घर में शादी लेकिन सिलेंडर की लाइन में परिवार… गैस की किल्लत के कारण 10 हजार शादियों में कैसे बनेगा खाना?
ईरान-इजरायल युद्ध के कारण देश में LPG की किल्लत बढ़ गई है, जिससे खासकर उत्तर प्रदेश में शादियों के दौरान खाने-पीने का संकट गहरा गया है. कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति बंद होने और घरेलू कोटे में कटौती से कैटरर्स और आम जनता परेशान है. सरकार हालांकि संकट से इनकार कर रही है, लेकिन गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें वास्तविक स्थिति बयां कर रही हैं.
सहालग का समय है, कहीं बारात निकालने की तैयारी हो रही है तो कहीं बारात के स्वागत की. लेकिन यही शुभ घड़ी लोगों के लिए मुसीबत भी बन गई है. खासतौर पर बारात के स्वागत की तैयारी में जुटे बेटी के बाप के लिए, वह तो दो दिन से सब काम छोड़ सिलेंडर की लाइन में खड़े हैं. यह कहानी केवल अमेठी के राजन तिवारी या बाराबंकी के उमेश कौशिक की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में हर घर की है. बड़ी बात यह कि सरकार और सभी जिलों के डीएम लगातार दावा कर रहे हैं कि रसोई गैस का कोई संकट नहीं है, फिर भी हरेक एजेंसी पर लगी लंबी कतारें कुछ अलग ही कहानी बयां कर रही हैं.
दरअसल ईरान-इजरायल वार की वजह से देश में एलपीजी का संकट की स्थिति बनती नजर आ रही है. एलपीजी के व्यवसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति पर पहले ही रोक लग चुकी है. घरेलू सिलेंडरों की आपूर्ति में राशनिंग हो रही है. ऐसी स्थिति में प्रदेश भर में पहले से तय शादियों के मुहूर्त पर ग्रहण लगता नजर आ रहा है. आज बुधवार को अकेले लखनऊ में ही 1200 से शादियां निर्धारित हैं. लेकिन कैटरिंग कारोबारियों ने कमर्शियल सिलिंडर न मिल पाने की वजह से पहले ही हाथ खड़े कर दिए हैं. ऐसी स्थिति में बारात का स्वागत और रिश्तेदारों को प्रीतिभोज कराने के लिए बेटियों के पिता खुद सिलेंडर की लाइन में खड़े हो गए हैं.

गैस एजेंसियों पर सुबह से लगी कतारें
यही स्थिति औरैया, मेरठ, मुरादाबाद, सहारनपुर, आगरा, अमेठी, बाराबंकी, अयोध्या, आजमगढ़, बनारस, प्रयागराज, गाजीपुर, बिया और मऊ आदि जिलों में भी देखी जा रही है. इन सभी जिलों में गैस एजेंसियों पर सुबह से ही लंबी कतारें लगी हैं. इन कतारों में ज्यादातर वो लोग हैं, जिनके घर में बारात आनी है. इनमें भी किसी के घर आज ही बारात आ रही है तो किसी के घर अगले 10 पांच दिनों के अंदर शादी समारोह है. यह स्थिति पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा 19 किलो के व्यावसायिक सिलेंडरों की डिलीवरी पर रोक की वजह से बनी है.

घरेलू सिलेंडरों में 25 फीसदी की कटौती
पेट्रोलियम कंपनियों से मिली जानकारी के मुताबिक घरेलू सिलिंडरों के कोटे में भी 20-25% तक कटौती की गई है. इसका सीधा असर होटल रेस्टोरेंट ही नहीं, घरों में खान-पान पर भी पड़ा है. इसी प्रकार विभिन्न यूनिवर्सिटी, कॉलेज आदि के हॉस्टलों में रह रहे छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है. लखनऊ में कैटरिंग कारोबारी संतोष गुप्ता कहते हैं कि 16 मार्च तक लगातार शादियां और रिसेप्शन बुक हैं. मंगलवार की बुकिंग के लिए तो जैसे सिलेंडर की व्यवस्था कर ली, लेकिन आज के लिए कोई रास्ता नहीं सूझ रहा.

छोटे कारोबारियों को ज्यादा दिक्कत
गोमतीनगर के कारोबारी संजीव सिंह कहते हैं जहां चार सिलिंडर की जरूरत है, वहां एजेंसियां सिर्फ एक या दो सिलेंडर दे रही हैं. उत्तर प्रदेश टेंट कैटरर्स एंड डेकोरेटर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कुमार के मुताबिक गैस एजेंसियों के पास जो स्टॉक बचा है, वह बड़े होटलों में जा रहा. छोटे कैटरिंग कारोबारी चार-चार हजार रुपये देकर भी जरूरत भर सिलेंडर की व्यवस्था नहीं कर पा रहे. ऐसे हालात में कैटरर्स पर दबाव बढ़ गया है. चूंकि कोई विकल्प नहीं दिख रहा, इसलिए कैटरर्स हाथ खड़े कर दे रहे हैं. ऐसे में आयोजकों पर दोहरी मार पड़ रही है.
ऐसे हालात में एक्शन में सरकार
हालात को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार भी एक्शन में आ गई है. सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि प्रदेश में गैस की कोई किल्लत नहीं है. यहां तक कि अफवाह फैलाने वालों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है. इसी क्रम में सभी जिलों के डीएम ने लोगों को पैनिक ना होने की अपील की है. सभी डीएम ने प्रेसनोट जारी कर दावा किया है कि जिलों में गैस का पूरा स्टॉक उपलब्ध है. उधर, खाद्य सुरक्षा अधिकारियों और पुलिस ने कालाबाजारी करने या अफवाह उड़ाने वालों पर एक्शन शुरू कर दिया है.
