30 फीट ऊंची धधकती आग की लपटों के बीच से निकले संजू पंडा, बिल्कुल भी नहीं झुलसा शरीर, होलिका दहन पर चमत्कार!
मथुरा के फालैन में होलिका दहन के दौरान आग से होकर गुजरने की परंपरा 5200 साल पुरानी है. इस बार संजू पंडा ने इस परंपरा को निभाने की चुनौती स्वीकार की. जब वह 30 फीट ऊंची आग की लपटों के बीच कूदे और फिर सुरक्षित बाहर निकल आए तो हर कोई हैरान रह गया. लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं.
मथुरा के ब्रज की होली पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. इसमें हिस्सा लेने दुनियाभर से लोग पहुंचते हैं. लेकिन इन सबके बीच मथुरा के फालैन गांव ने कुछ ऐसा हुआ, जिसे लोग अब चमत्कार मान रहे हैं. दरअसल, यहां होलिका दहन के दौरान संजू पंडा धधकती हुई 30 फीट ऊंची आग की लपटों के बीच से सुरक्षित बाहर निकल आए. यह देख वहां मौजूद श्रद्धालु हैरान रह गए और भगवान कृष्ण का जयघोष करना शुरू कर दिया.
5200 हजार साल पुरानी है परंपरा
फालैन के बारे में कहा जाता है कि यह वही जगह है जहां भगवान विष्णु के अन्नय भक्त प्रह्लाद को जलाने के लिए होलिका उन्हें अपनी गोद में लेकर बैठी. ऐसे में यहां आग से होकर गुजरने की परंपरा 5200 साल पुरानी है. इसी परंपरा को जीवित रखने के लिए संजू पंडा के परिवार को कोई ना कोई सदस्य हर साल जलती हुई होली की अग्नि को पार करता है.
इस बार संजू पंडा ने स्वीकारी थी चुनौती
अबकी बार संजू पंडा ने जलती हुई होली को पार करने की पंरपरा का निभाने का फैसला किया. इससे पहले उनके भाई और पिता भी इस परंपरा को निभा चुके हैं. इसी परंपरा के तहत संजू पंडा मंगलवार को फालैन गांव में भीषण अग्नि के बीच से सुरक्षित बाहर निकल आए. वहां मौजूद लोग इसे चमत्कार मानने लगे.
वसंत पंचमी से ब्रह्मचर्य और फलाहार का किया पालन
इस परंपरा को निभाने के लिए संजू पंडा ने वसंत पंचमी से ब्रह्मचर्य और फलाहार का पालन किया. फिर प्रह्लाद कुंड में स्नान किया. उसके बाद धधकती होलिका में छलांग लगाई. आग 20 फीट चौड़ी और 30 फीट ऊंची आग की लपटें के बीच से संजू पंडा बाहर निकल आए. पहली बार इस परंपरा का निर्वहन कर रहे संजू ने बताया कि उन्हें आग के बीच ईश्वरीय मार्गदर्शन का अनुभव हुआ.
12 गांवों का जनसैलाब बना इस चमत्कारिक दृश्य का साक्षी
12 गांवों के जनसैलाब ने इस चमत्कारिक दृश्य का साक्षी बनकर संजू का भव्य स्वागत किया. ग्रामीणों का कहना है कि 45 दिन का कठिन व्रत और फिर यह अग्नि विजय! सनातन संस्कृति का यह अद्भुत नजारा आज पूरी दुनिया देख रही है. संजू ने दिखा दिया कि विश्वास में कितनी शक्ति होती है. इस परंपरा के दौरान भीड़ को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह से मुस्तैद था.