CM योगी के कार्यक्रम से दूर रहेंगे चंपत राय? अयोध्या प्रशासन का आदेश चर्चा में
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे से पहले जिला प्रशासन का एक आदेश चर्चा में है. प्रशासन ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मुख्यमंत्री के राम मंदिर कार्यक्रम के लिए अपना प्रतिनिधि नामित करने को कहा है. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब राम मंदिर के दानपात्रों से कथित धनराशि गड़बड़ी की जांच एसआईटी कर रही है.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे से पहले प्रशासन का एक आदेश चर्चा में है. दरअसल, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, जो पिछले कई वर्षों से राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण की पूरी प्रक्रिया का प्रमुख चेहरा रहे हैं, अब मुख्यमंत्री के प्रस्तावित राम मंदिर कार्यक्रम से दूर रहेंगे. जिला प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा एवं प्रोटोकॉल निर्देशों में चंपत राय से अपना प्रतिनिधि नामित करने के लिए कहा गया है.
अयोध्या प्रशासन की ओर से कहा गया है कि मुख्यमंत्री के राम मंदिर दर्शन-पूजन कार्यक्रम के दौरान व्यवस्थाओं के लिए वे (चंपत राय) अपने स्तर के किसी अन्य व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि नामित करें. यह निर्देश ऐसे समय आया है जब राम मंदिर के दानपात्रों में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर जांच चल रही है. यही वजह है कि एक सामान्य प्रशासनिक निर्देश अब बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है.
क्या है पूरा मामला?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को अयोध्या दौरे पर रहेंगे. उनके कार्यक्रम में रामलला के दर्शन और पूजन का कार्यक्रम भी शामिल है. मुख्यमंत्री का अयोध्या दौरा हमेशा से महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन इस बार इसकी संवेदनशीलता कहीं अधिक है. कारण है- राम मंदिर के दानपात्रों से कथित रूप से धनराशि चोरी होने का मामला. हाल के दिनों में यह आरोप सामने आए कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दानपात्रों में डाली गई रकम में गड़बड़ी हुई है.
आरोपों के बाद जांच शुरू हुई और मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया. इसी बीच प्रशासन द्वारा जारी किए गए सुरक्षा निर्देशों ने नई बहस को जन्म दे दिया. जिला प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा और प्रोटोकॉल निर्देशों के बिंदु संख्या-29 में कहा गया कि, ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की व्यवस्थाओं के लिए किसी अन्य व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि नामित करें तथा उसकी सूचना ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सीयूजी नंबर पर उपलब्ध कराएं.’
हर कार्यक्रम में मौजूद रहते थे चंपत राय
इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंदिर कार्यक्रमों के दौरान ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारी चंपत राय मौजूद रहते थे और व्यवस्थाओं की निगरानी करते थे. गौरतलब है कि राम मंदिर आंदोलन का इतिहास देखें तो चंपत राय का नाम बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. वे विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी रहे हैं, राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल रहे, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद गठित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव बने.
चंपत राय ही मंदिर निर्माण की प्रक्रिया की निगरानी करते रहे और दान, निर्माण, ट्रस्ट गतिविधियों और मीडिया संवाद का प्रमुख चेहरा रहे. राम मंदिर से जुड़ा कोई बड़ा कार्यक्रम हो और चंपत राय मौजूद न हों, ऐसा कम ही देखने को मिला है, इसीलिए मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में उनकी संभावित अनुपस्थिति को सामान्य घटना नहीं माना जा रहा. फिलहाल, इस मामले में ट्रस्ट की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान समाने नहीं आया है.
चंपत राय के ड्राइवर पर शक
अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा विवाद में जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, उनमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का नाम प्रमुखता से सामने आया है. टिन्नू यादव को चंपत राय का पूर्व ड्राइवर और करीबी सहयोगी बताया जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टिन्नू यादव का अतीत बेहद साधारण रहा है. बताया जाता है कि वे पहले अयोध्या में टेंपो चलाते थे और बाद में चंपत राय के साथ जुड़े. राम मंदिर निर्माण से जुड़े कार्यों के दौरान उनकी भूमिका बढ़ी.
चंपत राय के संपर्क में आने के बाद टिन्नू यादव, ट्रस्ट से जुड़े कामकाज में सक्रिय दिखाई देने लगे. आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने आय से अधिक संपत्ति अर्जित की. कुछ रिपोर्टों में उनके नाम से अयोध्या और लखनऊ में करोड़ों रुपये की संपत्ति, हॉस्टल, रेस्तरां और लग्जरी वाहन होने का दावा किया गया है. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच जारी है. टिन्नू यादव ने भी सभी आरोपों से इनकार किया है.
राम मंदिर चढ़ावा विवाद क्या है?
पिछले कुछ दिनों से राम मंदिर में दानपात्रों में जमा होने वाली धनराशि को लेकर विवाद सामने आया. आरोप लगे कि दानपात्रों की राशि में गड़बड़ी हुई, कुछ कर्मियों की भूमिका संदिग्ध है. जांच के दौरान कुछ कर्मचारियों के घर से लाखों रुपये बरामद हुए. हालांकि ट्रस्ट ने शुरुआत से यह स्पष्ट किया कि मामले को दबाने के बजाय निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए. जांच के दौरान रुदौली क्षेत्र के मीनापुर ठकुरान फगौली गांव में कार्रवाई की गई.
लवकुश मिश्रा मंदिर परिसर में कर्मी के रूप में कार्यरत था. उसके घर से 10 से 12 लाख रुपये नकद बरामद किए गए. परिवार ने नकदी बरामद होने की पुष्टि की. परिवार का दावा था कि उन्हें पैसे के स्रोत की जानकारी नहीं थी. लवकुश के पिता ने कहा कि कुछ लोग गांव आए और नकदी लेकर गए.
ट्रस्ट की अपील पर SIT जांच शुरू
ट्रस्ट ने ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अनुरोध किया गया था कि मामले की एसआईटी जांच कराई जाए ताकि अफवाहों और आरोपों पर विराम लग सके. इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) गठित कर दी. फिलहाल, एसआईटी की टीम मंदिर से जुड़े कर्मचारियों और ट्रस्ट के पदाधिकारियों से पूछताछ कर रही है. तीन दिन के अंदर पिछले 6 साल के दान का हिसाब मांगा गया है.
क्यों महत्वपूर्ण है मुख्यमंत्री का यह दौरा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या से विशेष जुड़ाव माना जाता है. उनके कार्यकाल में राम मंदिर निर्माण तेजी से आगे बढ़ा, अयोध्या का व्यापक विकास हुआ, दीपोत्सव को वैश्विक पहचान मिली और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिला. ऐसे में विवाद के बीच उनका यह दौरा कई संदेश देने वाला माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार सरकार तीन संदेश देना चाहती है. पहला- आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं होगी.
दूसरा- जांच निष्पक्ष होगी, चाहे कोई भी व्यक्ति क्यों न हो. तीसरा- राम मंदिर की गरिमा और श्रद्धालुओं का विश्वास सर्वोपरि रहेगा. अब सभी की निगाहें तीन बातों पर टिकी हैं— मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या दौरा, एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट, चंपत राय की संभावित प्रतिक्रिया पर.