हर कमरे में जैमर और AI निगरानी… UPPSC परीक्षाओं में अब हाईटेक सुरक्षा
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल रोकने के लिए हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है. नई व्यवस्था के तहत हर परीक्षा कक्ष में सिग्नल जैमर लगाए जाएंगे, जिससे मोबाइल, ब्लूटूथ और अन्य वायरलेस उपकरण काम नहीं करेंगे. इसके अलावा AI आधारित निगरानी, फेस रिकग्निशन और बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित की जाएगी.
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) अब अपनी प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह हाईटेक सुरक्षा कवच में आयोजित करने जा रहा है. पेपर लीक और नकल की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए आयोग ने परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था को पहले से कहीं अधिक मजबूत बनाने का फैसला किया है. नई व्यवस्था के तहत हर परीक्षा कक्ष में जैमर लगाए जाएंगे, ताकि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए होने वाली किसी भी तरह की गड़बड़ी पर रोक लगाई जा सके.
इसके साथ ही AI आधारित निगरानी, फेस रिकग्निशन और बायोमेट्रिक सत्यापन जैसी आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जाएगा. नई व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शी, निष्पक्ष और नकलमुक्त परीक्षा प्रणाली तैयार करना है. पिछले कुछ सालों में उत्तर प्रदेश समेत देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से नकल के मामलों ने अभ्यर्थियों का भरोसा कमजोर किया था. इसी चुनौती को देखते हुए आयोग ने यह फैसला किया है.
हर परीक्षा कक्ष में लगेगा जैमर
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक परीक्षा कक्ष में सिग्नल जैमर लगाए जाएंगे. इन जैमर के सक्रिय रहने से मोबाइल फोन, ब्लूटूथ डिवाइस, स्मार्टवॉच और अन्य वायरलेस संचार उपकरण काम नहीं कर पाएंगे. इससे प्रश्नपत्र बाहर भेजने या उत्तर प्राप्त करने जैसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगेगी. आयोग का मानना है कि डिजिटल माध्यम से होने वाली नकल रोकने के लिए केवल तलाशी पर्याप्त नहीं है. इसलिए तकनीकी सुरक्षा को अनिवार्य बनाया जा रहा है.
AI आधारित निगरानी करेगी हर गतिविधि पर नजर
परीक्षा केंद्रों पर लगाए गए CCTV कैमरों को AI आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ा जाएगा. यह सिस्टम परीक्षार्थियों की असामान्य गतिविधियों की पहचान कर तत्काल अलर्ट जारी करेगा. यदि कोई अभ्यर्थी बार-बार इधर-उधर देखता है, संदिग्ध गतिविधि करता है या निर्धारित नियमों का उल्लंघन करता दिखाई देता है, तो निगरानी टीम को तुरंत सूचना मिल जाएगी. इससे मानव निगरानी के साथ तकनीकी निगरानी भी सुनिश्चित होगी.
फेस रिकग्निशन और बायोमेट्रिक सत्यापन
फर्जी अभ्यर्थियों (सॉल्वर गैंग) पर रोक लगाने के लिए फेस रिकग्निशन तकनीक और बायोमेट्रिक सत्यापन का भी उपयोग किया जाएगा. परीक्षा केंद्र में प्रवेश के समय अभ्यर्थी की पहचान उसके आवेदन पत्र में दर्ज फोटो और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड से मिलाई जाएगी. इससे किसी दूसरे व्यक्ति के परीक्षा देने की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी.
कंट्रोल रूम से होगी लाइव मॉनिटरिंग
आयोग परीक्षा केंद्रों की गतिविधियों पर केंद्रीय कंट्रोल रूम से भी नजर रखेगा. सभी महत्वपूर्ण केंद्रों की लाइव फीड अधिकारियों तक पहुंचेगी, जिससे किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी. जरूरत पड़ने पर उड़नदस्ते (फ्लाइंग स्क्वॉड) को तुरंत संबंधित परीक्षा केंद्र भेजा जाएगा.
परीक्षा केंद्रों के चयन में भी होगी सख्ती
आयोग केवल उन्हीं परीक्षा केंद्रों का चयन करेगा जहां पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, हाई क्वालिटी CCTV, मजबूत इंटरनेट व्यवस्था और आवश्यक तकनीकी संसाधन उपलब्ध होंगे. केंद्रों का पहले से भौतिक सत्यापन भी कराया जाएगा, ताकि परीक्षा के दौरान किसी प्रकार की लापरवाही न हो.
डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा सुरक्षित
नई व्यवस्था के तहत परीक्षा से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण गतिविधियों का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा. अगर किसी परीक्षा को लेकर भविष्य में कोई शिकायत आती है तो CCTV फुटेज, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल डेटा की मदद से जांच की जा सकेगी. इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और विवादों के निस्तारण में भी आसानी होगी.