आकृति चौधरी गिरफ्तारी: HC ने रद्द किया NSA, कहा- ‘सरकार की कहानी गढ़ी हुई’
नोएडा हिंसा मामले में करीब 5 महीने से जेल में बंद दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा और एक्टिविस्ट आकृति चौधरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने अकृति की NSA हिरासत रद्द करते हुए तत्काल रिहाई का आदेश दिया. कोर्ट ने राज्य सरकार के मामले को ‘गढ़ी हुई कहानी’ पर आधारित बताया. अदालत ने उस वीडियो सबूत पर भी सवाल उठाया, जिसमें अकृति पर प्रदर्शनकारियों को भड़काने का आरोप था.
नोएडा हिंसा मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा और एक्टिविस्ट आकृति चौधरी पर NSA यानी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाया था. करीब 5 महीने जेल में रहने के बाद अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आकृति की NSA हिरासत रद्द कर दी है. कोर्ट ने राज्य की ओर से पेश किए गए पूरे मामले को लेकर बेहद गंभीर टिप्पणी की. हाईकोर्ट ने कहा कि हिरासत की कार्रवाई ‘गढ़ी हुई कहानी’ पर आधारित थी.
इतना ही नहीं हाई कोर्ट ने आकृति की गिरफ्तारी और BNSS के तहत जारी नोटिस के क्रम पर भी सवाल उठाए. जिस वीडियो सबूत को पुलिस ने आकृति की भूमिका के समर्थन में अहम बताया था, कोर्ट के सामने उसी वीडियो में आकृति के प्रदर्शनकारियों को भड़काने का सबूत स्पष्ट तौर पर पेश नहीं हो सका. कोर्ट ने फिलहाल आकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द करते हुए उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया है, बशर्ते किसी दूसरे मामले में उनकी गिरफ्तारी जरूरी न हो.
दरअसल, अप्रैल 2026 को नोएडा में मजदूरों का प्रदर्शन चल रहा था. वेतन बढ़ाने और दूसरी मांगों को लेकर शुरू हुआ प्रदर्शन बाद में हिंसा में बदल गया. पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान पथराव और आगजनी की घटनाएं हुईं. कई लोगों को गिरफ्तार किया गया. इसी मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी की इतिहास की छात्रा आकृति चौधरी को भी आरोपी बनाया गया. पुलिस का आरोप था कि आकृति ने प्रदर्शनकारियों को भड़काया. उन्हें पथराव और आगजनी के लिए उकसाया.
इसके बाद 13 मई 2026 को आकृति और एक्टिविस्ट-जर्नलिस्ट सत्यम वर्मा के खिलाफ NSA लगाया गया. NSA लगाने के समय गौतमबुद्ध नगर पुलिस की ओर से दावा किया गया था कि आकृति समेत आरोपियों के खिलाफ मजबूत इलेक्ट्रॉनिक और वीडियोग्राफिक सबूत मौजूद हैं. यानी पुलिस के दावे का आधार सिर्फ आरोप नहीं बल्कि CCTV, इलेक्ट्रॉनिक और वीडियो सबूत भी बताए गए थे, लेकिन मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो अदालत ने सबसे पहले यही सवाल पूछा—
वो वीडियो कहां है जिसमें आकृति प्रदर्शनकारियों को भड़काती हुई दिखाई दे रही हैं?
कोर्ट ने मांगा वीडियो, सरकार से पूछा- कहां है सबूत?
आकृति ने NSA के तहत अपनी हिरासत को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने सुनवाई के दौरान राज्य से पूछा कि कहां दर्ज है कि आकृति ने लोगों को बुलाकर पथराव करने के लिए कहा? कहां ऐसा सबूत है कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों को गाड़ियां जलाने के लिए उकसाया? सरकार ने चार्जशीट का हवाला दिया. गवाहों के बयानों की बात कही, लेकिन कोर्ट ने फिर वीडियो फुटेज पर सवाल किया.
हाई कोर्ट ने कहा, ‘अगर वीडियो है… तो उसमें आकृति की भूमिका दिखाइए.’ सरकार ने वीडियो पेश करने के लिए वक्त मांगा, लेकिन अदालत ने और समय देने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि आकृति पहले ही करीब 5 महीने जेल में रह चुकी हैं. हाईकोर्ट ने सिर्फ सबूतों पर ही सवाल नहीं उठाया, बल्कि आकृति की गिरफ्तारी की प्रक्रिया को भी जांचा. सरकार के मुताबिक, आकृति को 12 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजकर 56 मिनट पर गिरफ्तार किया गया था.
इसके बाद BNSS की धारा 130 के तहत नोटिस जारी किया गया. कोर्ट ने पूछा- क्या इससे पहले BNSS की धारा 126 के तहत नोटिस दिया गया था? सरकार ने कहा- नहीं. इसके बाद कोर्ट ने General Diary यानी GD एंट्री को देखा और गिरफ्तारी तथा नोटिस जारी होने के क्रम पर सवाल उठाए. कोर्ट की टिप्पणी थी कि रिकॉर्ड से ऐसा दिखाई दे रहा है कि पहले गिरफ्तारी हुई और बाद में नोटिस तैयार किया गया.
कोर्ट ने पूछा- हिंसा कब हुई?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने घटनाक्रम के समय को भी देखा. राज्य की ओर से कहा गया कि प्रदर्शनकारी 11 अप्रैल को जमा हुए थे. इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर 11 अप्रैल को हिंसा नहीं हुई थी तो फिर जिस हिंसा को आकृति के खिलाफ आरोप का आधार बनाया गया. वह कब हुई? कोर्ट ने इस क्रम को आकृति की गिरफ्तारी के समय से जोड़कर देखा. अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड के मुताबिक जिस हिंसा की बात की जा रही है.. वह आकृति की गिरफ्तारी के बाद हुई.
यानी अदालत के सामने एक बड़ा सवाल था- जिस हिंसा के लिए आकृति को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, उससे उनका सीधा संबंध किस सबूत से साबित होता है? नोएडा के मजदूर प्रदर्शन से शुरू हुआ ये मामला अब सिर्फ एक छात्रा की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले ने पुलिस की जांच, NSA लगाने के आधार और गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी की NSA हिरासत को रद्द कर दिया. अदालत ने कहा कि हिरासत राज्य की ओर से पेश की गई “concocted story” यानी गढ़ी हुई कहानी पर आधारित थी. कोर्ट ने आकृति की हेबियस कॉर्पस याचिका स्वीकार करते हुए उनकी तत्काल रिहाई का निर्देश दिया. हालांकि अदालत ने ये भी स्पष्ट किया कि अगर किसी दूसरे मामले में उनकी गिरफ्तारी जरूरी है तो वह अलग विषय होगा.
