मुरादाबाद में तेंदुओं का आतंक रोकने के लिए AI कवच! 5 गांवों में बिछेगा हाईटेक सुरक्षा जाल
मुरादाबाद में तेंदुओं के कहर से 2 महिलाओं की जान जाने के बाद, प्रशासन ने अब बड़ा दांव लगाया है. तेंदुओं के आतंक को रोकने के लिए ₹39.45 लाख का AI-आधारित सुरक्षा कवच तैयार किया गया है. इसके तहत 200 हेक्टेयर में हाईटेक सुरक्षा जाल बिछेगा, जो 24/7 निगरानी सुनिश्चित करेगी.
मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा और कांठ क्षेत्र में तेंदुओं के बढ़ते आतंक से निपटने के लिए प्रशासन ने अब हाईटेक तकनीक का सहारा लेने की तैयारी की है. उत्तराखंड की सीमा से सटे गन्ने के घने खेतों से निकलकर तेंदुए गांव में आतंक मचाते हैं. प्रशासन ने 5 अति-संवेदनशील गांवों में AI सुरक्षा कवच तैयार किया है. इस पर करीब 39.45 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे.
प्रस्ताव के तहत, पांच गांवों के करीब 200 हेक्टेयर क्षेत्र में 20 नाइट-विजन AI कैमरे लगाए जाएंगे. ये कैमरे 24 घंटे इलाके की निगरानी करेंगे और तेंदुए की मौजूदगी का पता लगते ही उसकी लोकेशन और समय से जुड़ा अलर्ट इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम को भेजेंगे. इसके बाद संबंधित टीमों को तत्काल कार्रवाई के लिए सूचना दी जाएगी.
AI कैमरे बताएंगे तेंदुए की लोकेशन
गन्ने के खेतों में तेंदुओं की मौजूदगी का पता लगाना वन विभाग और ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती रहता है. ऐसे में AI कैमरों के जरिए खेतों और आसपास के संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी जाएगी. प्रस्ताव के मुताबिक 20 कैमरे 5 बड़े और 15 मध्यम पोल पर लगाए जाएंगे. बिजली की समस्या के लिए सिस्टम को सोलर पैनल और बैटरी बैकअप से जोड़ा जाएगा.
ड्रोन से होगी आसमान से निगरानी
परियोजना में सर्विलांस ड्रोन को भी शामिल किया गया है. करीब 2.50 लाख रुपये की लागत वाले ड्रोन की मदद से घने खेतों और ऐसे स्थानों की निगरानी की जाएगी, जहां इंसानी टीम के लिए पहुंचना जोखिम भरा हो सकता है. तेंदुए की लोकेशन मिलने के बाद वन विभाग की टीम रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करेगी.
इसके लिए 10 आधुनिक रेस्क्यू केज और 100 हाई-पावर टॉर्च भी प्रस्तावित हैं. इसके अलावा ग्रामीणों को तत्काल चेतावनी देने के लिए पब्लिक एड्रेस सिस्टम और पोर्टेबल मेगाफोन का इस्तेमाल किया जाएगा.
कंट्रोल रूम से मिलेगा रियल टाइम अलर्ट
पूरे सिस्टम का मुख्य केंद्र इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम होगा. AI कैमरों से मिलने वाली तस्वीरों और वीडियो का विश्लेषण कर सिस्टम तेंदुए की मौजूदगी की पहचान करेगा. संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर कंट्रोल रूम को तत्काल सूचना मिलेगी. इसके बाद संबंधित क्षेत्र में अलर्ट जारी कर ग्रामीणों को सावधान किया जा सकेगा.
प्रशासन का मानना है कि इससे तेंदुए की मौजूदगी का पता पहले ही चल जाएगा और वन विभाग की टीम को रेस्क्यू के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा. इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष के दौरान जनहानि का खतरा कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
सफल हुआ पायलट तो 50 KM तक विस्तार
करीब 39.45 लाख रुपये के इस पायलट प्रोजेक्ट को 10 सप्ताह में छह चरणों में पूरा करने की योजना है. शुरुआत ठाकुरद्वारा और कांठ क्षेत्र के 5 संवेदनशील गांवों से की जाएगी. परियोजना के परिणाम और AI अलर्ट की सटीकता का आकलन करने के बाद इसे करीब 50 किलोमीटर के बड़े क्षेत्र में विस्तार देने की योजना है.
प्रशासन के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य सिर्फ तेंदुओं को पकड़ना नहीं, बल्कि उनकी गतिविधियों की समय रहते जानकारी हासिल कर ग्रामीणों को सतर्क करना और मानव-वन्यजीव संघर्ष में होने वाली जनहानि को कम करना है. अगर पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो मुरादाबाद का यह मॉडल दूसरे संवेदनशील क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है.