मिश्रा या पांडेय… या फिर कोई तीसरा? राम मंदिर का पहला CEO कौन बनेगा
अयोध्या में राम मंदिर के पहले CEO को लेकर आज फैसला होगा. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में CEO पद के लिए चयन समिति की ओर से सौंपे गए तीन नामों के पैनल पर चर्चा होगी. सूत्रों के मुताबिक पैनल में रिटायर IAS योगेश्वर राम मिश्रा, रिटायर IPS राजेश पांडेय और एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी का नाम शामिल है. इनमें योगेश्वर राम मिश्रा को मजबूत दावेदार माना जा रहा है. अयोध्या और वाराणसी में प्रशासनिक अनुभव, बड़े प्रोजेक्ट्स की निगरानी और भीड़ प्रबंधन की समझ उनके पक्ष में बताई जा रही है.
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भव्य निर्माण के बाद अब मंदिर के प्रशासन और प्रबंधन को नई संस्थागत व्यवस्था देने की तैयारी तेज हो गई है. राम मंदिर ट्रस्ट को मंदिर का पहला मुख्य कार्यपालक अधिकारी यानी CEO मिलने जा रहा है. CEO के चयन के लिए बनाई गई सर्च कमेटी ने अपनी प्रक्रिया पूरी कर ली है और तीन नामों का पैनल ट्रस्ट को सौंप दिया गया है. अब फैसला श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को करना है.
2 सितंबर यानी आज होने वाली ट्रस्ट की बैठक में तीन नामों में से किसी एक पर अंतिम मुहर लग सकती है. सूत्रों के मुताबिक, पैनल में रिटायर IAS योगेश्वर राम मिश्रा, रिटायर IPS राजेश पांडेय और सेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी का नाम शामिल है. हालांकि, अंतिम फैसला ट्रस्ट ही करेगा. इन तीन नामों में सबसे ज्यादा चर्चा योगेश्वर राम मिश्रा की है. अयोध्या और वाराणसी जैसे धार्मिक शहरों में काम करने का प्रशासनिक अनुभव, बड़े प्रोजेक्ट्स की निगरानी और भीड़ प्रबंधन की समझ के चलते उन्हें इस पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा है.
हालांकि, चंदा चोरी की घटना के बाद ट्रस्ट अपनी छवि सुधारने के लिए ब्रिगेडियर रैंक के किसी रिटायर सैन्य अफसर को भी CEO बना सकता है. सूत्रों का कहना है कि ये अफसर, विवेकानंद फाउंडेशन से जुड़ा हुआ है और अपनी सख्त व ईमानदार छवि के कारण सर्च पैनल की पसंद भी है.
5,585 आवेदन से तीन नाम तक पहुंची चयन प्रक्रिया
राम मंदिर ट्रस्ट ने CEO के चयन के लिए जिस प्रक्रिया को अपनाया, वह भी अपने आप में खास रही. सर्च कमेटी के सदस्य जस्टिस पी. कोहली के मुताबिक, CEO पद के लिए कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए. आवेदनों की शुरुआती छंटनी के बाद 3,577 उम्मीदवारों ने निर्धारित गूगल फॉर्म के जरिए अपनी जानकारी और पात्रता संबंधी विवरण दिया. इसके बाद 600 अंकों के मूल्यांकन के आधार पर उम्मीदवारों की आगे छंटनी की गई.
470 या उससे ज्यादा अंक हासिल करने वाले 108 उम्मीदवारों को वर्चुअल इंटरैक्शन के लिए चुना गया. चार दिनों तक चली इस प्रक्रिया के बाद 17 लोगों को शॉर्टलिस्ट किया गया. इनमें से एक उम्मीदवार व्यक्तिगत कारणों से अयोध्या नहीं आ सका, जबकि 16 उम्मीदवारों का दो दिन तक आमने-सामने इंटरव्यू लिया गया. इसी प्रक्रिया के बाद तीन नामों का पैनल तैयार किया गया है. अब इन तीन नामों में से एक को CEO बनाए जाने का फैसला ट्रस्ट करेगा.
