‘2029 में एक साथ लोकसभा-विधानसभा चुनाव कराने की तैयारी’
देश में 'वन नेशन-वन इलेक्शन' लागू करने की दिशा में केंद्र सरकार ने तैयारी तेज कर दी है. संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के अध्यक्ष और भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने लखनऊ में कहा कि सरकार का लक्ष्य 2029 से लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराना है. उन्होंने कहा कि इसके लिए आवश्यक संवैधानिक और कानूनी संशोधन किए जाएंगे.
देश में ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ लागू करने की दिशा में केंद्र सरकार ने अपनी कवायद तेज कर दी है. संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष और भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने बुधवार को लखनऊ में संकेत दिए कि सरकार का लक्ष्य 2029 में लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराना है. इसके लिए आवश्यक संवैधानिक और कानूनी संशोधन किए जाएंगे.
भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का एजेंडा नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे को अधिक प्रभावी और विकासोन्मुख बनाने का प्रयास है. उनका दावा था कि बार-बार चुनाव होने से विकास कार्य प्रभावित होते हैं, सरकारी मशीनरी पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है और देश की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ता है.
2029 को लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ रही प्रक्रिया
भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ के प्रस्ताव को गंभीरता से आगे बढ़ा रही है. संयुक्त संसदीय समिति देशभर में विभिन्न पक्षों से सुझाव लेकर अंतिम रिपोर्ट तैयार कर रही है. उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक संवैधानिक और कानूनी बदलाव समय पर पूरे हो जाते हैं तो 2029 से देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि यह चुनावी सुधार शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम होगा.
प्रधानमंत्री मोदी लंबे समय से कर रहे हैं समर्थन
जेपीसी अध्यक्ष और भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई सालों से ‘एक देश-एक चुनाव’ की अवधारणा का समर्थन करते रहे हैं. उनका मानना है कि बार-बार चुनाव होने से प्रशासनिक मशीनरी का बड़ा हिस्सा चुनावी प्रक्रिया में व्यस्त रहता है और विकास कार्यों की गति प्रभावित होती है. उन्होंने कहा कि बार-बार आदर्श आचार संहिता लागू होने से कई विकास परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पातीं.
1952 से 1967 तक साथ हुए थे चुनाव
भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने कहा कि देश में एक साथ चुनाव कोई नई व्यवस्था नहीं है, स्वतंत्रता के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और अधिकांश राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ ही कराए गए थे. उन्होंने कहा कि उस समय न ईवीएम थीं और न आधुनिक तकनीक उपलब्ध थी, फिर भी चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न हुए, बाद में कई कारणों से यह चुनावी चक्र टूट गया.
मतदाता भ्रमित नहीं होगा
भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने कहा कि भारतीय मतदाता दुनिया के सबसे जागरूक और राजनीतिक रूप से परिपक्व मतदाताओं में शामिल है. उन्होंने कहा कि कई बार राजनीतिक दल और विश्लेषक चुनाव परिणामों का अनुमान लगाते हैं, लेकिन भारतीय मतदाता स्वतंत्र सोच के आधार पर मतदान करता है. उन्होंने कहा कि जब 1952 से 1967 तक करोड़ों लोगों ने एक साथ लोकसभा और विधानसभा के लिए मतदान किया था, तब आज तकनीक और जागरूकता के इस दौर में मतदाता के भ्रमित होने का सवाल ही नहीं उठता.
