BJP सांसद निशिकांत दुबे को सपा ने भेजा लीगल नोटिस, अखिलेश ने ट्विट हटाने के लिए दिया था 10 मिनट का समय, ये है पूरा मामला
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को समाजवादी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्ण कन्हैया पाल ने मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा है. नोटिस में आरोप है कि दुबे ने अपने सत्यापित एक्स अकाउंट से अखिलेश यादव के खिलाफ कथित रूप से भ्रामक और मानहानिकारक पोस्ट साझा कर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया. यह विवाद राम मंदिर चढ़ावा मामले से जुड़े एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर शुरू हुआ, जिसमें आरोपी टिन्नू यादव को अखिलेश से जोड़ा गया था.
राम मंदिर चंदा चोरी के एक कथित दावे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे को समाजवादी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व अधिवक्ता कृष्ण कन्हैया पाल की ओर से मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा गया है. 7 जुलाई 2026 को जारी इस नोटिस में आरोप लगाया गया है कि सांसद निशिकांत दुबे ने अपने सत्यापित ‘एक्स’ अकाउंट से ऐसी सामग्री साझा की, जिसमें सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ गंभीर, असत्य, भ्रामक और मानहानिकारक आरोपों का प्रचार-प्रसार किया गया.
नोटिस में दावा किया गया है कि इससे न केवल अखिलेश यादव की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा, बल्कि समाजवादी पार्टी के लाखों कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भावनाएं भी आहत हुई हैं. नोटिस के अनुसार, यह विवाद 4 जुलाई 2026 की रात 9:05 बजे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर किए गए एक पोस्ट से जुड़ा है. दावा किया गया है कि यह पोस्ट सरवन प्रसाद बालासुब्रमण्यम (@BS_Prasad) द्वारा प्रकाशित किया गया था. इस पोस्ट में अखिलेश यादव को राम मंदिर चंदा चोरी के आरोपी टिन्नू यादव से जोड़ा गया था और उनके संपर्क में रहने का दावा किया गया था.
लीगल नोटिस में क्या है?
कानूनी नोटिस में कहा गया है कि बाद में इस पोस्ट को निशिकांत दुबे ने अपने सत्यापित एक्स अकाउंट से साझा किया, जिससे कथित रूप से वह सामग्री व्यापक स्तर पर प्रसारित हुई और लोगों तक पहुंची. नोटिस में कहा गया है कि एक सांसद और राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक दल के वरिष्ठ नेता होने के कारण निशिकांत दुबे पर यह जिम्मेदारी बनती है कि वे केवल सत्यापित तथ्यों के आधार पर सार्वजनिक बयान दें.
कानूनी नोटिस में आरोप लगाया गया है कि निशिकांत दुबे द्वारा साझा की गई सामग्री में कथित रूप से जातिसूचक और अपमानजनक टिप्पणियां भी शामिल थीं. नोटिस में कहा गया है कि इससे अखिलेश यादव, जो अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से आते हैं, उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया. साथ ही दावा किया गया है कि इससे पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भावनाएं आहत हुईं तथा समाज में तनाव और वैमनस्य की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका बनी.
मानहानि का दावा
लीगल नोटिस में निशिकांत दुबे पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत मानहानि से संबंधित प्रावधानों के अलावा सिविल कानूनों के तहत भी कार्रवाई योग्य कृत्य करने का आरोप लगाया गया है. नोटिस में कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली असत्य और भ्रामक सामग्री का प्रसार किया जाता है तो उसके विरुद्ध आपराधिक और दीवानी, दोनों प्रकार की कार्रवाई की जा सकती है.
जवाब देने के लिए दो हफ्ते का वक्त
नोटिस के अंत में निशिकांत दुबे से मांग की गई है कि वह समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के पक्ष में सार्वजनिक रूप से माफी प्रकाशित करें. नोटिस में उन्हें यह भी कहा गया है कि नोटिस प्राप्त होने के दो सप्ताह के भीतर आवश्यक कदम उठाएं. यदि निर्धारित समय के भीतर ऐसा नहीं किया जाता है तो उनके विरुद्ध सक्षम न्यायालय में दीवानी और आपराधिक कार्रवाई शुरू की जाएगी.
निशिकांत ने क्या जवाब दिया?
फिलहाल इस कानूनी नोटिस पर निशिकांत दुबे की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन उन्होंनेसमाजवादी पार्टी (सपा) के एक ट्वीट के जवाब में लिखा था- भारतीय न्याय संहिता क़ानून के प्रावधानों के तहत खुद अखिलेश यादव जी को थाने जाकर शिकायत दर्ज करानी होगी… क़ानून का पालन करिए. इससे पहले अखिलेश यादव के एक ट्वीट का जवाब देते हुए निशिकांत ने कहा था, ‘जल्दी करिए, इतना परेशान क्यों हैं? प्रश्न ही तो पूछा है? 1990 में राम भक्त पर गोली किसने चलवाई? मैं अदालत जाऊंगा.’
क्या है पूरा मामला?
अखिलेश यादव इन दिनों राम मंदिर में चंदा चोरी का मामला उठा रहा है. इसी मामले को लेकर सरवन प्रसाद बालासुब्रमण्यम (@BS_Prasad) नामक शख्स ने X पर दावा किया, ‘आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अखिलेश यादव के संपर्क में था… पुलिस जांच और मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के विश्लेषण के अनुसार, टिन्नू यादव कथित तौर पर अखिलेश यादव के नियमित संपर्क में था और लगभग हर दिन एक-दो बार उनसे बात करता था.’ इस ट्वीट को शेयर करते हुए निशिकांत ने लिखा था- टिन्नू टीपू से ही तो बात कर रहा था?
अखिलेश ने कहा था- FIR कराऊंगा
अखिलेश यादव ने X पर लिखा था, ‘हम भाजपा के सांसद को 10 मिनट का समय देते हैं कि वो इस झूठे ट्वीट-पोस्ट को डिलीट कर दें अन्यथा उनके ख़िलाफ़ तत्काल नामज़द रिपोर्ट दर्ज़ कराई जाएगी, साथ ही ये चेतावनी उन सबको भी है जिन्होंने ये झूठ फैलाया है, वो भी सोशल मीडिया पर तुंरत डिलीट करें और सार्वजनिक माफी मांगें या क़ानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें… वो याद रखें भाजपाई किसी के सगे नहीं हैं, जब सालों-साल कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़ेंगे तो कोई संगी-साथी भी बचाने नहीं आयेगा.’