ग्राम प्रधानों की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती है योगी सरकार, इसलिए ले सकती है ये बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टलने के संकेतों के बीच योगी सरकार नई रणनीति पर काम करती दिख रही है. ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 26 मई 2026 को खत्म हो रहा है, ऐसे में सरकार मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों को ही प्रशासक समिति के रूप में जिम्मेदारी सौंप सकती है.

धरना दे रहे ग्राम प्रधानों के बीच डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव का टलना तय है. ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त होने वाला है, लेकिन अभी तक चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है. ऐसे में योगी सरकार मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ाने की तैयारी में जुट गई है. सूत्रों के मुताबिक, पंचायती राज विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेजा है कि मौजूदा ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों को ही प्रशासक समिति के रूप में जिम्मेदारी सौंपी जाए.

माना जा रहा है कि योगी सरकार इस फैसले के जरिए पंचायत प्रतिनिधियों की नाराजगी दूर करने और राजनीतिक संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रही है. दरअसल पंचायत चुनाव में देरी की आशंका को लेकर प्रदेशभर के प्रधानों में लंबे समय से असमंजस की स्थिति बनी हुई थी. इसी बीच रविवार 18 मई को बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान लखनऊ पहुंचे और जीपीओ पार्क पर धरना-प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारी प्रधानों की मांग थी कि या तो उनका कार्यकाल बढ़ाया जाए या फिर उन्हें ही प्रशासक नियुक्त किया जाए, ताकि पंचायतों की बागडोर बाहरी अधिकारियों के हाथ में न जाए.

प्रधानों को डिप्टी CM ने दिया था आश्वासन

ग्राम प्रधानों के धरना-प्रदर्शन के दौरान ही उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक अचानक प्रदर्शन स्थल पर पहुंच गए. प्रधानों के बीच पहुंचे डिप्टी सीएम ने न केवल उनकी समस्याएं सुनीं, बल्कि बेहद सहज अंदाज में उनसे बातचीत भी की. उन्होंने प्रधानों को लड्डू खिलाए, पानी पिलाया और गर्मी को देखते हुए पानी की अतिरिक्त व्यवस्था कराने के निर्देश भी दिए. प्रधानों से बातचीत के दौरान बृजेश पाठक ने कहा कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी. कई प्रधानों ने कहा कि सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत मिले हैं और उन्हें उम्मीद है कि उनकी मांगों को स्वीकार किया जाएगा.

प्रधानों की नाराजगी को क्यों दूर करना चाहती है सरकार?

सूत्रों के मुताबिक, योगी सरकार ने भी पंचायत प्रतिनिधियों की मांगों को गंभीरता से लिया है और इस पर उच्च स्तर पर मंथन चल रहा है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशासक बनाकर सरकार एक बड़ा राजनीतिक संदेश देना चाहती है. पंचायत प्रतिनिधियों का ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत प्रभाव होता है और विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सरकार उन्हें नाराज नहीं करना चाहती. यही वजह है कि सरकार पंचायतों की कमान अधिकारियों को देने के बजाय मौजूदा निर्वाचित प्रतिनिधियों को ही सौंपने पर विचार कर रही है.

‘ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूले’ से होगा ओबीसी आरक्षण

पंचायत चुनाव टलने की सबसे बड़ी वजह इस बार ओबीसी आरक्षण को लेकर अपनाई जा रही नई प्रक्रिया मानी जा रही है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अब पंचायत चुनावों में भी नगर निकाय चुनावों की तर्ज पर ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया लागू की जाएगी. इसके लिए सरकार समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग गठित करने जा रही है. इसकी मंजूरी कल ही दी गई है. यह आयोग पिछड़े वर्ग की समकालीन सामाजिक स्थिति, जनसंख्या और प्रतिनिधित्व का अध्ययन करेगा और उसी आधार पर आरक्षण तय करेगा. आयोग का कार्यकाल छह महीने का रखा गया है.

विधानसभा चुनाव के बाद हो सकता है पंचायत चुनाव

गौरतलब है कि साल 2021 के पंचायत चुनावों में रैपिड सर्वे के आधार पर आरक्षण तय किया गया था, लेकिन इस बार सरकार अधिक व्यापक और कानूनी रूप से मजबूत प्रक्रिया अपनाना चाहती है ताकि भविष्य में अदालतों में कोई विवाद न हो. विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया पूरी करने और आयोग की रिपोर्ट तैयार होने में काफी समय लग सकता है. राज्य निर्वाचन आयोग ने भी पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तारीख बढ़ाकर 10 जून 2026 कर दी है. इससे भी यह संकेत मिल रहे हैं कि चुनाव प्रक्रिया में अभी और समय लग सकता है.

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