टेक्निकल सपोर्ट के नाम पर विदेशियों को लूटता था गैंग, नोएडा पुलिस ने पकड़ा फर्जी कॉल सेंटर

नोएडा पुलिस ने एक बड़े फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है. यह एक संगठित साइबर ठगी नेटवर्क था, जिसने 450 से अधिक विदेशी नागरिकों को अपना शिकार बनाया. गिरोह के सरगना समेत 16 सदस्य गिरफ्तार किए गए हैं. यह गिरोह ठगी के रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलते थे.

नोएडा सेक्टर 16 में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ Image Credit:

नोएडा में साइबर क्राइम पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. यह एक संगठित साइबर ठगी नेटवर्क था, जिसे फर्जी कॉल सेंटर से चलाया जा रहा था. यह कॉल सेंटर सेक्टर 16 में संचालित हो रहा था, पुलिस में छापमारी कर गिरोह के सरगना समेत 16 सदस्यों को गिरफ्तार किया. यह गिरोह विदेशी नागरिकों को अपना शिकार बनाता था.

शुरुआती जांच में ही यह खुलासा हुआ है कि गिरोह करीब 450 विदेशी नागरिकों से 8 करोड रुपए से अधिक की ठगी कर चुका है. पुलिस के अनुसार,, यह कोई साधारण कॉल सेंटर नहीं था बल्कि पूरी तरह से योजनाबद्ध तरीके से चलाया जा रहा साइबर फ्रॉड का अड्डा था. यहां काम करने वाले सभी लोग प्रशिक्षित थे और इन्हें खास तौर पर ट्रेनिंग दी गई थी.

बड़ी कंपनी का टेक्निकल एक्सपर्ट बताकर देते झांसा

फर्जी कॉल सेंटर में काम करने वालों को विदेशी नागरिकों से अंग्रेजी में बात करने की ट्रेनिंग दी गई थी. कॉल सेंटर में अलग-अलग टीम बनाई गई थी जिसमें कॉल करने वाले एजेंट, टेक्निकल सपोर्ट बताने वाले लोग और पैसे वसूलने वाले अलग-अलग सदस्य शामिल थे. गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया और इंटरनेट पर टेक्निकल सपोर्ट के नाम से विज्ञापन डालते थे.

इसके बाद ऑनलाइन डीलर के माध्यम से अमेरिका और यूरोप के नागरिकों से संपर्क किया जाता था. बातचीत के दौरान खुद को किसी बड़ी कंपनी का टेक्निकल एक्सपर्ट बताकर विश्वास दिलाया जाता था कि उनके कंप्यूटर लैपटॉप में वायरस है या वह हैक हो चुका है. डर और घबराहट पैदा कर पीड़ित बिना सोचे समझे उनकी बातों में आ जाता था.

स्क्रीन को ब्लैक कर पीड़ित को करते थे गुमराह

इस गिरोह की ठगी करने का सबसे खतरनाक तरीका यह है था कि आरोपी स्क्रीन शेयरिंग के जरिए पीड़ित के सिस्टम तक पहुंच बना लेते थे. उसकी स्क्रीन को ब्लैक कर देते थे इससे पीड़ित को लगता था कि उसका सिस्टम पूरी तरह से हैक हो गया है. इस स्थिति में आरोपी समस्या ठीक करने के नाम पर पैसे मांगते थे और पीड़ित मजबूरी में भुगतान कर देता था.

पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पिछले करीब 6 महीना से सक्रिय था. इस दौरान उन्होंने लगभग 450 विदेशी नागरिकों को अपना शिकार बनाया है. छोटे-छोटे भुगतान से शुरू होकर कई मामलों में बड़ी रकम तक वसूली गई. कुल मिलाकर अब तक 8 करोड रुपए से ज्यादा की ठगी सामने आई है, जिसे क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया जाता था.

क्रिप्टोकरंसी से छुपाते थे पैसा, गिरोह में पढ़े-लिखे लोग

आरोपी ठगी से मिली रकम को सीधे अपने बैंक खातों में रखने के बजाय क्रिप्टोकरंसी में बदल देते थे. इससे पैसे का ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था. पुलिस अब इन ट्रांजेक्शन की गहराई से जांच कर रही है और अन्य जुड़े लोगों की तलाश भी जारी है. पुलिस ने लैपटॉप, मोबाइल फोन समेत कई उपकरणों जब्त किए हैं, जिससे इस पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है.

डीसीपी साइबर सावे शैव्या गोयल ने बताया कि गिरफ्तार कई युवक बीकॉम और बीटेक पास हैं. इन लोगों ने अपनी तकनीकी जानकारी का गलत इस्तेमाल करते हुए साइबर अपराध को अंजाम दिया. यह गिरोह एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है. फिलहाल सभी आरटीओ से पूछताछ की जा रही है और उनके बैंक खातों में डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है.

Follow Us