यूपी में जमीन-मकान की खरीद-बिक्री में होने वाला है बड़ा बदलाव
उत्तर प्रदेश में जमीन और मकान खरीदने वालों के लिए बड़ी राहत की तैयारी है. योगी सरकार पंजीकरण विभाग और राजस्व विभाग के रिकॉर्ड को आपस में जोड़ने जा रही है, जिससे रजिस्ट्री के तुरंत बाद नामांतरण (दाखिल-खारिज) की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो सकेगी. नई व्यवस्था लागू होने पर लोगों को तहसीलों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और राजस्व रिकॉर्ड समय पर अपडेट होंगे.
उत्तर प्रदेश में जमीन और मकान खरीदने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है. अब रजिस्ट्री कराने के बाद नामांतरण यानी दाखिल-खारिज के लिए तहसीलों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. योगी सरकार ने संपत्ति पंजीकरण और राजस्व रिकॉर्ड को जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. जैसे ही आप रजिस्ट्री कराएंगे, वैसे ही सारी जानकारी संबंधित विभागों तक पहुंच जाएगी. सरकार का दावा है कि इससे फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी और विवाद कम होंगे.
दरअसल, यूपी में जमीन और मकान की खरीद-बिक्री से जुड़ी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अब रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की लंबी और जटिल प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा. सरकार पंजीकरण विभाग और राजस्व विभाग के रिकॉर्ड को आपस में जोड़ने की तैयारी में है, ताकि संपत्ति की रजिस्ट्री होते ही उसका प्रभाव राजस्व अभिलेखों में भी दिखाई दे सके. अभी तक लोगों को रजिस्ट्री कराने के बाद अलग से दाखिल-खारिज के लिए आवेदन करना पड़ता था.
नहीं लगाने पड़ेंगे तहसीलों के चक्कर
इस कारण कई मामलों में महीनों तक फाइलें लंबित रहती थीं और तहसीलों के चक्कर लगाने पड़ते थे. नई व्यवस्था लागू होने के बाद रजिस्ट्री की जानकारी सीधे राजस्व विभाग तक पहुंचेगी. इससे नामांतरण की प्रक्रिया तेज होगी और जमीन या मकान के स्वामित्व संबंधी रिकॉर्ड समय पर अपडेट हो सकेंगे. सरकार का मानना है कि संपत्ति विवादों की एक बड़ी वजह राजस्व रिकॉर्ड और रजिस्ट्री रिकॉर्ड में अंतर होना है.
ई-खतौनी और डिजिटल रिकॉर्ड को प्राथमिकता
जब दोनों विभागों का डेटा एक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा तो ऐसे विवादों में कमी आएगी. प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जहां रजिस्ट्री होने के बावजूद वर्षों तक खतौनी में पुराने मालिक का नाम दर्ज रहता है. इससे खरीददार को बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं और आगे संपत्ति बेचने में परेशानी होती है. नई व्यवस्था में ई-खतौनी और डिजिटल रिकॉर्ड को प्राथमिकता दी जा रही है.
फर्जी रजिस्ट्री या हेराफेरी पर लगेगी रोक
अधिकारियों का कहना है कि तकनीक आधारित सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ेगी और मानवीय हस्तक्षेप कम होगा. राजस्व और स्टांप विभाग के बीच डेटा इंटीग्रेशन से फर्जी रजिस्ट्री, दोहरी बिक्री और रिकॉर्ड में हेराफेरी जैसे मामलों पर भी प्रभावी रोक लग सकेगी. सरकार का दावा है कि डिजिटल सत्यापन की वजह से संपत्ति का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा और जांच आसान होगी.
समय और पैसा दोनों की बचत
विशेषज्ञों का कहना है कि संपत्ति संबंधी मुकदमों का बड़ा कारण रिकॉर्ड में विसंगतियां होती हैं. ऐसे में दोनों विभागों के एकीकृत सिस्टम से आम लोगों को सीधा लाभ मिलेगा. ग्रामीण क्षेत्रों में इसका असर और ज्यादा दिखाई दे सकता है। गांवों में जमीन खरीदने के बाद दाखिल-खारिज की प्रक्रिया अक्सर लंबी चलती है. कई बार राजस्व अभिलेख अपडेट नहीं होने से विवाद खड़े हो जाते हैं. नई व्यवस्था से किसान, भू-स्वामी और संपत्ति खरीददार सभी को राहत मिलने की उम्मीद है. इससे समय और पैसा दोनों की बचत होगी.