पहले से था नोएडा जलाने का इनपुट, 50 हैंडल उगल रहे थे जहर, आतंकी कनेक्शन भी… फिर क्यों सोती रही पुलिस?

नोएडा मजदूर आंदोलन में हुई हिंसा पुलिस की बड़ी लापरवाही का नतीजा थी. खुफिया इनपुट, 50 से अधिक फर्जी सोशल मीडिया हैंडल से भड़काऊ पोस्ट और आतंकी कनेक्शन की चेतावनी के बावजूद पुलिस निष्क्रिय रही. मुख्यमंत्री योगी के अलर्ट को भी नजरअंदाज किया गया, जिसकी वजह से सोमवार को नोएडा में भीषण बवाल हुआ.

नोएडा में मजदूरों का आंदोलन

नोएडा में मजदूर आंदोलन के दौरान हिंसा को लेकर काफी हद तक स्थिति साफ हो गई है. पुलिस के पास पहले से इनपुट था कि इस आंदोलन में हिंसा हो सकती है. 50 से अधिक सोशल मीडिया हैंडल पर इस आंदोलन को लेकर जहर उगला जा रहा था. मजदूरों को सरकार और इंडस्ट्री के खिलाफ भड़काया जा रहा था. ये भी इनपुट था कि इस आंदोलन में हिंसक घटना को सीमा पार से उकसाया जा रहा है. इतने सारे इनपुट के बाद भी नोएडा पुलिस आंख मूंद कर सोई रही. परिणाम स्वरुप सोमवार की सुबह नोएडा में मजदूर आंदोलन की आग धधक उठी.

इसका खामियाजा ना केवल नोएडा, बल्कि पड़ोसी जिले गाजियाबाद, हापुड़ और बुलंदशहर में भी मजदूर सड़कों पर उतर गए. यह सारा खुलासा खुद उत्तर प्रदेश पुलिस और सरकार की उच्च स्तरीय कमेटी ने किया है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि इतने इनपुट के बाद भी नोएडा पुलिस क्यों सोती रही? उत्तर प्रदेश पुलिस और सरकार ने खुलासा किया है कि नोएडा के सेक्टर-2, फेज-2 समेत कई औद्योगिक इलाकों में सोमवार को हुए हिंसक बवाल के पीछे 50 से ज्यादा फर्जी सोशल मीडिया हैंडल सक्रिय थे. ये हैंडल महज 24 घंटे पहले बनाए गए थे और इनके जरिए अफवाहें फैलाकर मजदूरों को भड़काया गया.

खुद सीएम योगी ने किया था अलर्ट

इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार की रात को बैठक कर आठ जिलों की DM को अलर्ट रहने का निर्देश दिया था. कहा था कि श्रमिक आंदोलन नक्सली आंदोलन का रूप ले सकता है. इसलिए सभी को सतर्क रखना होगा. उन्होंने अधिकारियों को श्रमिक और उद्यमियों के साथ समन्वय बनाने और विवाद को तत्काल खत्म करने को कहा था. इसके बाद भी अधिकारी नहीं चेते. उधर, श्रम मंत्री अनिल राजभर ने भी साफ शब्दों में कहा कि इस घटना के पीछे पाकिस्तान लिंक है. इसकी जांच चल रही है.

क्या था असली मुद्दा और कैसे बिगड़ा माहौल?

नोएडा की कई फैक्टरियों के कर्मचारी न्यूनतम वेतन 20,000 रुपये करने, नौकरी की पक्की गारंटी और मनमानी बर्खास्तगी रोकने की मांग कर रहे थे. रविवार को इनकी कुछ मांगें मान ली गई थीं, बावजूद इसके सोमवार की सुबह मजदूर सड़कों पर आ गए. देखते ही देखते सड़कें जाम हो गईं, पथराव हुआ, गाड़ियां जलाई गईं और यातायात ठप हो गया. पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया. इस मामले में अब तक 300 से ज्यादा लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि 100 से अधिक हिरासत में हैं.

अब एक्शन में सरकार

इस बवाल के बाद सरकार की पहल पर फैक्ट्री मालिकों और मजदूर यूनियनों के बीच 8 सूत्रीय समझौता हो गया है. जिसमें नौकरी की सुरक्षा, बिना वजह छंटनी न करने और वेतन संबंधी मांगों पर आश्वासन शामिल हैं. उधर, एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं. हाल की आतंकी गिरफ्तारियों के बाद इंटेलिजेंस इनपुट्स को गंभीरता से लिया जा रहा है. डीजीपी राजीव कृष्णा के मुताबिक सभी कनेक्शन चेक किए जा रहे हैं. अभी सुरक्षा बलों की भारी तैनाती है. दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर चेकिंग बढ़ा दी गई है. सोशल मीडिया की भी निगरानी हो रही है.

Follow Us