क्यों सबसे आगे माना जा रहा है योगेश्वर राम मिश्रा का नाम?
पैनल में शामिल नामों में सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व IAS अधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा की है. योगेश्वर राम मिश्रा उत्तर प्रदेश कैडर के 2005 बैच के IAS अधिकारी रहे हैं. पहले वो PCS अफसर थे. उनके प्रशासनिक करियर में प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिले और मंडल शामिल रहे हैं. खास बात यह है कि उनके प्रशासनिक अनुभव में वाराणसी और अयोध्या दोनों धार्मिक नगरियां शामिल रही हैं. यानी जिस तरह की जिम्मेदारी अब राम मंदिर के CEO के सामने आने वाली है- धार्मिक पर्यटन, श्रद्धालुओं की भीड़, सुरक्षा, ट्रैफिक, अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का प्रबंधन- इनमें से कई चुनौतियों से मिश्रा अपने प्रशासनिक करियर में पहले ही गुजर चुके हैं.
काशी से अयोध्या तक का अनुभव
योगेश्वर राम मिश्रा के पक्ष में सबसे बड़ा फैक्टर उनका धार्मिक नगरियों से जुड़ा प्रशासनिक अनुभव माना जा रहा है. वाराणसी में जिम्मेदारी के दौरान उन्हें काशी से जुड़े बड़े विकास कार्यों और केंद्र सरकार की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं की प्रशासनिक व्यवस्था का अनुभव मिला. वहीं अयोध्या में प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने के दौरान उन्हें राम जन्मभूमि से जुड़े क्षेत्र के बदलते स्वरूप और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या से जुड़े प्रशासनिक पहलुओं को समझने का अवसर मिला. इसके अलावा वह बाराबंकी के जिलाधिकारी भी रह चुके हैं.
बड़े प्रोजेक्ट और केंद्र-राज्य समन्वय का अनुभव
मिर्जापुर में मंडलायुक्त के पद पर रहते हुए विंध्याचल कॉरिडोर जैसे बड़े धार्मिक एवं विकास प्रोजेक्ट से जुड़े काम को गति देने की जिम्मेदारी भी उनके कार्यकाल से जुड़ी रही. यही अनुभव राम मंदिर CEO की दौड़ में उनकी प्रोफाइल को मजबूत बनाता है. योगेश्वर राम मिश्रा को बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स को जमीन पर लागू कराने वाले अधिकारियों में भी गिना जाता रहा है. काशी से जुड़े केंद्र सरकार की प्राथमिकता वाले प्रोजेक्ट्स के क्रियान्वयन और निगरानी में उनकी भूमिका रही है.
ऐसे में राम मंदिर जैसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व वाले धार्मिक परिसर के लिए यह अनुभव महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि CEO की भूमिका सिर्फ मंदिर के रोजमर्रा के प्रशासन तक सीमित नहीं होगी. अयोध्या में आने वाले वर्षों में धार्मिक पर्यटन के विस्तार, श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, पार्किंग, ट्रैफिक, सुरक्षा, सुविधाओं, होटल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई काम एक साथ चलने हैं. ऐसे में केंद्र और राज्य सरकार के साथ बेहतर समन्वय करने की क्षमता CEO के लिए महत्वपूर्ण होगी.
क्राउड मैनेजमेंट भी बड़ी कसौटी
राम मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. त्योहारों और विशेष अवसरों पर यह संख्या कई गुना बढ़ सकती है. ऐसे में मंदिर प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होगी- भीड़ का सुरक्षित और व्यवस्थित प्रबंधन. वाराणसी और अयोध्या जैसे शहरों में काम करने के दौरान योगेश्वर राम मिश्रा को इसी तरह की परिस्थितियों से निपटने का प्रशासनिक अनुभव मिला है. ट्रैफिक मैनेजमेंट, सुरक्षा एजेंसियों से तालमेल, स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय और श्रद्धालुओं की सुविधा—ये सभी CEO की भूमिका के अहम हिस्से होंगे.
