‘अब कहां जाएं?’, नोएडा के मामूरा अग्निकांड के बाद बेघर हुए परिवारों का दर्द
नोएडा के सेक्टर-66 स्थित मामूरा इलाके में बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने कई परिवारों को बेघर कर दिया. हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि चार गंभीर रूप से झुलस गए. पुलिस, दमकल और प्रशासन की टीमों ने रेस्क्यू अभियान चलाकर 100 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला. आग में कई परिवारों के घर, नकदी, जेवर, जरूरी दस्तावेज और घरेलू सामान जलकर राख हो गए.
नोएडा के थाना फेस-3 क्षेत्र स्थित सेक्टर-66 के मामूरा इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने दर्जनों परिवारों की जिंदगी पल भर में बदल दी. आग की लपटों ने केवल एक इमारत को नहीं, बल्कि उसमें रहने वाले लोगों के सपनों, सालों की मेहनत और भविष्य की उम्मीदों को भी राख में बदल दिया. किसी का घर जल गया, किसी की जमा-पूंजी, तो किसी के बच्चों की पढ़ाई से जुड़े दस्तावेज आग की भेंट चढ़ गए.
हादसे में दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि चार लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं और अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं. पुलिस और दमकल विभाग की टीमों ने रेस्क्यू अभियान चलाकर 100 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल पीड़ित परिवारों के सामने यही है— अब हम जाएं कहां?
दो लोगों की मौत, चार गंभीर रूप से घायल
मामूरा की बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले लिया. आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला. कई परिवार अपने घरों से सिर्फ जान बचाकर बाहर निकल पाए. इस हादसे में दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि चार लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं. सभी घायलों का इलाज नोएडा जिला अस्पताल में चल रहा है.
100 से अधिक लोगों का किया गया रेस्क्यू
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर विभाग और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं. दमकल कर्मियों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और इमारत में फंसे 100 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला. रेस्क्यू अभियान के दौरान कई लोगों को सीढ़ियों और खिड़कियों के रास्ते बाहर निकाला गया. अगर समय रहते राहत अभियान शुरू नहीं होता तो जनहानि कहीं अधिक हो सकती थी.
‘सब कुछ खत्म हो गया…’
हादसे के बाद पीड़ित परिवारों की आंखों में सिर्फ दर्द और बेबसी दिखाई दी. एक महिला ने रोते हुए कहा कि सालों की मेहनत से बनाया गया घर, घरेलू सामान और बच्चों का भविष्य सब कुछ आग में जल गया. कई परिवारों के आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, शैक्षणिक प्रमाणपत्र, नकदी, जेवर और जरूरी दस्तावेज पूरी तरह राख हो गए. सबसे ज्यादा मुश्किल किराए पर रहने वाले परिवारों के सामने खड़ी हो गई है. उनके पास अब न रहने की जगह बची है.
संकरी गलियां और ऊंची इमारतें बनीं बड़ी चुनौती
स्थानीय लोगों का कहना है कि मामूरा में वर्षों से बिना पर्याप्त फायर सेफ्टी इंतजामों के बहुमंजिला इमारतें बनाई जाती रही हैं. इलाके की संकरी गलियां और अवैध अतिक्रमण बचाव कार्य में सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आए. दमकल की बड़ी गाड़ियों को अंदर पहुंचने में काफी दिक्कत हुई, जिससे राहत कार्य प्रभावित हुआ. स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि निर्माण के समय सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराया गया होता तो नुकसान इतना बड़ा नहीं होता.
क्या इमारत में थी फायर सेफ्टी व्यवस्था?
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जिस इमारत में इतनी बड़ी संख्या में लोग रह रहे थे, वहां फायर सेफ्टी के क्या इंतजाम थे? क्या बिल्डिंग में फायर अलार्म, स्प्रिंकलर सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट और अग्निशमन उपकरण मौजूद थे? यदि थे तो क्या वे काम कर रहे थे? और यदि नहीं थे तो निर्माण की अनुमति कैसे दी गई? इन सभी सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
इमारत सील, जांच शुरू
घटना के बाद पुलिस ने आग से प्रभावित इमारत को पूरी तरह खाली करा दिया है. किसी भी अनहोनी से बचने के लिए बिल्डिंग में लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है. फायर विभाग, पुलिस और संबंधित एजेंसियां संयुक्त रूप से जांच कर रही हैं कि आग किस वजह से लगी और क्या निर्माण के दौरान फायर सेफ्टी नियमों का पालन किया गया था. इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि इमारत का निर्माण वैध था या नहीं?
