योगी सरकार का सख्त एक्शन, 558 मदरसों में जांच का आदेश, मिड-डे मील में घोटाले का है आरोप

अखिल भारतीय पसमांदा समाज मंच ने सरकार ने मदरसों में मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और धांधली की शिकायत की थी. अब योगी सरकार ने इस शिकायत को लेकर गंभीर रुख अपनाते हुए 558 मदरसों में जांच के आदेश दे दिए हैं.

मदरसा ( प्रतीकात्मक तस्वीर)

योगी सरकार ने मदरसों में चल रही अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कदम उठाया है. मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और धांधली के आरोप लगने के बाद प्रदेश के 558 मदरसे जांच के घेरे में हैं. अब सरकार इन मदरसों की जांच कराने का फैसला लेने जा रही है. इस खबर के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और मदरसा संचालकों के बीच हड़कंप मच गया है

अखिल भारतीय पसमांदा समाज मंच ने सरकार ने मदरसों में मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और धांधली की मध्याह्न भोजन प्राधिकरण के निदेशक से औपचारिक शिकायत की थी. मंच ने आरोप लगाया था कि कागजों पर बच्चों की संख्या ज्यादा दिखाई जा रही और सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है.शिकायत का संज्ञान लेते हुए मध्याह्न भोजन प्राधिकरण की निदेशक मोनिका रानी ने तत्काल प्रभाव से इन 558 मदरसों की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं.

अधिकारियों को तय समय सीमा के अंदर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश

जांच में ये पता लगाया जाएगा क्या इन मदरसों में तय मानकों के मुताबिक बच्चों को भोजन परोसा जा रहा है कि नहीं. साथ ही बजट आवंटन और असल लाभार्थियों की संख्या की भी बारीकी से जांच पड़ताल की जाएगी. निदेशक ने अधिकारियों को तय समय सीमा के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. बता दें सरकार मदरसों के आधुनिकीकरण, शिक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता लाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है.

इससे पहले बिना मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे कराया गया था

सरकार ने इससे पहले बिना मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे कराया गया था. अब मिड डे मिल में भ्रष्टाचार के आरोप के बाद जांच के आदेश दे दिए हैं. सरकार का कहना है कि वह शिक्षा के साथ-साथ छात्रों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं में भी किसी भी तरह के भ्रष्टाचार को बर्दाश्त करने वालों को नहीं बख्शी की. हमारी कोशिश है कि मिड-डे मील योजना का लाभ सीधे जरूरतमंद बच्चों को मिले.

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