लखनऊ में कहां बनेगा दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन का स्टेशन?
दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के तहत लखनऊ में स्टेशन निर्माण को लेकर मंथन अंतिम चरण में पहुंच गया है. सूत्रों के मुताबिक अमौसी एयरपोर्ट क्षेत्र, सुल्तानपुर रोड बेल्ट, कानपुर रोड कॉरिडोर और शहीद पथ से जुड़े इलाकों को संभावित स्थानों के रूप में चिन्हित किया गया है. परियोजना का उद्देश्य बुलेट ट्रेन स्टेशन को मेट्रो, एयरपोर्ट और एक्सप्रेसवे जैसी सुविधाओं से जोड़ना है ताकि यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके.
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ जल्द ही बुलेट ट्रेन नेटवर्क का अहम केंद्र बन सकती है. दिल्ली से वाराणसी तक प्रस्तावित हाई स्पीड रेल कॉरिडोर में लखनऊ स्टेशन को लेकर मंथन अंतिम चरण में है. चार संभावित स्थानों पर विचार किया जा रहा है और जल्द ही इनमें से किसी एक जगह को फाइनल किया जाएगा. सवाल यह है कि आखिर लखनऊ में बुलेट ट्रेन स्टेशन कहां बनेगा और इससे प्रदेश को क्या फायदा होगा?
दरअसल, देश में मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के बाद अब दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर पर तेजी से काम आगे बढ़ रहा है. केंद्र सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दी है और इसे उत्तर भारत की सबसे बड़ी कनेक्टिविटी परियोजनाओं में माना जा रहा है. इस कॉरिडोर के जरिए दिल्ली, नोएडा, मथुरा, आगरा, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज और वाराणसी जैसे प्रमुख शहर हाई स्पीड रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे.
ये 4 स्थान किए गए हैं चिन्हित
लखनऊ इस पूरे नेटवर्क का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है. यही वजह है कि स्टेशन के लिए ऐसी जगह की तलाश की जा रही है जहां भविष्य में यात्री सुविधाओं का विस्तार किया जा सके और शहर की यातायात व्यवस्था पर भी ज्यादा दबाव न पड़े. सूत्रों के अनुसार लखनऊ में चार अलग-अलग स्थानों को लेकर तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर अध्ययन किया जा रहा है- अमौसी एयरपोर्ट क्षेत्र, सुल्तानपुर रोड बेल्ट, कानपुर रोड कॉरिडोर और शहीद पथ से जुड़े इलाके.
करीब 800 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर प्रस्तावित
विशेषज्ञों का मानना है कि स्टेशन को ऐसे स्थान पर बनाया जाएगा जहां मेट्रो, एयरपोर्ट और एक्सप्रेसवे जैसी सुविधाओं से आसान कनेक्टिविटी मिल सके. अगर स्टेशन, एयरपोर्ट के आसपास बनता है तो यात्रियों को हवाई और रेल यात्रा के बीच सहज कनेक्शन मिलेगा. वहीं शहर के बाहरी क्षेत्र में स्टेशन बनने से भूमि अधिग्रहण और विस्तार की चुनौतियां भी कम होंगी. दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर करीब 800 किलोमीटर से अधिक लंबा प्रस्तावित हाई स्पीड नेटवर्क है.
दो घंटे में दिल्ली से पहुंच सकेंगे लखनऊ
इस रूट पर ट्रेनें 320 से 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगी. इससे दिल्ली से लखनऊ का सफर लगभग दो घंटे के आसपास और दिल्ली से वाराणसी का सफर मौजूदा समय की तुलना में काफी कम हो जाएगा. रेल मंत्रालय और नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी NHSRCL विभिन्न शहरों में स्टेशन लोकेशन तय करने की प्रक्रिया में जुटे हैं. हाल ही में मथुरा और आगरा के लिए भी स्टेशन जोन को अंतिम रूप दिए जाने की जानकारी सामने आई थी.
लखनऊ बनेगा मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब
लखनऊ के लिए यह परियोजना इसलिए भी अहम है क्योंकि राजधानी पहले से ही मेट्रो, एक्सप्रेसवे और अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं से लैस है. बुलेट ट्रेन जुड़ने के बाद लखनऊ देश के सबसे बड़े मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब में बदल सकता है. दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन परियोजना अभी योजना और सर्वेक्षण के दौर में है, लेकिन लखनऊ स्टेशन को लेकर चल रहा मंथन साफ संकेत देता है कि राजधानी इस हाई स्पीड नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बनने जा रही है.