आध्यात्मिक झुकाव भी चर्चा में
योगेश्वर राम मिश्रा की प्रोफाइल का एक और पहलू उनकी आध्यात्मिक रुचि है. उनके बारे में प्रशासनिक हलकों में आध्यात्मिक और सादगीपूर्ण जीवनशैली की चर्चा रही है. धार्मिक स्थलों के प्रशासनिक अनुभव के साथ उनकी आध्यात्मिक रुचि को भी राम मंदिर CEO के लिए एक अतिरिक्त पहलू के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि CEO का चयन किसी व्यक्तिगत धार्मिक झुकाव के साथ ही प्रशासनिक क्षमता, प्रबंधन कौशल, नेतृत्व और संस्था को लंबे समय तक व्यवस्थित तरीके से चलाने की क्षमता के आधार पर होना है.
कौन हैं राजेश पांडेय?
तीन नामों के पैनल में दूसरा चर्चित नाम रिटायर IPS राजेश पांडेय का है. पुलिस सेवा से आने के कारण उनकी प्रोफाइल प्रशासनिक अधिकारियों से कुछ अलग है. राम मंदिर जैसे हाई-प्रोफाइल धार्मिक परिसर में सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण, वीआईपी मूवमेंट, कानून-व्यवस्था और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी. राजेश पांडेय का 1986 में UPPSC से चयन और 1989 में DSP के रूप में पुलिस सेवा शुरू की. 2003 बैच के IPS अधिकारी बने.
राजेश पांडेय करीब 32 साल की पुलिस सेवा के बाद 30 जून 2021 को IG Election Cell से रिटायर हुए. UP STF और ATS के संस्थापक सदस्य अधिकारियों में रहे. लखनऊ, अलीगढ़ और मेरठ में SSP रहते हुए 80 से ज्यादा एनकाउंटर किया. कुख्यात गैंगस्टर श्रीप्रकाश शुक्ला के खिलाफ अभियान में भी उनकी भूमिका चर्चित रही. बरेली रेंज के IG समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं. पुलिस सेवा के दौरान उन्हें कई पदक व सम्मान मिले.
तीसरा कौन?
तीसरा नाम एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी का बताया जा रहा है. हालांकि अभी इस नाम को सार्वजनिक नहीं किया गया है. सेना से जुड़े अधिकारी की प्रोफाइल में अनुशासन, बड़े स्तर पर मानव संसाधन का प्रबंधन, ऑपरेशनल प्लानिंग और संकट की स्थिति में निर्णय लेने की क्षमता जैसे पहलू महत्वपूर्ण हो सकते हैं. ऐसे में ट्रस्ट के सामने तीन अलग-अलग तरह की विशेषज्ञता वाले विकल्प मौजूद हैं— प्रशासनिक अनुभव, पुलिस एवं सुरक्षा प्रबंधन और सैन्य प्रबंधन.
ट्रस्ट की बैठक में होगा अंतिम फैसला
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी ने बताया कि CEO की खोज के लिए सर्च कमेटी को जिम्मेदारी दी गई थी. कमेटी ने बड़ी मेहनत और पारदर्शी प्रक्रिया के बाद अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी है. अब तीन नामों वाले इस पैनल पर ट्रस्ट की बैठक में विचार होगा.
क्या योगेश्वर राम मिश्रा का नाम लगभग तय है?
सूत्रों के मुताबिक, तीन नामों में योगेश्वर राम मिश्रा का नाम सबसे मजबूत माना जा रहा है. इसके पीछे उनका प्रशासनिक अनुभव, अयोध्या और वाराणसी में काम करने का अनुभव, बड़े धार्मिक प्रोजेक्ट्स की समझ और भीड़ प्रबंधन का अनुभव प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं.
