फाइनल टेस्ट में पास जेवर एयरपोर्ट, 2 बार सफल लैंडिग और टेक ऑफ, 15 जून से उड़ानों को हरी झंडी

नोएडा एयरपोर्ट पर 15 जून से कॉमर्शियल उड़ानों की शुरुआत होगी. इसके लिए एयरपोर्ट ने अंतिम टेस्ट भी पास कर लिया है. दरअसल, 09 जून यानी मंगलवार को IndiGo के विमान ने 2 बार सफल लैंडिग और टेक ऑफ किया. इस दौरान सबकुछ मानकों के मुताबिक पाया गया.

नोएडा एयरपोर्ट से उड़ान की तैयारी तेज ( प्रतीकात्मक तस्वीर)

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब नियमित उड़ानों की शुरुआत के बेहद करीब पहुंच गया है. 15 जून से प्रस्तावित कमर्शियल ऑपरेशन से पहले मंगलवार यानी 09 जून को एयरपोर्ट पर ऑपरेशन रेडनेस और टर्नअराउंड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया गया. इस दौरान इंडिगो के विमान ने एयरपोर्ट पर दो बार सफल लैंडिंग और दो बार टेक ऑफ कर रनवे ग्राउंड सिस्टम और संचालन प्रक्रिया का परीक्षण किया.

दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से इंडिगो का ए 320 विमान फ्लाइट 6e 5601 सुबह निर्धारित समय पर उड़ान भरकर जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचा. एयरपोर्ट के हवाई क्षेत्र में पहुंचने के बाद विमान ने अलग-अलग ऊंचाइयों और एंगल पर उड़ान भरते हुए रनवे इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम और ईयर नेविगेशन प्रक्रियाओं की जांच की.

दो बार लैंडिंग और टेकऑफ से परखा गया पूरा सिस्टम

ट्रायल के दौरान विमान ने रनवे 28 पर सफल अप्रोच और लैंडिंग की इसके बाद दोबारा टेक ऑफ कर एयरपोर्ट के आसपास कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए विभिन्न ऑपरेशनल प्रक्रियाओं का परीक्षण किया गया. विमान को अपरों एरिया में ले जाकर ग्राउंड ऑपरेशन की भी जांच की गई ग्राउंड स्टाफ ने इस दौरान टॉकिंग विमान में ईंधन भरने बैगेज हैंडलिंग और कार्गो प्रबंध जैसी प्रक्रियाओं का तय समय के भीतर सफल अभ्यास किया.

इस ट्रायल का उद्देश्य यह था कि एयरपोर्ट नियमित यात्री उड़ानों के लिए पूरी तरह तैयार है या नहीं. ट्रायल पूरा होने के बाद इंडिगो की फ्लाइट 6e 5601 दोबारा दिल्ली के लिए रवाना हुई. एयरपोर्ट प्रबंधन के अनुसार ट्रायल के नतीजे संतोषजनक रहे और सभी प्रमुख सिस्टम निर्धारित मानकों के अनुरूप काम करते पाए गए.

15 जून से शुरू हो जाएगा कमर्शियल ऑपरेशन

विमान की सफल लैंडिंग और टेक ऑफ के बाद अब 15 जून से प्रस्तावित कमर्शियल ऑपरेशन शुरू होने के बाद नोएडा ग्रेटर नोएडा पश्चिम उत्तर प्रदेश और आसपास के लाखों यात्रियों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है. इससे दिल्ली एयरपोर्ट का दबाव कम होगा क्षेत्र कनेक्टिविटी को भी नई गति मिलेगी.

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