6 महीने में OBC आयोग की रिपोर्ट, फिर कब होंगे UP में पंचायत चुनाव? यहां जानिए सबकुछ
योगी सरकार ने UP पंचायत चुनावों में OBC आरक्षण तय करने के लिए विशेष आयोग की मंजूरी दे दी है. यह आयोग 6 महीने में अपनी रिपोर्ट देगा, जिससे जनसंख्या के आधार पर आरक्षण निर्धारित होगा. इस प्रक्रिया के कारण पंचायत चुनाव में कब होंगे, इसकी पूरी गणित हम यहां बता रहें हैं.
आखिरकार योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में OBC आरक्षण तय करने के लिए विशेष आयोग के गठन की मंजूरी दे दी है. यह आयोग छह महीने के अंदर प्रदेश भर में जनसंख्या के आधार पर आरक्षण की दशा और दिशा तय करेगा. इसके बाद पंचायत चुनावों की कवायद शुरू होगी. माना जा रहा है कि आयोग की रिपोर्ट आने के बाद भी चुनाव होने में करीब तीन से चार महीने लग सकते हैं. ऐसे में अब पंचायतों चुनावों की स्थिति साफ हो गई है.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दी. आयोग का मुख्य उद्देश्य राज्य की त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था (ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत) में पिछड़ेपन की प्रकृति, उसके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव तथा वर्तमान स्थिति का अध्ययन करना है. इस अध्ययन की रिपोर्ट के आधार पर आगामी पंचायत चुनावों में OBC वर्ग के लिए सीटें रिजर्व की जाएंगी.
छह महीने में देनी होगी रिपोर्ट
सरकार ने प्रावधान किया है कि आयोग के अध्यक्ष हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज होंगे. उनके साथ चार अन्य सदस्यों की भी नियुक्ति की जाएगी. आयोग का कार्यकाल महज 6 महीने का होगा. इसी अवधि में आयोग के अध्यक्ष से लेकर सदस्यों की नियुक्ति से लेकर रिपोर्ट तैयार करने का काम होगा. आयोग के सदस्य सभी 75 जिलों में बैठकें करेंगे. इस दौरान जातिवार आंकड़े लेकर उनकी समीक्षा करेंगे. फिर इसी आधार पर अपनी रिपोर्ट बनाएंगे.
अंतिम नहीं होगा आयोग फैसला
ऐसा नहीं है कि आयोग की रिपोर्ट के आधार को ही फाइनल मानकर आरक्षण लागू कर दिया जाएगा. बल्कि आरक्षण लागू करने से पहले आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक पटल पर रखा जाएगा. विभिन्न राजनीतिक दलों से आपत्तियां मांगी जाएंगी. इसके बाद फाइनल आरक्षण लिस्ट जारी की जाएगी. इसके लिए कम से कम डेढ़ महीने का समय दिया जाएगा. ऐसे में यदि मान लिया जाए कि आयोग अपनी रिपोर्ट सितंबर-अक्टूबर महीने में देता है तो भी आरक्षण लिस्ट फाइनल करने में नवंबर-दिसंबर आ जाएगा.
विधानसभा चुनाव का भी पड़ेगा असर
इस लिस्ट के तैयार होने के बाद भी चुनाव कराने में कम से कम तीन महीने का समय लगेगा. इस हिसाब से मार्च में पंचायत चुनाव कराए जा सकते हैं. चूंकि वही समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव कराने का भी है. ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव कराना सरकार के लिए जोखिम का काम हो सकता है. ऐसे में पंचायत चुनाव का टलना लाजमी है. इन सभी परिस्थितियों में विधानसभा चुनाव मार्च अप्रैल में हो जाता है तो उसके डेढ़ से दो महीने बाद यानी अप्रैल मई में ही यूपी में पंचायत चुनाव कराए जाने की स्थिति बन रही है.
