‘मैं सोचूंगा कि इस पोस्ट पर रहने के लायक हूं या न’, विधानसभा में स्पीकर का बड़ा बयान
उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना भावुक हो गए. लगातार हंगामे के बीच उन्होंने कहा कि यह उनके राजनीतिक जीवन का अंतिम सत्र है और वह सार्वजनिक जीवन के आखिरी चरण में हैं. महाना ने कहा कि यदि उनके किसी फैसले या व्यवहार से किसी सदस्य को ठेस पहुंची हो तो वह क्षमा चाहते हैं. उन्होंने सभी दलों से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की.
उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन का माहौल उस समय भावुक हो गया, जब विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने अपने राजनीतिक जीवन को लेकर बड़ा बयान दिया. समाजवादी पार्टी के लगातार हंगामे और मंगलवार को सदन में हुए घटनाक्रम का जिक्र करते हुए महाना ने कहा कि मेरे राजनीतिक जीवन का अंतिम सत्र चल रहा है, मैं अपने सियासी जीवन के आखिरी दौर में हूं.’ उनके इस बयान के बाद सदन में कुछ देर के लिए अलग माहौल बन गया.
दरअसल, पिछले तीन दिनों से समाजवादी पार्टी, राम मंदिर के चंदा और चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर विधानसभा के भीतर और बाहर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही है. विपक्ष इस मामले पर चर्चा की मांग कर रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगा रहा है.
‘अगर किसी को ठेस पहुंची हो तो क्षमा चाहता हूं’
बुधवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने मंगलवार को हुए हंगामे का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि यदि उनके किसी व्यवहार या निर्णय से किसी सदस्य को दुख पहुंचा हो तो वह उसके लिए क्षमा चाहते हैं. स्पीकर महाना ने कहा कि पिछले चार सालों से उनकी कोशिश रही है कि विधानसभा की कार्यवाही गरिमापूर्ण तरीके से चले और उत्तर प्रदेश विधानसभा की सकारात्मक तस्वीर पूरे देश के सामने जाए, लेकिन मंगलवार को जो कुछ हुआ, उससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा है.
‘मैं अपने राजनीतिक जीवन के अंतिम चरण में हूं’
स्पीकर सतीश महाना ने कहा कि उनकी राजनीतिक पारी लंबी रही है और अब वह अपने सार्वजनिक जीवन के अंतिम चरण में हैं. उन्होंने दो बार इस बात को दोहराते हुए कहा कि यह उनके राजनीतिक जीवन का अंतिम सत्र है. उन्होंने सभी विधायकों से अपील की कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सदन की गरिमा बनाए रखें. स्पीकर ने कहा कि आने वाली पीढ़ियां विधानसभा की कार्यवाही को देखेंगी, इसलिए सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करें.
विपक्ष का काम सवाल उठाना, सरकार का जवाब देना
स्पीकर सतीश महाना ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है. विपक्ष का काम मुद्दे उठाना है और सरकार का दायित्व उनका जवाब देना है. उन्होंने कहा कि पहले भी विपक्षी सदस्य वेल में आते थे, लेकिन अपनी बात रखकर वापस अपनी सीटों पर चले जाते थे. उन्होंने कहा कि पिछले चार सालों में उन्होंने सभी दलों को बराबर अवसर देने की कोशिश की, ताकि विधानसभा की कार्यवाही बेहतर ढंग से संचालित हो सके.
‘मुख्यमंत्री का सम्मान सभी की जिम्मेदारी’
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि सदन में जनता द्वारा चुने गए डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक और विभिन्न क्षेत्रों के लोग सदस्य बनकर आते हैं, ऐसे में सदन की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री किसी एक दल के नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के मुख्यमंत्री होते हैं, इसलिए पार्टी की राजनीति से ऊपर उठकर उनका सम्मान किया जाना चाहिए. महाना ने कहा कि मंगलवार को जो घटनाक्रम हुआ, उससे उन्हें व्यक्तिगत रूप से काफी पीड़ा हुई.
सोशल मीडिया पर वीडियो डालने पर भी जताई नाराजगी
स्पीकर सतीश महाना ने सदन की कार्यवाही के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा किए जाने पर भी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि कार्यवाही के दौरान फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट न किए जाएं, लेकिन इसके बावजूद ऐसा किया गया. उन्होंने इसे सदन की गरिमा के खिलाफ बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है.
अखिलेश यादव के कार्यकाल का भी किया जिक्र
अपने संबोधन के दौरान स्पीकर सतीश महाना ने एक पुरानी घटना का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे, उस समय विधानसभा में दो सदस्यों ने अपने कपड़े उतार दिए थे. उस वक्त भी उन्होंने कहा था कि यह केवल दो सदस्यों का नहीं, बल्कि पूरे सदन के 403 सदस्यों का अपमान है. महाना ने कहा कि विधानसभा किसी भी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण संस्था है और इसकी गरिमा हर हाल में बनी रहनी चाहिए.
‘मैं इस पद के योग्य हूं या नहीं, इस पर भी विचार करूंगा’
अपने संबोधन के अंत में स्पीकर सतीश महाना ने भावुक अंदाज में कहा कि वह इस बात पर भी विचार करेंगे कि क्या वह विधानसभा अध्यक्ष के इस पद के योग्य हैं या नहीं. उन्होंने कहा कि जल्द ही इस विषय पर अपना निर्णय और विचार सार्वजनिक करेंगे. उनके इस बयान के बाद सदन में कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया. सत्ता पक्ष के कई सदस्य अपनी सीटों पर शांत बैठे रहे, जबकि विपक्ष भी उनकी बात ध्यान से सुनता नजर आया.
राम मंदिर मुद्दे पर जारी है गतिरोध
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी लगातार सरकार को घेर रही है. विपक्ष की मांग है कि इस मामले पर सदन में विस्तृत चर्चा कराई जाए, जबकि सरकार का कहना है कि जांच की प्रक्रिया चल रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी. इसी मुद्दे को लेकर लगातार हो रहे हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की भावुक टिप्पणी ने मानसून सत्र को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है.