना कि सालों से लोग बिना अनुमति निर्माण कराते रहे और समय के साथ यह समस्या इतनी बड़ी हो गई कि अब इसे पूरी तरह नियंत्रित करना चुनौती बन गया है.
आखिर क्यों नहीं पास कराते लोग नक्शा?
इसके पीछे कई कारण हैं, जिसमें नक्शा स्वीकृत कराने की प्रक्रिया की जटिलता, अतिरिक्त निर्माण कर अधिक जगह हासिल करने की कोशिश, छोटे प्लॉट पर नियमों के अनुसार निर्माण संभव न होना, वर्षों तक प्रभावी निगरानी का अभा और कार्रवाई न होने से लोगों में नियम तोड़ने का साहस बढ़ना शामिल है. इसी कारण लखनऊ के कई पुराने इलाकों से लेकर नई कॉलोनियों तक बड़ी संख्या में भवन मानकों के विपरीत बने हुए हैं.
अग्निकांड ने खोली व्यवस्था की पोल
हाल ही में लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रशासन ने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच शुरू की. जांच में सामने आया कि कई भवनों में स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण और उपयोग किया जा रहा था. इसके बाद LDA ने अपने 18 अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की है. आरोप है कि इन अधिकारियों ने अपने कार्यकाल में अवैध निर्माण रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं की.
केवल मकान नहीं, व्यावसायिक भवन भी रडार पर
LDA अब केवल आवासीय भवनों की ही नहीं बल्कि व्यावसायिक परिसरों, बैंक्वेट हॉल, होटल, अस्पताल, कोचिंग सेंटर और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की भी जांच कर रहा है. यदि किसी भवन का उपयोग स्वीकृत नक्शे के विपरीत पाया जाता है तो उसके खिलाफ नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई की जा सकती है. हालांकि, LDA ने 15 मीटर से कम ऊंचाई वाले बिल्डिंग को राहत देते हुए सेल्फ सर्टिफिकेशन देने को कहा है.
नक्शा पास क्यों जरूरी है?
भवन निर्माण से पहले नक्शा स्वीकृत कराने का मकसद होता है कि भवन सुरक्षित हो, सड़क और सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण न हो, अग्नि सुरक्षा के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध रहे, जल निकासी और सीवर व्यवस्था प्रभावित न हो, भूकंपरोधी मानकों का पालन किया जाए. जब भवन बिना स्वीकृत नक्शे के बनते हैं तो इन सभी मानकों की अनदेखी होने की आशंका बढ़ जाती है. उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त रुख अपना चुकी है.
हाल के दिनों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अवैध निर्माण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय होगी. इसी कड़ी में LDA की कार्रवाई को राजधानी में भवन निर्माण व्यवस्था को पटरी पर लाने की बड़ी पहल माना जा रहा है. फिलहाल, LDA ऐसे मकानों की लिस्ट बना रहा है, जहां पर व्यवसायिक गतिविधियां होती हैं.