कोहरे में भी लैंडिंग, MRO हब… जेवर एयरपोर्ट बनेगा देश का सबसे बड़ा स्मार्ट एयर-सिटी, जानें अहम बातें

जेवर एयरपोर्ट भारत का सबसे बड़ा और स्मार्ट एयरपोर्ट बनने जा रहा है. 1334 हेक्टेयर में फैला यह 'एयर-सिटी' घने कोहरे में भी सुरक्षित उड़ानें सुनिश्चित करेगा, जिससे फ्लाइट देरी कम होगी. 3900 मीटर रनवे और भविष्य में 6 रनवे के साथ, यह MRO और कार्गो हब भी बनेगा.

जेवर एयरपोर्ट (फाइल फोटो) Image Credit:

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) लंबे इंतजार के बाद हकीकत बनने जा रहा है. करीब 25 साल पहले शुरू हुआ यह सपना साकार होने के कगार पर है. प्रधानमंत्री नरेंद मोदी 28 मार्च को एयरपोर्ट का भव्य उद्घाटन करेंगे. कार्यक्रम की तैयारी जोर-शोर से चल रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को एयरपोर्ट का निरीक्षण और तैयारियों का जाएजा लेंने पहुंचेंगे.

जेवर एयरपोर्ट भारत का सबसे बड़ा और स्मार्ट एयरपोर्ट बनने जा रहा है. 1334 हेक्टेयर में फैला यह ‘एयर-सिटी’ घने कोहरे में भी सुरक्षित उड़ानें सुनिश्चित करेगा, जिससे फ्लाइट देरी कम होगी. 3900 मीटर रनवे और भविष्य में 6 रनवे के साथ, यह कार्गो हब भी बनेगा. इसके अलावा, एयरपोर्ट परिसर में मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (MRO) सुविधा भी स्थापित की जाएगी.

सालाना 2.5 मिलियन टन कार्गो संभालने की क्षमता

इस एयरपोर्ट की सबसे बड़ी खासियत इसकी हाईटेक तकनीक है. यहां इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम लगाया गया है जिससे घने कोहरे बारिश या खराब मौसम में भी विमान सुरक्षित तरीके से उतर सकेंगे. उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान कोहरे की समस्या आम रहती है लेकिन यहां 50 मीटर तक की बेहद कम विजिबिलिटी में भी फ्लाइट ऑपरेशन संभव होगा.

जेवर एयरपोर्ट का रनवे 3900 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा बनाया गया है जो बड़े विमान के संचालन के लिए पूरी तरह सक्षम है. भविष्य में यहां कुल 6 रनवे बनाए जाएंगे जिससे यह एयरपोर्ट देश का सबसे बड़ा और व्यस्त एयर हब बन सकेगा. कार्गो हब के रूप में इस एयपोर्ट पर यहां सालाना 2.5 मिलियन टन कार्गो संभालने की क्षमता होगी.

रेस्क्यू एंड फायरफाइटिंग, एडवांस कैटरिंग सुविधा

इसके साथ ही जेवर एयरपोर्ट पर विमान के रखरखाव से लेकर मरम्मत तक सभी सेवाएं मिलेंगी. एयरपोर्ट परिसर में अकासा एयर की पहली मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (एमआरओ) सुविधा स्थापित की जाएगी. एयरपोर्ट की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी सीआईएसएफ को दी गई है पहले चरण में करीब 1047 जवान तैनात किए जाएंगे.

इसके अलावा एयरक्राफ्ट रेस्क्यू एंड फायरफाइटिंग कैटेगरी भी सुविधा होगी जो उच्चतम सुरक्षा मानकों में शामिल है इसका मतलब है कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रभावी कार्रवाई संभव होगी. साथ ही एयरपोर्ट पर 40,000 वर्ग फुट में विश्व स्तरीय कैटरिंग सुविधा विकसित की जा रही है. यहां तैयार होने वाला भोजन अन्य एयरपोर्ट पर भी सेवा देगी.

जेवर एयरपोर्ट से शुरुआत में किन शहरों के लिए उड़नें?

शुरुआती चरण में इंडिगो आकासा और और एयर इंडिया एक्सप्रेस जैसे प्रमुख एयरलाइंस यहां से उड़ाने शुरू करेंगी. पहले चरण में जिन शहरों के लिए फ्लाइट शुरू होगी उनमें वाराणसी लखनऊ अहमदाबाद मुंबई बेंगलुरु हैदराबाद जयपुर चेन्नई पटना कानपुर और श्रीनगर शामिल है. शुरुआत में रोजाना करीब 150 उड़ानों का संचालन किया जाना है.

जेवर एयरपोर्ट की लोकेशन इसलिए भी खास है कि यह दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट से करीब 72 किलोमीटर, नोएडा से 52 किलोमीटर और आगरा से लगभग 130 किलोमीटर दूरी स्थित है. यमुना एक्सप्रेस और अन्य हाईवे के जरिए यहां पहुंचना बेहद आसान होगा. भविष्य में मेट्रो और रेल कनेक्टिविटी भी विकसित की जाएगी जिससे यात्रियों को और सुविधा मिलेगी.

CM योगी का ड्रिम प्रोजेक्ट, राजनाथ सिंह ने रखा था प्रस्ताव

नोएडा एयरपोर्ट को ग्रीन एयरपोर्ट के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे विकास और पर्यावरण को एक साथ संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है. कुल मिलाकर 25 साल पहले शुरू हुआ यह सपना अब साकार होने की कगार पर है. साल 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने जेवर में ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल और एविएशन हब का प्रस्ताव रखा था.

इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी की केंद्र सरकार में इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था. हालांकि, उससे बाद इसमें रुकावट आई, और फिर साल 2017 में यूपी में योगी सरकार बनने के बाद प्रस्ताव को आगे बढ़ाया गया. इस सीएम योगी के ड्रिम प्रोजेक्ट में से एक है. पीएम मोदी ने 26 नवंबर को जेवर में नोएडा इंटरनेशल एयरपोर्ट की नींव रखी थी.

Follow Us