यूपी सचिवालय में CUG नंबरों पर विवाद, Vi नंबर छोड़ बीएसएनएल लेने को तैयार नहीं कर्मचारी, रखी ये मांग

तैनात कंप्यूटर सहायक से लेकर विशेष सचिव स्तर तक के करीब 4200 कर्मचारियों के CUG नंबरों को बदलकर बीएसएनएल के नए नंबर आवंटित किए जाएंगे. लेकिन कर्मचारी Vi नंबर छोड़ बीएसएनएल लेने को तैयार नहीं हैं. उनका कहना है कि मौजूदा CUG नंबर अब उनके जीवन का अभिन्न अंग बन चुके हैं.

यूपी सचिवालय प्रतीकात्मक तस्वीर Image Credit:

उत्तर प्रदेश सचिवालय प्रशासन विभाग ने एक अहम फैसला लिया है, जिससे हजारों कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई है. विभाग ने वर्तमान में वोडाफोन-आइडिया (Vi) के चल रहे CUG (Closed User Group) मोबाइल नंबरों को बदलकर बीएसएनएल के नए नंबर देने का निर्णय लिया है. इस फैसले के विरोध में कर्मचारियों ने मुख्य सचिव एसपी गोयल और प्रमुख सचिव सचिवालय प्रशासन मनीष चौहान से मुलाकात कर पुराने नंबरों को पोर्ट कराने की मांग की है.

4200 कर्मचारियों के CUG नंबरों को बदलने की तैयारी

सचिवालय प्रशासन विभाग के मुताबिक यहां तैनात कंप्यूटर सहायक से लेकर विशेष सचिव स्तर तक के करीब 4200 कर्मचारियों के CUG नंबरों को बदलकर बीएसएनएल के नए नंबर आवंटित किए जाएंगे. विभाग का कहना है कि यह फैसला बेहतर सेवा और सरकारी नीति के अनुरूप लिया गया है.

कर्मचारियों मे जताई आपत्ति

कर्मचारी संघ के नेताओं का कहना है कि मौजूदा CUG नंबर अब उनके जीवन का अभिन्न अंग बन चुके हैं. इन नंबरों से ई-ऑफिस पोर्टल, बैंक खाते,आधिकारिक ईमेल आईडी, आयकर रिटर्न, आधार कार्ड, पासपोर्ट, बिजली, गैस कनेक्शन, बच्चों के स्कूल-कॉलेज रिकॉर्ड, विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुप जैसी सेवाएं जुड़ी हैं.

कर्मचारियों ने कहाकि अचानक नंबर बदलने से न केवल व्यक्तिगत परेशानी होगी, बल्कि सरकारी कामकाज भी प्रभावित हो सकता है. उन्होंने मुख्य सचिव से आग्रह किया कि पुराने नंबरों को ही नई कंपनी (बीएसएनएल) में पोर्ट कर दिया जाए, ताकि कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानी न हो.

सचिवालय प्रशासन ने कर्मचारियों को दिया आश्वासन

प्रमुख सचिव सचिवालय प्रशासन मनीष चौहान ने कर्मचारियों को आश्वासन देते हुए कहा कि जो कर्मचारी चाहें, वे अपने पुराने Vi नंबरों को व्यक्तिगत नंबर के रूप में जारी रख सकते हैं. साथ ही सभी को बीएसएनएल के नए CUG नंबर अलग से आवंटित कर दिए जाएंगे. हालांकि कर्मचारी इस विकल्प से संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं. उनका तर्क है कि दो नंबर रखने से खर्च बढ़ेगा और प्रबंधन में दिक्कत होगी. वे एक ही नंबर से सभी काम सुचारू रूप से चलाने पर जोर दे रहे हैं.यह मुद्दा फिलहाल सचिवालय के अंदर चर्चा का विषय बना हुआ है.

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