UP में फिर अटकी स्थाई DGP की नियुक्ति, UPSC ने लौटाया प्रस्ताव; जानें क्यों
उत्तर प्रदेश में स्थाई डीजीपी की नियुक्ति एक बार फिर अधर में लटक गई है. यूपीएससी ने यूपी सरकार द्वारा भेजे गए 35 आईपीएस अधिकारियों के पैनल प्रस्ताव को तकनीकी खामियों और निर्धारित प्रक्रिया के उल्लंघन का हवाला देते हुए लौटा दिया है. यह दूसरी बार है जब यूपीएससी ने इस तरह का प्रस्ताव अस्वीकार किया है, जिससे प्रदेश में कार्यवाहक डीजीपी का कार्यकाल और लंबा खिंच गया है.
उत्तर प्रदेश में स्थाई डीजीपी की नियुक्ति एक बार फिर अधर में लटक गई है. उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले दिनों 35 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की सूची पैनल बनाने के लिए यूपीएससी को भेजी थी. इस लिस्ट में से यूपीएससी को तीन अधिकारियों का पैनल बनाकर लौटाना था. फिर उत्तर प्रदेश सरकार इन तीनों में से किसी एक को बतौर डीजीपी नियुक्ति दे देती. यूपीएससी ने गुरुवार को इस प्रस्ताव पर विचार करते हुए इसमें खामियां गिनाते हुए वापस लौटा दिया है.
यूपीएससी ने इस प्रस्ताव को लौटाते हुए कहा है कि यह ना तो 2025 की गाइडलाइन के मुताबिक है और ना ही इसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत भेजा गया है. यूपीएससी ने यह सूची निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोबारा भेजने का सुझाव दिया है. माना जा रहा है कि यूपीएससी के इस कदम से एक बार फिर उत्तर प्रदेश में स्थाई डीजीपी की नियुक्ति अधर में लटक गई है.
लिस्ट में थे 35 अधिकारियों के नाम
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्थानीय डीजीपी की नियुक्ति के लिए 1990 से 1996 बैच के 35 आईपीएस अधिकारियों की लिस्ट तैयार की थी. इन अधिकारियों में से पैनल के लिए तीन नामों का चयन वरिष्ठता के आधार पर यूपीएससी को करना था. फिर उत्तर प्रदेश सरकार इन तीन अधिकारियों में से किसी एक का नाम उत्तर प्रदेश के डीजीपी के लिए प्रस्तावित करती. लेकिन अब प्रस्ताव ही वापस लौट आने की वजह से यह पूरी प्रक्रिया ठंडे बस्ते में चली गई है.
2022 में भी भेजा गया था प्रस्ताव
स्थाई डीजीपी की नियुक्ति के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने साल 2022 में भी यूपीएससी को प्रस्ताव भेजा था. उस समय भी यूपीएससी ने प्रस्ताव में खामियां बताते हुए लौटा दिया था. इसकी वजह से स्थाई डीजीपी की नियुक्ति नहीं हो सकी थी. उत्तर प्रदेश में अंतिम स्थाई डीजीपी मुकुल गोयल थे. मई 2022 में उनके हटने के बाद से ही प्रदेश की कार्यवाहक डीजीपी की नियुक्ति हो रही है. इन चार वर्षों में 5 अधिकारी (डीएस चौहान, आरके विश्वकर्मा, विजय कुमार, प्रशांत कुमार और अब राजीव कृष्ण) कार्यवाहक डीजीपी हुए हैं.
