आबादी के बाहर से निकलेगी मेट्रो, कॉरिडोर के साथ बनेंगे 2 एलिवेटेड रोड; नोएडा में जाम से बड़ी राहत

नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर बढ़ते ट्रैफिक को कम करने के लिए बड़ा प्लान है. सेक्टर-142 से बॉटनिकल गार्डन तक नया मेट्रो कॉरिडोर और दो एलिवेटेड सड़कें बनेंगी. यह परियोजना एक्सप्रेसवे पर वाहनों की भीड़ कम कर लाखों यात्रियों को जाम से राहत देगी. इससे आईटी पार्कों और शैक्षणिक संस्थानों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और बॉटनिकल गार्डन पर दिल्ली मेट्रो से इंटरचेंज मिलेगा.

नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान तैयार किया गया है. प्रस्तावित योजना के तहत सेक्टर-142 से बॉटनिकल गार्डन तक बनने वाले नए मेट्रो कॉरिडोर के साथ-साथ दो एलिवेटेड सड़कें भी बनेंगी. इस परियोजना का उद्देश्य एक्सप्रेसवे पर वाहनों की भीड़ कम करने के साथ ही शहर में लाखों दैनिक यात्रियों को जाम से राहत दिलाना है.

अधिकारियों के अनुसार, नई मेट्रो लाइन को रिहायशी इलाकों के अंदर से निकालने के बजाय नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित किया जाएगा. इससे आईटी पार्क, कॉर्पोरेट कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान और व्यावसायिक केंद्र सीधे सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से जुड़ सकेंगे. इससे नौकरीपेशा लोगों और छात्रों के लिए सफर पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक होगा. परियोजना के तहत एक्सप्रेसवे के दोनों ओर एलिवेटेड सड़कें भी बनाई जाएंगी.

कम होगा ट्रैफिक प्रेशर

अधिकारियों के मुताबिक इसका मकसद लोकल ट्रैफिक और लंबी दूरी के वाहनों की आवाजाही को अलग-अलग करना है. इससे सड़क पर दबाव कम होगा और यात्रा सुगम होगी. इस प्रोजेक्ट से सेक्टर-44, 93, 97, 105, 108 और 142 समेत आसपास के इलाकों की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है. करीब 11.56 किलोमीटर लंबे इस मेट्रो विस्तार में कुल आठ एलिवेटेड स्टेशन प्रस्तावित हैं.

यहां बनेगा इंटरचेंज

इस प्रोजेक्ट की सबसे अहम कड़ी बॉटनिकल गार्डन स्टेशन होगा, जहां यात्रियों को दिल्ली मेट्रो की ब्लू और मैजेंटा लाइन से सीधा इंटरचेंज मिलेगा. इससे नोएडा, ग्रेटर नोएडा और दिल्ली के बीच आने-जाने वाले लोगों का सफर अधिक तेज और आसान हो जाएगा. शहरी विकास से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि मेट्रो और एलिवेटेड रोड परियोजनाएं पूरी होने के बाद एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक जाम की समस्या में उल्लेखनीय कमी आएगी. साथ ही तेजी से विकसित हो रहे व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच बेहतर होगी, जिससे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी.

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